बुधवार- 29 जुलाई
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Benito Mussolini
29 जूलाई वर्ष 1883 को इटली के एक मध्यम वर्ग के परिवार में फासीवादी दल की आधारशिला रखने वाले तानाशाह का जन्म हुआ।
- 29 जुलाई सन 1748 को र्इस्ट इंडिया कंपनी की सहायता के लिये ब्रिटिश सेना की पहली सैन्य टुकड़ी भारत पहुंची।
- 29 जुलाई सन 1941 को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के घटक जापान ने चीन और भारत पर अधिकार के लिए अपने सैनिक इस क्षेत्र के दक्षिणी तट पर उतारे।
- 29 जुलाई सन 1949 को ब्रिटिश ब्राडकॉस्टिंग कार्पोरेशन (बीबीसी) का रेडियो पर प्रसारण शुरू हुआ।
- 29 जुलाई सन 1957 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) का गठन किया।
- 29 जुलाई सन 1996 को भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान देने वाली प्रमुख महिलाओं में से एक अरुणा आसफ़ अली का निधन हुआ।
- 29 जुलाई सन 2010 को संयुक्त राष्ट्र संघ की मानवाधिकार परिषद ने 122 देशों के समर्थन से स्वच्छ पानी को मानवाधिकार बनाने का अबाध्यकारी प्रस्ताव पारित किया।
29 जूलाई वर्ष 1883 को इटली के एक मध्यम वर्ग के परिवार में फासीवादी दल की आधारशिला रखने वाले तानाशाह का जन्म हुआ। उसका नाम Benito Mussolini बेनिटो मुसोलिनी था। अपनी शिक्षा पूरी करने के पश्चात मूसोलिनी ने पत्रकारिता आरंभ की। मुसोलिनी ने इटनी में फासीवादी दल की आधारशिला रखकर बहुत अधिक शक्ति अर्जित कर ली थी। प्रधानमंत्री का पद प्राप्त करने के पश्चात उसने इटली को नाज़ियों के घटक के रूप में द्वितीय विश्व युद्ध में ढकेल दिया। इटली पर मित्र सेनाओं के सफल आक्रमणों और इस देश की पराजय के कारण मुसोलिनी की सरकार गिर गई। इटली से स्वीज़रलैण्ड भागते समय प्रतिरोधकर्ताओं द्वारा मूसोलीनी पकड़ लिए गया और 28 अप्रैल 1945 को उसे मृत्युदण्ड दिया गया।
29 जुलाई सन 1890 ईसवी को हॉलैंड के चित्रकार वेन्सन वॉन गोग का निधन हुआ। उनका जन्म 1853 ईसवी में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन में बहुत सी कठिनाइयां झेलीं। उन्होंने चित्रकारी के पुराने नियमों को बदल डाला और एक नयी शैली की आधारशिला रखी। वॉन गोग की कई पुस्तकों को विश्व ख्याति प्राप्त है।
29 जुलाई सन 1856 ईसवी को जर्मनी के संगीतकार रॉबर्ट शोमैन का 46 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उनकी संगीतकार पत्नी क्लारावीक ने उन्हें संगीत की ओर आकर्षित किया और फिर वे भी बड़ी जल्दी ही बहुत विख्यात हो गये।
29 जुलाई सन 1941 ईसवी को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के घटक जापान ने चीन और भारत पर अधिकार करने के लिए अपने सैनिक इस क्षेत्र के दक्षिणी तट पर उतारे। जापान ने इससे पहले पूर्वी और दक्षिणी चीन के विशाल क्षेत्र पर अधिकार कर लिया था। इस देश ने 1941 से 1942 के बीच, थाइलैंड, मलेशिया ईन्डोनेशिया सिंगापुर फिलिपीन और बर्मा पर भी अधिकार कर लिया जो ब्रिटेन फ़्रांस और हॉलैंड के अधीन थे। इस युद्ध में अमरीका के प्रवेश के बाद जापान धीरे धीरे अपने अतिग्रहित क्षेत्रों से बाहर निकला। बल्कि स्वयं जापान के अपने कुछ द्वीप उसके नियंत्रण से निकल गये। 1945 में हीरोशीमा और नागासाकी पर अमरीका के परमाणु आक्रमण के बाद जापान हथियार डालने पर विवश हो गया।

29 जुलाई सन 1957 ईसवी को संयुक्त राष्ट्र संघ ने परमाणु उर्जा की अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी IAEA की स्थापना की। इसका उददेश्य विश्व में सक्रिय परमाणु बिजलीघरों का निरीक्षण करना है कि उनका शांति पुर्ण लक्ष्यों के लिए प्रयोग हो तथा उनसे जनसंहारक हथियार न बनाए जा सकें। यह एजेंसी वियना में स्थित है। इस नगर में एक प्रयोगशाला भी है जो परमाणु उर्जा के विभिन्न क्षेत्रों में शांतिपूर्ण प्रयोग से संबंधित अपने शोधकार्यो के परिणाम से विश्व के देशों को अवगत कराती है। अमरीका, रूस, फ़्रांस, ब्रिटेन और चीन इसके निरीक्षण अधिकार से बाहर हैं।

29 जुलाई सन 1979 ईसवी को जर्मन विचारक हरबर्ट मारकूज़े का निधन हुआ। वे 1898 में पैदा हुए और जर्मनी में नाज़ियों के सत्ता में आ जाने के बाद अमरीका चले गये। वे स्वयं को मार्कसिस्ट कहते थे किंतु सोवियत संघ के मार्कसिज़्म को कटटरपंथी मानते थे।

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8 मुर्दाद सन 1360 हिजरी शम्सी को स्तर्गीय हज़रत इमाम ख़ुमैनी के दामाद आयतुल्लाह शहाबुद्दीन इशराक़ी का 58 वर्ष क आयु में निधन हुआ। उन्होंने प्राथमिक धार्मिक शिक्षा अपने पिता से ग्रहण की इस के बाद उन्होंने क़ुम नगर के धार्मिक शिक्षा केन्द्र में सैयद मुह्म्मद मुहक़्क़ि दामाद, सैयद हुसैन तबातबाई बोरुजेर्दी और इमाम ख़ुमैनी सरीखे महागुरुओं से शिक्षा प्राप्त की और अपनी व्यक्तिगत प्रतिभा से इजतेहाद अर्थात धार्मिक शिक्षा के उच्च चरण तक पहुँचे, उन्हें फ़्रांसीसी भाषा पर पूर्ण दक्षता प्राप्त थी। वे लगभग 12 वर्षों तक इमाम ख़ुमैनी की शिक्षाओं से लाभान्वित होते रहे और उन के विशेष शिष्य बनने का श्रेय प्राप्त किया। बाद में वे इमाम ख़ुमैनी के दामाद बने। वे इमाम ख़ुमैनी के नजफ़ तथा पेरिस में देश निकाले के दौरान उन के साथ रहे उन्होंने बहुत सी पुस्तकें लिखीं जिन में 20 प्रतियों पर आधरित क़ुरआन की व्याख्या विशेष रुप से उल्लेखनीय है।
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8 ज़िलहिज्जा सन 60 हिजरी क़मरी में पैग़म्बरे इस्लाम के नाती इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने मक्का से इराक़ की ओर यात्रा आरंभ की। यह वही यात्रा थी जो कर्बला की महात्रासदी पर ख़त्म हुई। इमाम हुसैन ने मुआविया के भ्रष्ट पुत्र यज़ीद के आज्ञापालन की प्रतिज्ञा से इन्कार करने के बाद मक्का से इराक़ के नगर कूफ़ा का रुख किया था। वह इससे चार महीने पहले अपने नगर, मदीने को परिवार के साथ छोड़ कर मक्का गये थे। मक्का में आवास के दौरान इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने बहुत बड़ी संख्या में मुसलमानों को यज़ीद के अत्याचार व अन्याय से अवगत कराया किंतु कूफ़ा नगर के लोगों के निरंतर आग्रह और मक्का में इमाम हुसैन की हत्या के षड़यंत्र के कारण उन्होंने मक्का से इराक़ के कूफ़ा नगर जाने का निर्णय किया और हज के मध्य मक्का छोड़ने की वजह से बहुत से लोगों को यज़ीद के षड़यंत्र के बारे में पता चला और इस असाधारण घटना की वजह से लोग यज़ीद और उसके षड़यंत्रों से अधिक अवगत हुए।