तेहरान-4
सन् 1979 में अन्य शहरों और गांवों की भांति तेहरान शहर भी आंदोलन और क्रांति का केन्द्र बना हुआ था।
सन् 1979 में अन्य शहरों और गांवों की भांति तेहरान शहर भी आंदोलन और क्रांति का केन्द्र बना हुआ था। हज़ारों लोग तेहरान की सड़कों पर निकल कर प्रदर्शन करते थे। वे देश में अत्याचारी पहलवी शासन की समाप्ति और आज़ादी एवं स्वाधीनता की मांग करते थे। शाह के सशस्त्र बल प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ अत्यधिक बल प्रयोग करते थे। उस समय तेहरान विश्वविद्यालय, मस्जिदें, सड़कें और विशेष रूप से इंक़ेलाब चौक और शोहदा चौक क्रांति के प्रमुख केन्द्र थे। 8 सितम्बर सन् 1978 को शाही बलों ने शोहदा चौक पर प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं और बच्चों और महिलाओं समेत प्रदर्शनकारियों को क्रूरतापूर्वक शहीद करना शुरू कर दिया।
उसी साल 4 नवम्बर को शाह के बलों ने तेहरान विश्वविद्यालय और उसके आसपास की सड़कों पर छात्रों पर हमला किया। पहली फ़रवरी सन् 1979 को तेहरान के इतिहास में स्वागत का एक भव्य आयोजन हुआ। 30 किलोमीटर की दूरी तक लाखों लोगों ने इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी का स्वागत किया। 10 दिन बाद 11 फ़रवरी को पहलवी शासन का पतन हो गया और इस्लामी क्रांति इमाम ख़ुमैनी के नेतृत्व में सफल हुई। उसके बाद से तेहरान की जनता ने हमेशा सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों में बढ़ चढ़कर भाग लिया है।
4 नवम्बर 1979 को तेहरान स्थित अमरीकी दूतावास पर कि जो अमरीकी सरकार के जासूसी के अड्डे में परिवर्तित हो चुका था, क्रांतिकारी छात्रों ने निंयत्रण कर लिया। इमाम ख़ुमैनी ने इस घटना को दूसरी क्रांति का नाम दिया था। विश्व भर में तेज़ी से यह ख़बर फैल गई और विश्ववासियों को एक महाशक्ति के दूतावास पर निंयत्रण करने की घटना से बहुत आश्चर्य हुआ।
जिस प्रकार इस्लामी क्रांति की सफलता से पहले तेहरान की सड़कों पर निकलकर लाखों लोग प्रदर्शन करते थे, क्रांति की सफलता के बाद भी विशेष अवसरों पर क्रांति के समर्थन में प्रदर्शनों और रैलियों का सिलसिला जारी रहा। क्रांति की सफलता के बाद से तेहरान विश्वविद्यालय में हर शुक्रवार को बड़ी संख्या में नमाज़ी जुमे की नमाज़ में भाग लेते हैं। नमाज़े जुमा के कारण हर शुक्रवार की दोपहर को ईरान की राजधानी तेहरान का वातावरण कुछ बदला हुआ होता है। इससे जहां लोगों के बीच आपसी मेल जोल बढ़ता है, वहीं आध्यात्मिक अनुभव होता है। इसी के साथ नमाज़े जुमा अधिकारियों के लिए एक ऐसा मंच है, जहां से वे देश और विदेश के महत्वपूर्ण मामलों की समीक्षा लोगों तक पहुंचा सकते हैं।
22 सितम्बर 1980 को अचानक तेहरान की वायु सीमा में युद्धक विमानों की घन गरज सुनाई दी और इराक़ के तानाशाह सद्दाम के युद्धक विमानों ने मेहराबाद हवाई अड्डे पर हमला कर दिया। दूसरी ओर सद्दाम की सेना ने ईरान के पश्चिमी और दक्षिणी शहरों पर व्यापक हमला शुरू कर दिया। हालांकि तेहरान युद्ध के मोर्चे से काफ़ी दूरी पर स्थित था, लेकिन 1980 से 1988 के बीच सद्दाम द्वारा थोपे गए युद्ध के कारण तेहरान शहर का चेहरा परिवर्तित हो गया था। दूसरी ओर, देश के दक्षिणी एवं पश्चिमी इलाक़ों से बड़ी संख्या में लोग पलायन करके इस शहर पहुंच रहे थे। इसके अलावा सद्दाम विरोधी इराक़ी शरणार्थी भी बड़ी संख्या में तेहरान का रुख़ कर रहे थे। यही कारण थे कि तेहरान शहर की जनसंख्या पहले से कहीं अधिक हो गई। युद्ध ने तेहरान को बहुत अधिक नुक़सान पहुंचाया, क्योंकि दुश्मन के विमानों ने इस शहर पर अनेक बार बमबारी की और लम्बी दूरी तक मार करने वाले मिज़ाइल दाग़े। युद्ध की समाप्ति के बाद, एक नए दौर का आरम्भ हुआ। इस चरण में पुन र्निमाण के लिए अभियान शुरू किया गया।
शाही शासनकाल में शहरों और गांवों के लोग सुविधाओं की कमी के कारण काफ़ी कठिनाईयों भरा जीवन व्यतीत करते थे, इसीलिए क्रांति के बाद दूसरे शहरों और गांवों से बड़ी संख्या में लोगों ने तेहरान का रुख़ किया। सद्दाम द्वारा थोपे गए युद्ध के विनाश के अलावा अंधाधुंध पलायन ने भी तेहरान की समस्याओं में वृद्धि कर दी। लेकिन पिछले तीन दशकों के दौरान समस्त समस्याओं के बावजूद तेहरान अपनी पहचान बचाने में सफल रहा है और आज भी वह दुनिया के सुन्दर शहरों में से एक है।
शहर का विकास, झोपड़पट्टियों के स्थान पर सुन्दर एवं हरे भरे इलाक़ों का निर्माण, शहर के समस्त भागों में न्यायपूर्ण तरीक़े से सुविधाओं का उपलब्ध करवाना, राजमार्गों का निर्माण, मैट्रो, पुल, विशाल इमारतों का निर्माण, शिक्षा एवं सांस्कृतिक केन्द्रों का विस्तार और पार्कों का निर्माण पिछले तीन दशकों में होने वाले वह विकास कार्य हैं, जो इस शहर में अंजाम दिए गए हैं।
इस समय तेहरान की आबादी एक करोड़ से अधिक है। स्वाभाविक रूप से इतनी बड़ी आबादी की आवाजाही के कारण ट्रैफ़िक की समस्या और प्रदूशण की समस्या पैदा होती है। लेकिन अलबोर्ज़ पहाड़ के दामन में स्थित होने और शहर के आसपास हरे भरे मैदानों के कारण तेहरान शहर दुनिया के कई बड़े शहरों से विशिष्ट है। सुन्दर मैदानी इलाक़े बड़ी आबादी और शोर शराबे वाले इस शहर का एक आकर्षण हैं। यही कारण है कि जब भी कोई पर्यटक तेहरान की यात्रा करता है तो वह यादगार के रूप में तेहरान के सुन्दर मैदानी इलाक़ों का उल्लेख ज़रूर करता है। तेहरान के लोगों के बीच भी काफ़ी पुराने समय से यह प्रचलन रहा है कि वे सप्ताहांत की छुट्टियां इन्हीं सुन्दर मैदानी इलाक़ों में गुज़ारते हैं। इसलिए कि बहुत थोड़ी सी दूरी तय करके शहर के आसपास ऊंचे इलाक़ों तक पहुंचा जा सकता है या मैदानी इलाक़ों की यात्रा करके तरो ताज़ा माहौल में शहर की थकन उतारी जा सकती है।
कार्यक्रम के अंत में हम तेहरान के बारे में लिखी गई एक किताब का उल्लेख करना चाहते हैं। तेहरान दर यक निगाह या तेहरान पर एक नज़र नामक किताब लेखकों के एक समूह द्वारा लिखी गई है और इसे ईरान के सांस्कृतिक मंत्रालय के प्रकाशन ने सन् 1992 में प्रकाशित किया था। इस किताब में तेहरान के दसियों आकर्षक एवं कलात्मक चित्र हैं। इस सुन्दर किताब द्वारा हम तेहरान के ऐतिहासिक, प्राकृतिक, पारम्परिक एवं सांस्कृतिक आकर्षणों से परिचित होते हैं। प्राचीन तेहरान के चित्र ब्लैक एंड व्हाईट हैं और वर्तमान तेहरान के चित्र रंगीन हैं। पर्यटक इस किताब द्वारा तेहरान के बारे में काफ़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह किताब फ़ार्सी और अंग्रेज़ी दो भाषाओं में है और महान कवियों के चुनिंदा शेर इसकी सुन्दरता में चार चाँद लगा देते हैं।