क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार-652
क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार-652
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ اسْجُدُوا لِلرَّحْمَنِ قَالُوا وَمَا الرَّحْمَنُ أَنَسْجُدُ لِمَا تَأْمُرُنَا وَزَادَهُمْ نُفُورًا (60)
और (हे पैग़म्बर!) जब उनसे कहा जाता है कि दयावान (ईश्वर) को सजदा करो तो वे कहते हैं, और दयावान क्या होता है? क्या तुम जिसका हमें आदेश दे रहे हो उसी को हम सजदा करने लगें? और (आपका) यह (निमंत्रण) उनकी घृणा को और बढ़ा देता है। (25:60)
تَبَارَكَ الَّذِي جَعَلَ فِي السَّمَاءِ بُرُوجًا وَجَعَلَ فِيهَا سِرَاجًا وَقَمَرًا مُنِيرًا (61) وَهُوَ الَّذِي جَعَلَ اللَّيْلَ وَالنَّهَارَ خِلْفَةً لِمَنْ أَرَادَ أَنْ يَذَّكَّرَ أَوْ أَرَادَ شُكُورًا (62)
(हर प्रकार की बुराई से) पवित्र है वह (ईश्वर) जिसने आकाश में राशियां बनाईं और उसमें (सूर्य के रूप में) एक चिराग़ और एक चमकता चाँद बनाया। (25:61) और वही है जिसने रात और दिन को एक-दूसरे के पीछे आने वाला बनाया, (यह) उस व्यक्ति के लिए (निशानी है) जो चेतना चाहे या कृतज्ञ होना चाहे। (25:62)
وَعِبَادُ الرَّحْمَنِ الَّذِينَ يَمْشُونَ عَلَى الْأَرْضِ هَوْنًا وَإِذَا خَاطَبَهُمُ الْجَاهِلُونَ قَالُوا سَلَامًا (63)
और दयावान (ईश्वर) के (सच्चे) बन्दे तो वही हैं जो धरती पर विनम्रता से चलते हैं और जब अज्ञानी उनसे संबोधित होते हैं (और तर्कहीन बात करते हैं) तो वे उत्तर में विनम्रतापूर्ण बात करते हैं। (25:63)