May १३, २०१८ १६:०८ Asia/Kolkata

ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से अब तक अमरीक कांग्रेस ने दसियों कानून बना कर ईरान की राजनीतिक आर्थिक व सामाजिक गतिविधियों को सीमित करने का प्रयास किया है।

1990 के दशक के आरंभ में ईरान के खिलाफ अमरीकी की प्रतिबंधों की नीति  ने अलग रूप धारण कर लिया और इस समय से इन प्रतिबंधों में तीसरे पक्ष को भी शामिल कर दिया गया । इस चरण में तीसरे देश , कंपनी या व्यक्ति को भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा हालांकि अमरीकी घटकों ने इस कानून पर कड़ी आपत्ति की और उसके पारंपरिक घटक युरोप ने कई बरस तक इस क़ानून को मानने से इन्कार कर  दिया।  वर्तमान सदी के आरंभिक दशक में ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम पर हंगामा आरंभ हुआ जिससे अमरीकियों को यह अवसर मिला कि वह ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों की अपनी नीति को संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में ले जाएं और ईरान के खिलाफ प्रतिबंध पारित कराएं। बहरहाल ईरान और गुट पांच धन एक के मध्य वार्ता और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव क्रमांक 2231 के पारित होने के बाद यह सिलसिला भी खत्म हो गया क्योंकि इस प्रस्ताव द्वारा, ईरान के खिलाफ परमाणु गतिविधियों से संबंधित सभी प्रस्तावों को निरस्त कर दिया गया था जिसकी वजह से अमरीका के भीतर, ईरान व परमाणु समझौते के विरोधी धड़े में आक्रोश फैल गया और उस पर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बयान बाज़ी ने अमरीक में ऐसा माहौल पैदा कर दिया कि उसमें प्रतिबंधों द्वारा अमरीका के दुश्मनों से मुक़ाबले का नया क़ानून  सीएएटीए " काट्सा "  पारित हो गया।

20 जनवरी 2017 को वाइट हाउस की सत्ता, डेमोक्रेट राष्ट्रपति और परमाणु समझौते के समर्थक बाराक ओबामा के हाथ से निकल कर , रिपब्लिकन राष्ट्रपति और परमाणु समझौते के विरोधी , डोनाल्ड ट्रम्प के हाथों में पहुंच गयी। डोनाल्ड ट्रम्प ने सन 2016 में चुनावी प्रचार के दौरान बार बार अपने भाषणों में परमाणु समझौते को अमरीकी इतिहास का सब से बुरा समझौता कहा था और वादा किया था कि जीतने की दशा में वह इस समझौते को बदल देंगे। उनके इस प्रकार के भाषणों से अमरीका के भीतर और बाहर ईरान और परमाणु समझौते के विरोधी काफी खुश हो गये थे और उन्होंने परमाणु समझौते के निरस्त करने के लिए प्रयास आरंभ कर  दिये।

 

इन लोगों के पास कई योजनाएं थीं। वह लोग समझौते के अनुच्छेदों में बदलाव से लेकर ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय भूमिका की आलोचना के लिए कानून पारित करने जैसे विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे थे लेकिन वाइट हाउस में ट्रम्प के आगमन का हंगामा खत्म होने के बाद कांग्रेस के अधिकांश सदस्यों के विचार , जेसीपीओए के बारे में बदल गये। अमरीका की ओर से समझौते के उल्लंघन की दशा में तेहरान की प्रतिक्रिया की ओर से चिंता,  ईरान की परमाणु गतिविधियों की समझौते से पहले वाली दशा में वापसी जैसी आशंकाओं ने  सेनेटर बॅाब क्रोकर और सेनेटर टाम कॅाटन जैसे घोर विरोधियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया।  उन लोगों ने खुल कर कहा कि वह ईरान के खिलाफ नया कानून बनाते समय कुछ एेसी शैली अपनाएंगे कि परमाणु समझौते का उल्लंघन न हो लेकिन उससे ईरान का मिसाइल कार्यक्रम और पश्चिम एेशिया में आईआरजीसी की उपस्थिति जैसी ईरान की क्षेत्रीय भूमिका प्रभावित हो जाए। इस प्रकार से  " ईरान के  अस्थायित्व  पैदा करने वाले क़दमों की रोक थाम "  का  विधेयक मार्च 2017 में अमरीकी कांग्रेस में पेश हुआ और फिर रूस और उत्तरी कोरिया पर प्रतिबंधों को भी इस विधेयक में शामिल करके उसका नाम " अमरीका के दुश्मनों का प्रतिबंधों से मुक़ाबला करने का क़ानून " रखा गया और उसे कांग्रेस में पारित कर दिया गया जिसके बाद अमरीकी राष्ट्रपति ने भी उस पर हस्ताक्षर कर दिये।

 

23 मार्च सन 2017 को इस विधेयक को रिपब्लिकन और डेमोक्रटिक पार्टियों के समर्थन के साथ अमरीकी सीनेट में पेश किया गया। इस विधेयक के मूल समर्थन, विदेश संबंध समिति के प्रमुख रिपब्लिकन सेनेटर बॅाब क्रोकर थे और राबर्ट मेनेन्डिज़  और बेन कार्डियन जैसे डेमोक्रेट सीनेटरों ने इसका समर्थन किया।  अलबत्ता मार्को रोबियो और टॅाम कॅाटन जैसे रिपब्लिकन सेनेटरों ने भी इस विधेयक का भरपूर समर्थन किया। इसके बाद और 6 जून सन 2017 में दोनों पार्टियों के वरिष्ठ  सेनेटरों ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का भी एक विधेयक पेश किया ताकि ईरान और रूस के खिलाफ दोनों विधेयक एक साथ पारित हो जाए। रूस के खिलाफ पेश किये गये विधेयक का  उद्देश्य रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को सुनियोजित करना और उसके पालन में विलंब करने से डोनाल्ड ट्रम्प को रोकना था। पहले तैय यह था कि यह विधेयक 7 जून को मतदान के लिए पेश किया जाएगा लेकिन तेहरान में ईरान की संसद पर दाशइ के आतंकवादी हमलों की वजह से कुछ सीनेटरों ने मतदान स्थगित करने की मांग की और इस तरह से 15 जून सन 2017 को " अस्थायित्व पैदा करने वाले ईरान के क़दमों के मुक़ाबले " का यह विधेयक अमरीकी सीनेट में मतदान के लिए पेश किया गया और  बर्नी सैन्डर्स और रैंड पाॅल के  2 वोटों के  मुकाबले में 98 वोटों से इस विधेयक को पारित कर दिया गया। इस कानून का उद्देश्य ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों को कड़ा करना था। 28 जून को सीनेट  ने संशोधित और पारित विधेयक कांग्रेस में भेज दिया। इस संशोधित विधयेक में अमरीका के संविधान के उल्लंघन की चिंता का निवारण कर दिया गया था। अमरीका के संविधान के अनुसार हर वह कानून जिसकी वजह से फेडरल सरकार पर आर्थिक बोझ पड़े, उसे पहले कांग्रेस में पारित होना चाहिए उसके बाद सीनेट भेजा जाना चाहिए। इसी लिए सीनेट ने यह स्वीकार किया कि ईरान के खिलाफ इस कानून पर पहले कांग्रेस में चर्चा हो और पारित होने के बाद वह फिर सीनेट में अंतिम फैसले के लिए फिर से पेश किया जाए।

अमरीकी संसद में "वर्ष 2017 में ईरान की अस्थिर करने वाली कार्यवाहियों से मुक़ाबले का क़ानून" नामक विधेयक की समीक्षा उसी समय आरंभ हुई जब उत्तरी कोरिया की मीज़ाइल व परमाणु गतिविधियों में वृद्धि हुई। अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प निरंतर उत्तरी कोरिया को परमाणु हमले की धमकी देते रहे। इसी के साथ अमरीकी सांसदों ने भी फ़ैसला किया कि ईरान, रूस और उत्तरी कोरिया के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों में वृद्धि की जाए। इस प्रस्ताव को मंज़ूरी मिली और इसे "प्रतिबंधों के माध्यम से अमरीका के दुश्मनों से मुक़ाबले का क़ानून" नाम दिया गया जिसमें ईरान, रूस और उत्तरी कोरिया पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है।

 

25 जुलाई सन 2017 को इस पर अमरीकी प्रतिनिधि सभा में मत विभाजन हुआ और यह विधेयक तीन विरोधी मतों के मुक़ाबले में 419 वोटों से पारित हो गया। अमरीकी प्रतिनिधि सभा के इस विधेयक में इस्लामी गणतंत्र ईरान के मीज़ाइल कार्यक्रम और इस्लामी क्रांति संरक्षक बल आईआरजीसी की गतिविधियों पर अधिक प्रतिबंध लगाया गया। दो दिन बाद इस विधेयक को अमरीकी सेनेट में भेजा गया और वहां भी यह दो विरोधी वोटों के मुक़ाबले में 98 मतों से पारित हो गया। इस प्रकार अमरीकी कांग्रेस का यह विधेयक अनुमोदन के चरणों से गुज़र कर वाइट हाउस पहुंचा ताकि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प इस पर हस्ताक्षर करें।

 

इस पूरी अवधि में जब ईरान, रूस और उत्तरी कोरिया पर प्रतिबंधों का विधेयक अपने क़ानूनी चरणों से गुज़र रहा था, वाइट हाउस और विशेष कर डोनल्ड ट्रम्प रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने का विरोध कर रहे थे। रूस के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों को ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों से जोड़ना, कांग्रेस में अमरीकी राष्ट्रपति के विरोधियों का काम था ताकि उन्हें रूस के संबंध में पारित होने वाले विधेयक को वीटो करने से रोका जा सके। उस समय ट्रम्प, अमरीका में रूस विरोधी सशक्त धड़े के विचारों से मुक़ाबला कर रहे थे और उनका मानना था कि वाशिंग्टन और मास्को के संबंधों में, अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में रूस के हस्तक्षेप जैसे आरोपों के बावजूद, गर्मी बाक़ी रहनी चाहिए।

 

यह ऐसी स्थिति में था कि जब अमरीकी कांग्रेस के अधिकतर सदस्य जिनमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों शामिल थे, अधिक प्रतिबंधों के माध्यम से रूस पर दबाव बढ़ाए जाने पर बल दे रहे थे। डेमोक्रेट्स ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने की मांग से उत्पन्न होने वाले अवसर से लाभ उठाया ताकि ट्रम्प से अपनी मांगें मनवा सकें। चूंकि परमाणु समझौते के बारे में ट्रम्प के अत्यंत नकारात्मक रुख़ के कारण उनकी ओर से ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने के विधेयक को वीटो करने की संभावना न होने के बराबर थी इसी लिए उस विधेयक में जिसे पहले सिर्फ़ ईरान के ख़िलाफ़ तैयार किया गया था, रूस और उत्तरी कोरिया पर प्रतिबंधों को भी जोड़ दिया गया। इसके परिणाम स्वरूप ट्रम्प के पास कांग्रेस के विधेयक पर दस्तख़त करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।

 

इसके अलावा दोनों सदनों में भारी बहुमत से पारित होने के कारण भी, ट्रम्प के पास "प्रतिबंधों के माध्यम से अमरीका के दुश्मनों से मुक़ाबले का क़ानून" को वीटो करने की संभावना नहीं रह गई थी। इसके परिणाम स्वरूप 2 अगस्त सन 2017 को ट्रम्प ने इस विधेयक पर दस्तख़त करके इसे क़ानून में बदल दिया। इसके बावजूद वाइट हाउस ने रूस के ख़िलाफ़ प्रतिबंध के क़ानून के संबंध में एक बयान जारी करके कहा कि इन प्रतिबंधों से संविधान की कुछ धाराओं का खुला उल्लंघन होता है।

 

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने भी पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस विधेयक के क्रियान्वयन में लचक को सीमित करने से अमरीका के लिए कठिनाइयां बढ़ जाएंगी और उत्तरी कोरिया, चीन और रूस के सहारे परमाणु हथियारों से निकट हो जाएगा। अलबत्ता अमरीकी राष्ट्रपति ने इन समस्याओं के बाजवदू, राष्ट्रीय एकता के लिए इस विधेयक पर दस्तख़त कर दिए। इस प्रकार ईरानी राष्ट्र के ख़िलाफ़ अमरीका की शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियों में एक और क़ानून की वृद्धि हो गई।(Q.A.)