Sep ०१, २०१८ १२:०७ Asia/Kolkata

अधिकांश लोगों के जीवन में बहुत से मूल और संयुक्त सवाल होते हैं।

साधारण लोगों से लेकर विशेष लोग और बुद्धिजीवी तक अपने जीवन के किसी न किसी चरण में सवालों का सामना करते हैं और कई बार उन सवालों की अनदेखी के बाद भी कभी न कभी उन सवालों के जवाब के बारे में उन्हें सोचना पड़ता है। इस सृष्टि की रचना, उसके रचयिता, और यह कि क्या इस रचना में रचयिता के चिन्ह हैं जैसे सवालों के बारे में ज़रूर सोचते हैं। इन सवालों को मनुष्य के मन में पैदा होने वाले मूल प्रश्नों में शामिल समझा जाता है। दुनिया के विभिन्न मतों और धर्मों में इन्सानों के इन बुनियादी सवालों के जवाब दिये गये हैं । यहां पर यह बात भी विचार योग्य है कि इ्स्लाम धर्म ने सभी को सृष्टि में विचार व चिंतन करने का निमत्रंण दिया है और स्वंय भी सृष्टि के बारे में  विचारधारा पेश की है जिस पर चिंतन किया जा सकता है। इस्लामी बुद्धिजीवियों ने , इस्लामी शिक्षाओं, कुरआने मजीद की आयतों और हदीसों के आधार पर इस सृष्टि पर चिंतन किया और इन सवालों का उत्तर खोजने का प्रयास किया कि हमारे आस पास की चीज़ें किस हद तक रचयिता के अस्तित्व का पता देते हैं।

ईश्वर ने इस दुनिया में तरह तरह की चीज़ें बनायी हैं कुछ में प्राण फूंके जैसे इन्सान, जानवर और कुछ को प्राणहीन मगर विशाल बनाया जैसे पहाड़ , कुछ को गतिशील बनाया जैसे सितारे और चांद व सूरज। ईश्वर की अनगिनत व आश्चर्यजनक रचनाओं में से एक पंक्षी भी हैं। कुछ पंछी, ज़मीन के सूराखों में रहते हैं, कुछ दर्रों और घाटियों में और कुछ अन्य पहाड़ों की चोटियों पर। पंछियों के अलग अलग रंग व रूप  के पंख होते हैं। तो आएं ज़रा इन पंछियों की रचना पर विचार करते हैं।

 

 

 

चूंकि पंछियों की रचना इस बात के दृष्टिगत की गयी है कि उन्हें उड़ना और आकाश की गहराइ नापना है इस लिए उनके शरीर की बनावट में इस बात का ध्यान रखा गया है। यही वजह है कि पंछियों का शरीर ,हल्का होता है , चार हाथ पैरों के बजाए उन्हें दो पैर  और पांच उंगलियों के बजाए चार तथा मल व मूत्र त्याग के लिए दो के बजाए एक ही छिद्र दिया गया है।

 

जिस प्रकार से नौका का अगला हिस्सा, बारीक होता है और इसी लिए वह पानी का सीना चीरते हुए आगे बढ़ती है, पंछी के सीने का हिस्सा भी उसी प्राकर होता है ताकि वह हवा का सीना चीरते हुए उड़ान भर सके। इसी प्रकार पंछी के दुम में बड़े बड़े पंख लगे होते हैं  ताकि वह उनकी मदद से आसानी के साथ उड़ सके, पंछी का पूरा शरीर पंखों से भरा होता है इस लिए हवा पंखों के भीतर जाकर, उड़ने में पंछी की मदद करती है और ऊंचाई पर वह रुका रह सकता है।

 

 

चूंकि पंछियों का आहार दाना और मांस होता है और चबाए बिना ही उसे निगलना होता है इस लिए उन्हें ईश्वर ने मनुष्य या कई अन्य प्राणियों की भांति जबड़े और होंठ आदि नहीं दिये बल्कि इसके लिए उन्हें लंबी चोंच दी जिसकी सहायता से वह आसानी से अपने आहार की व्यवस्था कर सकते हैं। और चूंकि पंछी अपना आहार बिना चबाए ही निगल लेते हैं इस लिए ईश्वर ने उनके भीतर एेसी गरमी पैदा की है जो कडे़े दानों और कच्चे मांस को  पीस कर और गला कर भूसा बना देता है लेकिन चूंकि मनुष्य में यह क्षमता नहीं होता इस लिए अगर वह गलती से भी अनाज का दाना निगल ले तो उसका शरीर उसे पचा नहीं पाता और वह दाना उसी प्रकार के निकल जाता है।

 

 

 

इसके अलावा ईश्वर ने एेसी व्यवस्था की है कि पंछी , बच्चे पैदा करने के लिए अंडे देते हैं। वह अधिकांश प्राणियों की भांति गर्भ धारण नहीं करते क्योंकि उस दशा में उसका शरीर भारी हो जाता और उन्हें उड़ने में परेशानी होती इस लिए ईश्वर ने गर्भारण की प्रक्रिया से उन्हें मुक्त रखा और वह अंडे देकर अपनी नस्ल आगे बढ़ाते हैं। यदि गौर करें तो निश्चित रूप से इस पर हैरत होगी कि आकाशों में उड़ने वाला पंछी किस तरह से ज़मीन पर और अपने घोंसले में दो तीन हफ्तों तक अंडों पर बैठा रहता है फिर जब अंडों से बच्चे निकल आते हैं तो उन्हें दाना देता है और उन्हें पालता पोसता है। आप के ख्याल में इस तरह की व्यवस्था किस ने की है ? किस ने उस पक्षी को बताया है कि उसके बच्चे किस तरह का खाना खा सकते हैं? क्यों वह इतनी लगन से अपने बच्चों के लिए चारा खोजता है जबकि उसके पास बुद्धि भी नहीं होती और इन्सानों की तरह उसे अपने बच्चों से उम्मीद भी नहीं होती है कि बड़े होकर वह उसके काम आएंगे या उसकी नस्ल को आगे बढ़ाएगें? निश्चित रूप से यह सब कुछ उस ईश्वर ने किया है जो कृपालु व दयालु है अगर वह एेसा न करता तो बच्चे अंडे से निकलते ही नहीं या निकलते भी तो मर जाते।

 

पंछी अंडे देने के लिए सब से पहले उचित जगह का चयन करता है, फिर वहां अंडे देता है और फिर भूखा प्यासा रह कर अंडे सेता है ताकि उनमें से बच्चे निकलें । कभी हम ने सोचा कि बच्चे पैदा करने के लिए पंछी इतनी मेहनत क्यों करता है? पंछी में तो बुद्धि नहीं होती तो फिर वह अपनी नस्ल बचाने के लिए क्यों इस तरह जान की बाज़ी लगाता है? क्या इसकी इसके अलावा कोई और वजह हो सकती है कि ईश्वर ने उसे एेसा करने का आदेश दिया है?

 

स्वंय अंडे पर भी विचार करें, उसमें पीले और सफेद रंग के द्रव्य होते हैं। इसका कुछ भाग, बच्चा बनने में और कुछ भाग, बच्चा बनने के बाद उसके आहार के लिए होता है। चूंकि चूज़ा, अन्डे के भीतर बनता और बढ़ता है और उसके कड़े छिलकों को पार करके कोई चीज़ भीतर जा नहीं सकती इस लिए उसके भीतर , अंडे तोड़ कर बाहर निकलने तक के लिए पर्याप्त आहार की व्यवस्था ज़रूरी थी। शायद  कुछ लोगों को यह महसूस हो कि रंग बिरंगे पंछी स्वंय ही बन गये हैं लेकिन यदि आप गौर करें विशेष मोर जैसे पंछियों पर जिन्हें इतनी सूक्ष्मता के साथ बनाया गया है कि उन्हें देख कर ही ईश्वर की शक्ति पर विश्वास कर लिया जाना चाहिए। पखों के रंग के अलावा स्वंय पखं की बनावट पर भी ध्यान देें तो पाएंगे कि किस प्रकार सूक्ष्मता व बुद्धिमत्ता के साथ उसे बनाया गया है। पखं को इस तरह से बनाया गया है कि पंछी उसे फैला सके लेकिन उस के भीतर से हवा पार न हो ताकि वह हवा पर टिका रहे लेकिन हवा उसे पंख को फाड़ न दे इस लिए उसके परों को मज़बूत हड्डियों से बनाया गया लेकिन हड्डियां भारी होकर पंछी को उड़ने से न रोकें इस के लिए इन हड्डियों को हलका बनाया गया।

 

 

पंछियों के बारे में एक रोचक तथ्य यह भी है कि उनके पैरों को विशेष प्रकार से बनाया गया है। किसी पंछी का पैर लंबा होता है तो किसी का छोटा । इसका कारण क्या है? लंबे पैर प्रायः पानी में रहने वाले और पानी में शिकार करने वाले पंछियों के होते हैं। दरअसल पानी में अपना चारा खोजने वाले पंछियों को लंबी पैरों की बहुत ज़रूरत होती है इस तरह से वह पानी के खड़े रह कर शिकार कर सकते हैं। यदि उनके पैर छोटे होते तो पानी में आगे बढ़ते समय उनका पेट पानी को छुता जिससे पानी में काफी हलचल होती और शिकार भाग जाता। इन पंछियों के लंबे पैरों के साथ ही गर्दन भी लंबी होती है ताकि वह पानी के भीतर से आसानी से अपना चारा हासिल कर सकें अगर उनके पैर लंबे लेकिन गर्दन छोटी होती तो वह नीचे से कोई चीज़ उठा ही नहीं पाते उस दशा में लंबे पैर उनके लिए अभिशाप बन जाते।

 

जैसा कि हमने इस कार्यक्रम में सुना और समझा कि ईश्वर ने पंछियों की रचना , बहुत सूझ बूझ से की है और यदि उनकी रचना पर गौर किया जाए तो बहुत अच्छी तरह से यह बात समझ में आ जाएगी कि इस पूरी रचना के एक अंश को जब इतनी सूक्ष्मता से पैदा किया गया है तो फिर पूरे ब्रहमांड की रचना कितनी सूझबूझ के साथ की गयी होगी और यह सब कुछ जिस ने किया है निश्चित रूप से वह ऐसा है कि हम सब उसके सामने शीश नवाएं। (Q.A.)

 

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