शनिवार- 11 अप्रैल
1995, भारत चौथी बार एशिया कप क्रिकेट चैंपियन बना।
1995, यूक्रैन में स्थित चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र वर्ष 2000 तक बंद करने की घोषणा।
1995, भारत चौथी बार एशिया कप क्रिकेट चैंपियन बना।
1999, मलेशिया के अपदस्थ उप प्रधानमंत्री अनवर इब्राहीम को भ्रष्टाचार के मामले में छह वर्ष क़ैद की सज़ा।
2000, रूस की संसद ने मास्को और वाशिंगटन के बीच 'स्टार्ट-2' परमाणु शस्त्र कटौती संधि का अनुमोदन किया।
2002, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में मुक़दमें का सामना कर रहे सर्बियाई नेता का निधन।
2005, भारत और अमरीका ने अपने-अपने उड़ान क्षेत्र एक-दूसरे की एयरलाइनों के लिए खोलने का ऐतिहासिक समझौता किया।
2008, उत्तर प्रदेश सरकार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश का भौगोलिक नक्शा बनाने की घोषणा की।
2008, 40 वर्ष बाद भारत व बांग्लादेश के बीच सम्बन्धों को मज़बूत बनाने के लिए मैत्री एक्सप्रेस कोलकाता और बांग्लादेश की राजधानी ढाका से एक दूसरे देश के लिए रवाना हुई।
2008, पुरातत्वविदों ने मिस्र के सिनाई प्राय:द्वीप से रोमन सम्राट वेलेन्स के काल के प्राचीन सिक्के बरामद करने का दावा किया।
2010, पोलैंड के राष्ट्रपति लेख काजिंस्की की विमान दुर्घटना में मृत्यु।
11 अप्रैल सन 1859 ईसवी को फ़्रांस के रसायनशास्त्री फ़्रेडनेन्ड कैरे ने उष्मा पैदा करने वाली मशीन बनाई। यह मशीन एमोनिक गैस से उष्मा पैदा करती थी। यह अविष्कार खाद्य पदार्थों और दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण कदम था। यह मशीन बाद में फ़्रिज के रुप में परिवर्तित हुई जो आज बड़ी ही उपयोगी वास्तु है।
11 अप्रैल सन 1919 ईसवी को मेक्सिको के विख्यात क्रान्तिकारी एमीलियानो ज़ेपेटा की एक षड़यंत्र द्वारा हत्या कर दी गयी। उन्होंने 1910 के अंतिम दिनों में धरती और स्वतंत्रता के नारे के साथ हथियार उठाया और रेड इंडियन्स के साथ अतिग्रहित भूमि को वापस लेने के लिए संघर्षरत हो गये। ज़ेपेटा जब तक मेक्सिको के राष्ट्रपति फ़्रान्सिसको मैड्रो को सुधारवादी नेता समझते रहे उन्हें राष्ट्रपति का समर्थन प्राप्त रहा किंतु जब उन्होंने भूमि संबंधी अपने सुधारों की घोषणा की तो मेड्रो उनके विरुद्ध हो गये। इसी लिए ज़ेपेटा भूमि संबंधि सुधार के लिए मैड्रो के विरुद्ध भी मोर्चाबद्ध हो गये और उन्होंने अतिग्रहणकारियों के नियंत्रण से अतिग्रहित भूमि को निकालने के बाद ही दम लिया। किंतु उनके शत्रुओं ने आज के दिन षड़यंत्र करके उन्हें मार दिया।
11 अप्रैल वर्ष 1974 ईसवी को पाकिस्तान रेडियो के प्रसिद्ध उद्घोषक रफ़ी पीर का देहान्त हुआ। वह 21 मार्च सन 1900 ईसवी को जन्मे थे। उन्होंने लाहौर से मैट्रिक किया फिर लाहौर के गवर्मेंट कालेज में पढ़ने लगे। असहयोग आंदोलन, ख़िलाफ़त आंदोलन और जलियां वाला बाग जनसंहार के कारण उन्होंने कालेज छोड़ दिया और राजनीति में कूद पड़े। इस संबंध में उनकी गिरफ़्तारी के वारंट जारी हुए और वह लंदन और वहां से जर्मनी चले गये। जर्मनी में उन्होंने साहित्य और दर्शनशास्त्र में दक्षता प्राप्त की। उसके बाद उनकी रूचि फ़िल्म और थ्येटर की ओर हो गयी किन्तु वह शीघ्र ही भारत लौट आए। भारत लौटकर उन्होंने लाहौर और फिर नई दिल्ली रेडियो स्टेशनों के लिए विभिन्न ड्रामे लिखे जिनमें उनका ड्रामा अखियां बहुत प्रसिद्ध हुआ। 11 अप्रैल वर्ष 1974 ईसवी को उनका देहान्त हो गया।
11 अप्रैल सन 1985 ईसवी को अलबानिया के पूर्व राष्ट्रपति अनवर खोजा का निधन हुआ। 1939 में इटली द्वारा अलबानिया के अतिग्रहण के बाद उन्होंने वामपंथी छापामारों का नेतृत्व संभाल लिया। 1944 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इटली की पराजय के बाद अनवर खोजा ने सोवियत संघ की सेना की सहायता से अलबानिया का शासन हाथ में लिया और दो वर्ष बाद इस देश में कम्यूनिस्ट प्रजातंत्र की घोषणा कर दी।
उन्होंने अलबानिया कम्यूनिस्ट पार्टी भी बनाई और स्वयं उसके महासचिव बने। 1961 तक उनके सोवियत संघ से अच्छे संबंध रहे किंतु बाद में मॉस्को से संबंधों में तनाव उत्पन्न हो जाने के बाद अलबानिया चीन के माओवाद का समर्थक बन गया।
अनवर खोजा की अत्याचारपूर्ण नीतियों कारण बनीं कि अलबानिया योरोप का सबसे दरिद्र देश बन गया। अलबानिया पर 41 वर्ष तक शासन करने के पश्चात सन 1985 में उनका निधन हुआ। 1992 में अलबानिया ने योरोप के अंतिम देश के रुप में कम्यूनिस्ट शासन व्यवस्था को हटा दिया और इस देश में प्रजांतत्र स्थापित हो गया।

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23 फ़रवरदीन वर्ष 1281 हिजरी शम्सी को प्रसिद्ध ईरानी साहित्यकार और उपन्यासकार सादिक़ हिदायत का जन्म हुआ। ईरान में आरंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे यूरोप चले गये। चार वर्ष तक फ़्रांस में रहे और इस दौरान उनहोंने फ़्रांस की सैर के साथ प्रसिद्ध कहानियां और उपन्यास लिखे। वह ईरान वापस आए तो विदेशमंत्रालय ने उन्हें राजदूत बनाकर भारत भेज दिया। उनकी पुस्तकों में ज़िंदा बेगूर, क़तरये ख़ून, सगे वेलगर्द और बूफ़े कूर का नाम लिया जा सकता है।
23 फ़रवरदीन वर्ष 1381 हिजरी शम्सी को डाक्टर यदुल्लाह सहाबी का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह 1284 हिजरी शम्सी में तेहरान में जन्मे थे। आरंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद वे उच्च शिक्षा की प्राप्ति के लिए फ़्रांस चले गये और 1315 हिजरी शम्सी में उन्होंने जियालोजी में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। ईरान लौट आने के बाद उन्होंने शहीद मुदर्रिस और डाक्टर मुसद्दिक़ का साथ दिया। वर्ष 1322 हिजरी शम्सी में उन्होंने औपचारिक रूप से राजनीति में क़दम रखा और चार वर्ष, आठ महीने तक जेल की यातनाएं सहन कीं। इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद वह राज्यमंत्री बने और फिर ईरान की संसद मजलिसे शूराए इस्लामी के पहले चरण में सफल होने के बाद सांसद के रूप में जनसेवा में लग गये। वह राजनैतिक कार्यों के साथ साथ धार्मिक और वैज्ञानिक कार्यों में भी व्यस्त रहे। उनकी महत्त्वपूर्ण पुस्तकों में, ख़िलक़ते इन्सान, क़ुरआन व तकामुल और मारेफ़तुल अर्ज़ मुख्य रूप से उल्लेखनीय हैं।
23 फ़रवरदीन सन 1371 हिजरी शम्सी को ईरान के समकालीन लेखक मोहसिन सबा का निधन हुआ। वे ईरान में आरंभिक शिक्षा प्राप्ति के पश्चात फ़्रांस चले गये और इस देश से कानून के विषय में डॉक्ट्रेट की डिगरी प्राप्त करने के बाद स्वदेश लौटे और शिक्षा देने में व्यस्त हो गये। उन्होंने कई मूल्यवान पुस्तकें लिखीं उन्होंने युनेस्को के लिए भी काम किया। उनकी पुस्तकों में किताब शेनासी तथा गुलहाए हाफ़िज़ उल्लेखनीय हैं।