क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार-722
क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार-722
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ. الم (1) أَحَسِبَ النَّاسُ أَنْ يُتْرَكُوا أَنْ يَقُولُوا آَمَنَّا وَهُمْ لَا يُفْتَنُونَ (2) وَلَقَدْ فَتَنَّا الَّذِينَ مِنْ قَبْلِهِمْ فَلَيَعْلَمَنَّ اللَّهُ الَّذِينَ صَدَقُوا وَلَيَعْلَمَنَّ الْكَاذِبِينَ (3)
अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील और दयावान है। अलिफ़ लाम मीम (29:1) क्या लोगों ने यह समझ रखा है कि वे इतना कह देने मात्र से छोड़ दिए जाएँगे कि हम ईमान लाए और उन (के ईमान) की परीक्षा न ली जाएगी? (29:2) और निश्चित रूप से हम उन लोगों की परीक्षा कर चुके है जो इनसे पहले गुज़र चुके हैं। निश्चय ही ईश्वर को यह देखना है कि कौन (अपने ईमान के दावे में) सच्चे हैं और वह यह भी जान कर रहेगा कि झूठे कौन हैं? (29:3)
أَمْ حَسِبَ الَّذِينَ يَعْمَلُونَ السَّيِّئَاتِ أَنْ يَسْبِقُونَا سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ (4) مَنْ كَانَ يَرْجُو لِقَاءَ اللَّهِ فَإِنَّ أَجَلَ اللَّهِ لَآَتٍ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ (5)
या उन लोगों ने, जो बुरे कर्म करते हैं, यह समझ रखा है कि वे हमसे आगे निकल जाएँगे? कितना बुरा है वह फ़ैसला जो वे कर रहे हैं। (29:4) जो व्यक्ति ईश्वर से मिलने का आशा रखता है तो निश्चय ही ईश्वर का नियत समय आने ही वाला है। और वह सब कुछ सुनने वाला और जानकार है। (29:5)
وَمَنْ جَاهَدَ فَإِنَّمَا يُجَاهِدُ لِنَفْسِهِ إِنَّ اللَّهَ لَغَنِيٌّ عَنِ الْعَالَمِينَ (6) وَالَّذِينَ آَمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ لَنُكَفِّرَنَّ عَنْهُمْ سَيِّئَاتِهِمْ وَلَنَجْزِيَنَّهُمْ أَحْسَنَ الَّذِي كَانُوا يَعْمَلُونَ (7)
और जो (ईश्वर के मार्ग में) संघर्ष करता है तो निश्चय ही वह स्वयं अपने ही लिए संघर्ष करता है। निश्चित रूप से ईश्वर सारे संसार से आवश्यकतामुक्त है। (29:6) और जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए हम उनसे उनकी ग़लतियों को दूर कर देंगे और उन्हें, जो कुछ अच्छे कर्म वे करते रहे होंगे, उसका प्रतिफल प्रदान करेंगे। (29:7)