रविवार- 19 अप्रैल
19 अप्रैल सन 1707 ईसवी को फ़्रांस के लेखक जॉर्ज लुई बोफेन का जन्म हुआ।
उन्होंने अपना अधिकांश समय ज्ञान संबंधी गतिविधियों में बिताया। और भौतिक शास्त्र के विषय में 24 प्रतियों पर आधारित एक पुस्तक लिखी। इस पुस्तक में धर्ती वनस्पतियों पशुओं और पत्थरों के इतिहास को बड़े सादे अंदाज़ में लिखा गया है। वे सन 1753 ईसवी में फ़्रांस की विज्ञान अकेडमी के सदस्य बने और 1778 ईसवी में उनका निधन हुआ।
19 अप्रैल सन 1807 ईसवी को मिस्र की सेना से भारी पराजय का सामना करने के पश्चात ब्रिटेन की अतिक्रमणकारी सेना इसकंदरिया बंदरगाह से पीछे हटने पर विवश हुई। ब्रिटन ने जो उस समय अपने उपनिवेशों में विस्तार के लिए प्रयास रत था मिस्र पर अधिकार करके उसमानी शासन पर दबाव बनाने का प्रयास किया क्योंकि मिस्र उस समय उसमानी शासन के अधीन था। इसी प्रयास के अंतर्गत ब्रिटैन की नौसेना ने मिस्र पर धावा बोल दिया। युद्ध के आरंभ में तो इसकंदरिया बंदरगाह पर ब्रिटिश सेना ने अधिकार कर लिया किंतु मिस्र के शासक मोहम्मद अली पाशा ने जनता और धर्मगुरुओं की सहायता से जिन्होंने जेहाद का फ़तवा जारी किया था मिस्र की रक्षा की। मिस्र की जनता ने बड़े ही साहस से और जान पर खेलकर अपने देश की रक्षा की और उस समय के अत्याधुनिक शस्त्रों से लैस ब्रिटिश सेना को पराजित कर दिया और अंतत: आज के दिन अतिक्रमणकारी सेना मिस्र से निकलने पर विवश हो गयी।

19 अप्रैल सन 1993 ईसवी को अमरीकी पुलिस एफ़ बी आई द्वारा डेविडियन मत के अनुयाइयों के मुख्यालय पर किए गए आक्रमण में इस समुदाय के 80 लोग ज़िन्दा जल कर मर गये। मरने वालों में बच्चे और महिलाएं भी थीं। इस समुदाय के लोग कि जो अमरीकी नीतियों के विरोधी हैं कई दिन तक एफ़ बी आई के परिवेष्टन में रहे फिर उन पर भीषण आक्रमण हुआ।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के समर्थन का दावा करने वाले देश अमरीका में सरकार विरोधी गुट का जनसंहार विश्व के लिए आशचर्य चकित कर देने वाली घटना थी।
इस घटना के बाद पूरे विश्व में अमरीका के प्रति घृणा प्रकट की गयी।

19 अप्रैल 1895 को फ़्रांस के प्रसिद्ध रसायन शास्त्री लुई पास्चर का 70 वर्ष की आयु में देहांत हुआ। मानवता के लिए फ़्रांस के इस बुद्धिजीवी की सेवाओं को नहीं भुलाया जा सकता। लुई पास्चर ने पेरिस में आरंभिक शिक्षा पूरी करने के पश्चात पढ़ाना आरंभ किया। सत्ताईस वर्ष की आयु में उन्होंने डाक्टर ऑफ़ साइंस की उपाधि प्राप्त की और रसायन शास्त्र के प्रोफ़ेसर के रूप में वैज्ञानिक सेवा में लीन हो गए। उन्होंने संक्रामक बीमारियों और कीटाणुओं से संघर्ष में महत्वपूर्ण सफलताएं अर्जित कीं और रोगों के उपचार की पारंपरिक शैली के स्थान पर नई शैली का आधार रखा। फ़्रांस सरकार ने 1888 में लुई पास्चर की सेवाओं को सराहते हुए उनके नाम पर पास्चर इंस्टीट्यूट स्थापित किया।
19 अप्रैल 1970 को ऊर्दू के प्रतिष्ठित साहित्यकार सय्यद इम्तेयाज़ अली ताज का निधन हुआ। 13 अक्तूबर सन 1900 को लाहौर में उनका जन्म हुआ। उन्होंने अपनी शिक्षा ग्वर्नमेंट कालेज लाहौर से पूरी की। उर्दू के प्रतिष्ठित साहित्यकारों व ड्रामा लेखकों में उनकी गणना होती है। वर्ष 1922 में उन्होंने प्रसिद्ध नाटक अनारकली लिखा जिसे उर्दू साहित्य के उत्कृष्ट ड्रामों में गिना जाता है। इसके अतिरिक्त उन्होंने चचा छक्कन नामक जो चरित्र पेश किया है वह भी उर्दू ड्रामों के यादगार चरित्रों में से एक है। अली ताज ने ड्रामा पर आलोचनात्मक लेख, रेडियो ड्रामे, उपन्यास और लघु उपन्यास भी लिखे। आयु के अंतिम वर्ष उन्होंने आर्ट्स काउंसिल लाहौर और फिर उर्दू साहित्य विकास संस्था के प्रमुख के रूप में बिताया। 18 अप्रैल 1970 को उन पर अज्ञात लोगों ने प्राणघातक आक्रमण किया जिस के घाव सहन न कर पाने के कारण वे अगले दिन 19 अप्रैल 1970 को इस संसार से चल बसे।
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31 फ़रवरदीन 1256 हिजरी शम्सी को आयतुल्लाह सय्यद मोहसिन हसन ईरान के ख़ुरासान प्रांत के एक गांव ख़ुसरविये में पैदा हुए। वह बाद में आक़ा नजफ़ी क़ूचानी के नाम से प्रसिद्ध हुए।
उन्होंने आरंभिक धार्मिक शिक्षा क़ूचान में प्राप्त की। उसके बाद वह सब्ज़वार और फिर मश्हद चले गए। फिर उन्होंने चार वर्ष तक इस्फ़हान में धार्मिक शिक्षा प्राप्त की। उच्च धार्मिक शिक्षा के लिए वे पवित्र नगर नजफ़ चले गए जहां उन्होंने आख़ुन्द ख़ुरासानी और शैख़ुश्शरीया इस्फ़हानी से ज्ञान अर्जित किया। तीस वर्ष की आयु में आक़ा नजफ़ी क़ूचानी धार्मिक शिक्षा में इज्तेहाद के स्तर तक पहुंचे। पवित्र नगर नजफ़ में बीस वर्ष रहने के पश्चात वे अपने पैतृक नगर लौट गयें। आक़ा नजफ़ी क़ूचानी ने अनेक किताबें लिखी हैं जिनमें पूरब की सैर, पश्चिम की सैर, इस्बाते रजअत इत्यादि प्रसिद्ध हैं।
31 फ़रवरदीन सन 1366 हिजरी शम्सी को प्रसिद्ध ईरानी विचारक व पवित्र क़ुरआन के व्याख्याकार उस्ताद मोहम्मद तक़ी शरीअती का 80 वर्ष की आयु में देहांत हुआ। वह 1286 हिजरी शम्सी में जनमे और आरंभिक शिक्षा पूरी करने के पश्चात वे इस्लामी शिक्षा व संस्कृति के प्रसार में लग गए। पवित्र नगर मश्हद में उन्होंने इस्लामी शिक्षा प्रसारण केन्द्र नामक एक संस्था स्थापित की और अपना पूरा जीवन इस्लामी शिक्षाओं के प्रचार व प्रसार में बिताया।
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25 शाबान सन 137 हिजरी क़मरी को रासानी की तत्कालीन अब्बासी शासक मन्सूर के आदेश पर ईरानी सरदार अबू मुस्लिम हत्या कर दी गयी।
उन्होंने ख़ुरासान में अत्याचारी उमवी शासकों के विरुद्ध एक जनसमूह के विद्रोह का नेतृत्व किया। लम्बे संघर्ष के बाद ख़ुरासानी के साथियों ने उमवी शासक को पराजित कर दिया। इस तरह उमवी शासन के पतन और अब्बासी शासन के सत्ता में आने की भूमिका प्रशस्त हुई। इस बीच अबू मुस्लिम को बड़ी शक्ति और भारी लोकप्रियता प्राप्त हो गयी। उनकी शक्ति से अब्बासी शासक मन्सूर भयभीत रहता था। इस लिए उसने एक षडयंत्र करके अबू मुस्लिम को मरवा दिया। अबू मुस्लिम के साथियों ने बहुत दिनों तक प्रतिशोधात्मक कार्रयवाही जारी रखी।
25 शाबान सन 737 हिजरी क़मरी को ईरान के पूर्वोत्तरी नगर सब्ज़वार में मंगोल शासकों के विरुद्ध सरबेदारान का विद्रोह सफल हुआ और इसी नाम की शासन श्रृंखला की स्थापना हुई। सरबेदारान एक गुट था जो ईरान पर मंगोलों के वर्चस्व और अत्याचार से तंग आ चुका था।
वास्तव में इस गुट के सदस्यों को सरबेदारान कहा जाता है जिसका अर्थ है हथेली पर सिर लेकर चलने वाले।
इस गुट ने धर्मगुरुओं के नेतृत्व में मंगोल शासकों और उनके पिटठुओं से संघर्ष किया और उन्हें पराजित कर दिया।