सोमवार- 20 अप्रैल
20 अप्रैल सन 1802 ईसवी को वहाबियों ने इराक़ के पवित्र नगर कर्बला पर हमला किया और सैकड़ों शिया मुसलमानों को मार डाला।
19वीं सदी के अंतिम वर्षों में हेजाज़ (वर्तमान सऊदी अरब) में वहाबियों के शक्तिशाली हो जाने के साथ ही अन्य मुसलमानों विशेष कर शिया मुसलमानों से उनकी झड़पें आरंभ हो गई थीं। 20 अप्रैल सन 1802 में इन्हीं वहाबियों ने कर्बला और नजफ़ नगरों पर धावा बोल दिया। इस हमले में वहाबियों ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के रौज़े को भारी नुक़सान पहुंचाया और रौज़े के ख़ज़ाने को लूट लिया। इस दिन दो हज़ार वहाबियों ने कर्बला पर धावा बोला था और उन्होंने इस नगर में भी तबाही मचा दी। हेजाज़ में सऊद वंश के सत्ता में आने और सऊदी अरब बनने के बाद वहाबियों को अधिक शक्ति मिल गई और अन्य मुसलमानों विशेष कर शिया मुसलमानों के ख़िलाफ़ उनके अपराध आज भी जारी हैं।
20 अप्रैल सन 2010 को मैक्सिकों की खाड़ी में ब्रिटिश पेट्रोलियम के नियंत्रण वाली ऑयल जेटी, Deepwater Horizon में भीषण विस्फोट हुआ। इस भीषण विस्फोट के कारण यह जेटी डूब गई और 11 लोग मारे गए। इस दुर्घटना के कारण मैक्सिको खाड़ी में तेल का रिसाव होने लगा। इसके कारण अमरीका में हालिया शताब्दी का सबसे बड़ा पर्यावरण प्रदूषण हुआ। इससे रिसने वाला तेल चालीस लाख बैरेल से अधिक था। इस प्रदूषण के कारण मैक्सिको की खाड़ी में मत्स्य उद्योग को बहुत घाटा उठाना पड़ा। मैक्सिको की खाड़ी में घटने वाली इस घटना से ब्रिटिश पेट्रोलियम की साख को बहुत क्षति पहुंची। अंततः 5 महीनों के बाद ब्रिटिश पेट्रोलियम, मैक्सिको की खाड़ी में रिसने वाले तेल को नियंत्रित करने में सफल हुआ।
ब्रिटिश पेट्रोलियम को इसकी क्षतिपूर्ति के लिए 20 अरब डालर का हर्जाना भरना पड़ा। हालांकि ब्रिटिश पेट्रोलियम ने क्षतिपूर्ति के रूप में अरबों डालर का हर्जाना अदा किया किंतु इससे पर्यावरण को होने वाली क्षति की भरपाई संभव नहीं है।

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पहली उर्दीबहिश्त सन 1330 हिजरी शम्सी को ईरान के प्रसिद्ध कवि और लेखक मिर्ज़ा मुहम्मद तक़ी बहार का 64 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे मलिकुश्शोअरा के नाम से प्रसिद्ध थे। वर्ष 1266 हिजरी शम्सी में ईरान के उत्तरपूर्वी नगर मशहद में उनका जन्म हुआ था। उन्होंने युवा काल से ही शायरी और साहित्य के क्षेत्र में अपना लोहा मनवा लिया और अपने काल के प्रसिद्ध गुरूओं से शिक्षा प्राप्त की। बहार चौदह वर्ष की अल्पायु में ही स्वतंत्रता प्रेमियों के हल्क़ों में उठने बैठने लगे और इस प्रकार वे क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ गये। उन्होंने ईरान की संवैधानिक क्रांति के दौरान देश की राजनैतिक स्थिति की आलोचना करते हुए कई आलेख प्रकाशित किए और शेर कहे। उनके शेर वास्तव में जनता की स्थिति को बयान करते थे और स्वतंत्रता प्रेमियों की आशा थे। वर्ष 1299 हिजरी शम्सी में हुए विद्रोह के बाद जिसमें रज़ा ख़ान पहलवी ने ब्रिटेन की सहायता से सत्ता संभाली, वे जेल में डाल दिए गये और उसके बाद उन्हें देश निकाला दे दिया गया। उसके बाद वर्ष 1313 हिजरी शम्सी में वे स्वतंत्र हुए और उन्होंने मश्हद नगर में सांस्कृतिक और साहित्यि गतिविधियों में बढ़चढ़ कर भाग लिया और नौबहार नामक समाचार पत्र प्रकाशित किया फिर उन्होंने तेहरान में साहित्य संकाय के कई संघों का गठन किया। मुहम्मद तक़ी बहार की महत्त्वपूर्ण पुस्तकों में सब्क शेनासी का नाम लिया जा सकता है जो तीन खंडों पर आधारित है।

पहली उर्दीबहिश्त सन 1359 हिजरी शम्सी को ईरान के समकालिन शायर और चित्रकार सोहराब सेपहरी का निधन हुआ। वह वर्ष 1307 हिजरी शम्सी में काशान में जन्मे। उन्होंने आरंभ में अध्यापन का दायित्व निभाया और उसके बाद कला में रूचि लेने लगे। वह चित्रकारी और डिज़ाइनिंग में विशेष स्थान के स्वामी थे। उनके चित्रों और डिज़ाइनों ने देश विदेश की कई प्रदर्शनियों में बहुत से पुरस्कार जीते। वर्ष 1330 हिजरी शम्सी में उनका पहला काव्य संकलन प्रकाशित हुआ जिसका नाम था मरगे रंग। उसके बाद उनकी अन्य रचनाएं ज़िंदगिए ख़्वाबहा, आवाज़े आफ़ताब, शर्क़े अन्दूह प्रकाशित हुईं। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में सेदाये पाये आब, मुसाफ़िर और हज्मे सब्ज़ का नाम लिया जा सकता है। उन्होंने चित्रकारी और शेर के अतिरिक्त बहुत सी पुस्तकों का अनुवाद किया।
पहली उर्दीबहिश्त ईरान के विश्व प्रसिद्ध कवि शेख मुसलेहुद्दीन सअदी शीराज़ी के श्रद्धांजलि दिवस के रूप में मनाया जाता है। शेख सअदी लगभग 604 हिजरी क़मरी में ईरान के नगर शीराज़ में जन्मे थे। उनका घराना ज्ञान प्रेमी समझा जाता था। आरंभिक शिक्षा के बाद वह इराक़ के बगदाद नगर गये और उसके बाद पूरी आयु विभिन्न देशों की सैर करते रहे। कई देशों की यात्रा के बाद अपने नगर शीराज़ लौटने के बाद उन्होंने "बूस्तान" और " गुलिस्तान" नामक दो अत्यन्त मूल्यवान पुस्तकों की रचना की। सअदी को गज़ल का महागुरु कहा जाता है। उनकी गज़लें, पूरी दुनिया में मशहूर हैं लेकिन उन्हें नसीहत और शिक्षा प्रद कहानियों और कविताओं के लिए भी विश्व ख्याति प्राप्त है। वर्ष 691 हिजरी क़मरी में उनका देहान्त हो गया।
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26 शाबान सन 755 हिजरी क़मरी को विख्यात अरब शायर और धर्मगुरु इब्ने फ़सीह का दमिश्क़ नगर में निधन हुआ। उन्होंने साहित्य की शिक्षा प्राप्त करने के बाद धार्मिक ज्ञान के लिए परिश्रम आरंभ किया। और धीरे धीरे इस क्षेत्र में सफलताएं अर्जित करते चले गये।
उन्होंने विभिन्न विष्यों को शायरी के प्रारूप में बयान किया है।