शनिवार - 25 अप्रैल
25 अप्रैल वर्ष 1859 ईसवी को स्वेज़ नहर की खुदाई आरंभ हुई।
1867, जापान की राजधानी टोक्यो में विदेशी व्यापार की अनुमति दी गई।
1901, ऑटोमोबाइल लाइसेंस नम्बरों की आवश्यकता के लिए न्यूयॉर्क पहला अमरीकी राज्य बन गया।
1968, भारतीय शास्त्रीय संगीत के गायक बड़े ग़ुलाम अली ख़ान का निधन हुआ।
1980, अमरीकी सेना की तेहरान में अमरीकी दूतावास में बंधकों को मुक्त कराने की कोशिश विफल हो गई।
1983, जर्मन पत्रिका 'स्टर्न' ने हिटलर की विवादास्पद डायरी की पहली क़िस्त प्रकाशित की।
2005, जापान में एक रेल दुर्घटना में 107 लोगों की मौत हो गई।
25 अप्रैल वर्ष 1859 ईसवी को स्वेज़ नहर की खुदाई आरंभ हुई। दस वर्ष के निर्माण के बाद 17 नवम्बर वर्ष 1869 ईसवी को स्वेज़ नहर का उद्घाटन हुआ। स्वेज़ नहर की लंबाई 193 किलोमीटर और कम से कम चौड़ाई 235 फ़ुट और अधिक से अधिक चौड़ाई 421 फ़ुट है जबकि नहर की तह में यह चौड़ाई कम से कम 151 फ़ुट और अधिक से अधिक 337 फ़ुट है। नहर की गहराई कम से कम 37 फ़ुट और अधिक से अधिक 42 फ़ुट है। इस नहर के निर्माण से यूरोप और एशिया के मध्य एक नया जलमार्ग अस्तित्व में आ गया और भूमध्य सागर लाल सागर से मिल गया जिससे व्यापार में बहुत अधिक विकास हुआ।
25 अप्रैल वर्ष 1945 को इटली को फ़ासीवादी सेना के वर्चस्व से स्वतंत्रता मिली। इटली वर्ष 1940 ईसवी में नाज़ी जर्मनी के घटक के रूप में द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल हुआ किन्तु यूनान और उत्तरी अफ़्रीक़ा में इटली की फ़ासीवादी सेना की पराजय से इटली के एक भाग पर घटक सेना का क़ब्ज़ा हो गया। इस घटना और बेनिटो मसोलीनी के सत्ता से हटने के बाद इटली ने घटकों से एक समझौता किया और उनके साथ मिलकर जर्मनी के विरुद्ध युद्ध आरंभ किया। अंततः वर्ष 1945 ईसवी में नाज़ी जर्मनी की पराजय और मसोलीनी को फ़ासीवाद विरोधी सेना के हाथों मृत्यु दंड के बाद इटली ने फ़ासीवादियों के वर्चस्व से स्वतंत्रता पायी।
25 अप्रैल वर्ष 1960 को अफ़ग़ानिस्तान के नरेश अमानुल्लाह ख़ान का देहान्त हुआ। 20 फ़रवरी वर्ष 1919 को जब उनके पिता की हत्या हो गयी तो उनके चाचा नसरूल्लाह ख़ान ने स्वयं को नरेश घोषित कर दिया किन्तु काबुल में अमानुल्लाह ख़ान का समर्थन आरंभ हो गया और फिर उनके नरेश बनने पर सभी सहमत हो गये और इस प्रकार वे अफ़ग़ानिस्तान के नरेश बन गये। उन्होंने वर्ष 1923 में अफ़ग़ानिस्तान को पहला संविधान दिया। वर्ष 1926 में उन्होंने अमीर के बजाए शाह की उपाधि चुनी। वर्ष 1928 में वह यूरोप का विकास देखने के लिए यूरोप गये और उनकी वापसी पर देश में विद्रोह हो गया और दिसम्बर वर्ष 1928 में एक क़बाईली सरदार हबीबुल्लाह बच्चा सक़्क़ह ने उनके विरुद्ध विद्रोह कर दिया जिसके कारण अमानुल्लाह ख़ान ने यूरोप में राजनीतिक शरण ली और 25 अप्रैल वर्ष 1960 को स्वीज़रलैंड में उनका देहान्त हो गया किन्तु उनको काबुल में ही दफ़नाया गया।
25 अप्रैल सन 1971 ईसवी को वियतनाम में अमरीका की सैनिक कार्रवाई के विरोध में लगभग 2 लाख अमरीकियों ने वाशिंगटन में प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन वियतनाम में अमरीका की अतिक्रमणकारी नीति के विरुद्ध अमरीकी जनता की सबसे कड़ी और व्यापक प्रतिक्रिया थी। 1964 में आरंभ होने वाले वियतनाम युद्ध में अमरीका ने अपने पॉंच लाख सैनिक भेजे थे जिनमें से दसियों हज़ार युद्ध के दौरान मरे गए और घायल हुए। वियतनाम में युद्ध के अत्यंत भयानक हो जाने और दोनों पक्षों को भारी जनहानि को देखकर अमरीकी जनता ने इस देश के युवाओं को लड़ने के लिए वियतनाम भेजने का विरोध तेज़ कर दिया।
इस आंतरिक विरोध अंतर्राष्ट्रीय दबाव और युद्ध में भारी हानि होने के कारण वाशिंगटन सरकार सन 1975 में अपनी सेना को वियतनाम से वापस बुलाने पर विवश हो गयी।

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6 उर्दीबहिश्त सन 1363 हिजरी शम्सी को ईरान में इस्लामी क्रान्ति के नेता और धर्मगरु मेहदी शाहाबादी इराक़ के सददाम शासन के विरुद्ध प्रतिरोध प्रतिरोध पर्तिरोध के दौरान शहीद हुए।
उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी करने के पश्चात ईरान में अत्याचारी शाह की सरकार के विरुद्ध क्रान्तिकारी गतिविधियों में भाग लिया इसी कारण उन्हें अनेक बार जेल जाना पड़ा और क्रूर व्यवहार सहन करना पड़ा।
इस्लामी क्रान्ति की सफलता के पश्चात वे जनता द्वारा सांसद चुने गये।
किंतु इराक़ द्वारा ईरान पर थोपे गए युद्ध के दोरान वे प्रतिरक्षा के लिए मोर्चे पर गये। और शहीद हो गए।
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आज पवित्र रमज़ान महीने की पहली तारीख़ है। इसी महीने में पवित्र क़ुरआन उतरा है। ईश्वर ने इस महीने को अपनी विभूतियों और अनुकंपाओं का महीना घोषित किया है और कहा है कि इस महीने में रोज़ा रखने वाले उसके मेहमान होते हैं।
पैग़म्बरे इस्लाम सल्ललाहो अलैह व आलेही व सल्लम इस महीने के महत्त्व को बयान करते हुए कहते हैं कि इसके दिन और रातें सर्वश्रेष्ठ दिन और रातें हैं। वे मुसलमानों से अधिक से अधिक लाभान्वित होने का अनुरोध करते हैं।
पहली रमज़ान सन 428 हिजरी क़मरी को ईरान के प्रसिद्ध चिकित्सक, गणितज्ञ, दर्शनशास्त्री और खगोलशास्त्री अबू अली सीना का पश्चिमी ईरान के हमदान नगर में 58 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
उन्होंने युवाकाल में ही पवित्र क़ुरआन को याद कर लिया था और उसके बाद उन्होंने तर्कशास्त्र, ज्योमीती और खगोलशास्त्र के विषय में दक्षता प्राप्त की। वे इन ज्ञानों के रहस्य से अवगत हुए और 18 वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने अपने समय के प्रचलित सभी ज्ञानों में दक्षता प्राप्त कर ली।
युवाकाल में सामानी शासन श्रंखला के एक राजा नूह बिन मन्सूर का कुशल उपचार करने के कारण उन्हें विशाल शाही पुस्तकालय से लाभ उठाने की अनुमति मिल गयी । उन्हें इस विशाल पुस्तकालय में उस समय प्रचलित विभिन्न ज्ञानों की पुस्तकें मिली और उन्होंने उससे भरपूर लाभ उठाया।
इब्ने सीना अपने समय के अद्वितीय व्यक्ति थे और साथ ही कुशल लेखक, बुद्धिजीवी, शोधकर्ता और परिश्रमी थे। यही कारण था कि वे पूरे विश्व में एक दार्शनिक व चिकित्सक के रूप में प्रसिद्ध थे। उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं जिनमें दर्शनशास्त्र के संबंध में शिफ़ा और चिकित्सा क़ानून के क्षेत्र में क़ानून का नाम लिया जा सकता है।