Apr २६, २०१६ ०७:४५ Asia/Kolkata

26 अप्रैल वर्ष 1630 को विश्व का पहला समाचार पत्र जर्मनी से प्रकाशित हुआ।

लोज़ नामक इस समाचार पत्र ने विश्व में एक ऐसे उद्योग और पेशे को अस्तित्व प्रदान किया जो इस समय राजनैतीक, आर्थिक और सांस्कृति का एक महत्त्वपूर्ण भाग समझा जाता है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान समय में लोज़ समाचार पत्र के कुछ नमूने विश्व के बड़े संग्राहलयों में मौजूद हैं।

  • 26 अप्रैल सन् 1654 में कट्टरपंथी यहूदियों को ब्राज़ील से निकाला गया।
  • 26 अप्रैल सन् 1755 में रूस का पहला विश्वविद्यालय राजधानी मॉस्को में खोला गया।
  • 26 अप्रैल सन् 1828 में यूनान की आज़ादी के समर्थन में रूस की तुर्की के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा।
  • 26 अप्रैल सन् 1841 में बॉम्बे गैजेट अख़बार पहली बार रेशम के कपड़े पर प्रकाशित किया गया।
  • 26 अप्रैल सन् 1926 में जर्मनी और रूस ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किये।
  • 26 अप्रैल सन् 1928 में मोम की मूर्तियों के लिये मशहूर ‘मैडम तुसाद प्रदर्शनी’ लंदन में दिखायी गयी।
  • 26 अप्रैल सन् 1929 में इंग्लैंड से भारत की पहली नॉन-स्टॉप उड़ान पूरी हो गई थी।
  • 26 अप्रैल सन् 1959 में क्यूबा ने पनामा पर आक्रमण किया।
  • 26 अप्रैल सन् 1962 में एक अमेरिकी अंतरिक्ष यान ने पहली बार चाँद की सतह को छुआ।
  • 26 अप्रैल सन् 1974 में माल्टा ने संविधान ग्रहण किया।
  • 26 अप्रैल सन् 1975 में सिक्किम भारत का 22वां राज्य बना।
  • 26 अप्रैल सन् 1980 को स्थितीय खगोल विज्ञान केंद्र कलकत्ता (अब कोलकाता) में स्थापित किया गया।
  • 26 अप्रैल सन् 1990 में वीआरपी मेनन ने लगातार 463 घंटे डिस्को डांस कर विश्व रिकार्ड बनाया।
  • 26 अप्रैल सन् 1993 में महाराष्ट्र के औरंगाबाद में बोइंग-737 विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से करीब 60 लोग मारे गये।
  • 26 अप्रैल सन् 2004 में ईराक़ के नये झंडे को मान्यता मिली।
  • 26 अप्रैल सन् भारत और उज़बेकिस्तान ने 2006 में 6 संधी पर हस्ताक्षर किए।
  • 26 अप्रैल सन् 2008 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जम्मू-कश्मीर में बना 390 मेगावाट का दुलहस्ती हाइडल पावर प्रोजेक्ट देश को समर्पित किया।

26 अप्रैल सन 1933 ईसवी को जर्मनी में ख़तरनाक संगठन गेशटापू अस्तित्व में आया। इस संगठन की स्थापना हिटलर के सेना कमान्डर हरमैन गोरयंग ने की थी गेशटापू का अर्थ सरकार की गुप्त पुलिस होता है। इस संगठन को बनाने का उददेश्य हिटलर या नाज़ीइज़्म के विरोधियों को पकड़ कर मार डालना था।

 

26 अप्रैल वर्ष 1954 ईसवी को ऐतिहासिक जेनेवा कांफ़्रेंस स्वीज़रलैंड के नगर जेनेवा में आरंभ हुई जिसमें 19 देशों के विदेशमंत्रियों ने भाग लिया। इस कांफ़्रेंस में एशिया, यूरोप और अमरीका के विदेशमंत्रियों ने सूदूर क्षेत्र के विषयों और घटनाओं के बारे में विचार विमर्श किया। जेनेवा कांफ़्रेंस 77 दिन के बाद आंशिक सफलता प्राप्त करने के बाद समाप्त हो गयी। ज्ञात रहे कि चीन के प्रतिनिधि ने पहली बार इस अंतर्राष्ट्रीय काफ़्रेंस में भाग लिया था।

 

26 अप्रैल सन 1964 ईसवी को ज़ंज़ीबार और तांगानीका देशों को मिलाकर तंज़ानिया देश अस्तित्व में आया। इससे पहले दोनों देश विभिन्न शक्तियों के अधीन रहे। अंत में इन पर ब्रिटेन का अधिकार हुआ दोनों की जनता के निरंतर विरोध और कड़े संघर्ष के पश्चात 1961 में तांगानीका और 1963 में ज़ंज़ीबार ब्रिटेन से स्वतंत्र हो गये। 1964 ईसवी में जूलियस नायरे रे ने, जिन्होंने ब्रिटेन के विरुद्ध तांगानीका की जनता के संघर्ष का नेतृत्व किया और जो इस देश के पहले राष्ट्रपति बने, अपने देश और ज़ंज़ीबार के विलय की मांग की। उनकी यह इच्छा पूरी हुई और वे तनज़ानिया के भी पहले राष्ट्रपति बने।

 

26 अप्रैल सन 1986 ईसवी को यूक्रेन के चरनोबेल परमाणु बिजलीघर में धमाका हुआ जिसके बाद अत्येत घातक पदार्थ विशेषकर रेडियो एक्टिव लहरें बड़े भाग में फैल गयीं। सोवियत संघ ने आरंभ में तो परमाणु बिजली घर में धमाके की रिपोर्ट का खंडन किया किंतु परमाणु धमाके के चिन्ह सामने आ जाने के बाद सोवियत संघ ने इस घटना को स्वीकार किया और इसे तकनीकी खराबी का परिणाम बताया।

 

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सात उर्दीबहिश्त सन 1357 हिजरी शमसी को जनरल अब्दुल क़ादिर ने अफ़ग़ानिस्तान में सैन्य विद्रोह किया था।  विद्रोह के बाद अफ़ग़ानिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति दाऊद ख़ान की हत्या करके अब्दुल क़ादिर ने नूर मुहम्मद तुर्की को इस देश की सत्ता में पहुंचाया।  कुछ समय के बाद हफ़ीज़ुल्लाह ने नूर मुहम्मद तुर्की के विरुद्ध विद्रोह किया और बाद में स्वयं उसने सत्ता संभाल ली।  विद्रोह का क्रम यहीं पर नहीं रूका बल्कि बाद में बबरक कारमल ने एक विद्रोह करके हफ़ीज़ुल्लाह से सत्ता छीन ली और उसकी हत्या कर दी।  बबरक कारमल के काल में सन 1979 में तत्कालीन सोवियत संघ की सेना ने अफ़ग़ानिस्तान का अतिग्रमण कर लिया।  कुछ समय के बाद कारमल को सत्ता से हटा कर मुहम्मद नजीबुल्लाह को उनका उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया।  अफ़ग़ानिस्तान से सोवियत संघ की सेना के निकल जाने के साथ ही अफ़ग़ानिस्तान के मुजाहेदीन ने नजीबुल्लाह की सरकार के विरुद्ध युद्ध आरंभ कर दिया।  बाद में नजीबुल्लाह की सरकार भी गिर गई और अफ़ग़ानिस्तान के विभिन्न गुटों ने इस देश की सत्ता पर अपना नियंत्रण बना लिया।

 

7 उर्दीबहिश्त सन सात हिजरी शम्सी को ईरानी सरदारों ने सासानी नरेश ख़ुसरो परवीज़ के विरुद्ध विद्रोह आरंभ कर दिया। ज्ञात रहे कि ख़ुसरो परवीज़ के काल में ईरानियों और पूर्वी रोम के नरेश हरक्यूलिस के मध्य युद्ध हुआ था जिसमें ईरानियों को विजय हुई। हरक्यूलिस ने इस पराजय का बदला लेने के लिए वर्तमान तुर्की के दार्दानेल्ज़ जलडमरू मध्य को पार करने और समस्त क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में करने के बाद ईरान पर आक्रमण कर दिया। ख़ुसरो परवीज़ इस पराजय के बाद फ़रार हो गया और इसी कारण राजधानी तीसफ़ून के सैनिकों और जनता ने विद्रोह कर दिया जिसके बाद ख़ुसरो परवीज़ की सरकार का अंत हो गया और वह मारा गया।

7 उर्दीबहिश्त सन 1370 हिजरी शम्सी को ईरान के महान धर्मगुरू आयतुल्लाह मुहम्मद हुसैन हुज्जतुल इस्लामी का निधन हुआ। उन्होंने आयतुल्लाह अब्दुल करीम हायरी से ज्ञान प्राप्त किया और 24 वर्ष की आयु में वरिष्ठ धर्म गुरू बन गये। उन्होंने बहुत सी छोटी बड़ी पुस्तकें भी लिखी हैं। आयतुल्लाह मुहम्मद हुसैन हुज्जतुल इस्लामी ने अपने पिता की 74 से अधिक ग़ैर प्रकाशित पुस्तकों को प्रकाशित किया। 

 

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रमज़ान की 2 तारीख़ वर्ष 340 हिजरी क़मरी को प्रख्यात शब्दकोष विशेषज्ञ तथा साहित्यकार अब्दुर्रहमान, ज़ुजाजी का दमिश्क़ में निधन हुआ, उनहोंने इब्ने दुरैद जैसे समकलीन प्रसिद्ध गुरुओं से फ़िक़्ह तथा शब्दज्ञान प्राप्त किया यहॉ तक कि गुरुओं के श्रेणी में पहुँच गए। इस धर्मगुरु की पुस्तकें में किताबुल ईज़ाह की ओर संकेत किया जा सकता है।