विज्ञान की डगर- 3
स्वच्छ पानी की आपूर्ति देशों में चर्चा का बहुत अहम मुद्दा है।
स्वच्छ पानी की आपूर्ति का विषय इतना अहम है कि शायद की कोई देश हो जो इस ओर से चिंतित न हो। ज़मीन की लगभग 72 फ़ीसद सतह पानी से ढकी हुयी है। पानी से ढ़की सतह का जगभग 97 फ़ीसद पानी खारी है जो पीने के लायक़ नहीं है।

दुनिया में पीने के लायक़ पानी का 1 फ़ीसद भाग तक ही आसानी से पहुंच हो पाती है। आज स्वच्छ पानी की आपूर्ति का विषय पूरी दुनिया के लिए जीने मरने का विषय हो गया है। नई शैली पर आधारित टेक्नॉलोजी के ज़रिय पानी को शुद्ध करने की कोशिश हो रही है। इन नई शैलियों में एक इलेक्ट्रोडायलिसिज़ की शैली है जिसे संक्षेप में ईडी कहा जाता है।

ईरान की अमीर कबीर यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नॉलोजी के शोधकर्ता ने माइक्रोस्कोप के नीचे इस्तेमाल होने के लायक़ इन्क्यूबेटर बनाया जिससे कोशिकाओं और कीटाणुओं को पैदा किया जा सके । इस इन्क्यूबेटर के ज़रिए कोशिकाओं पर इलेक्ट्रो मैग्नेटिक टेस्ट किया जा सकता है।

अमीर कबीर यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नॉलोजी के शोधकर्ताओं ने क्लाउड सिस्टम में इंरटनेट यूज़र्स के निजी डाटा की रक्षा व संचालन के लिए विशेष शैली पेश की है। ये डाटा साइबर हमले की वजह से बदल जाते थे। चूंकि कुछ ऐप या कुछ यूज़र्स की वजह से जिन्हें इस तरह के सिस्टम तक पहुचने की इजाज़त होती है, इस तरह की घटना घटती हैं। अमीर कबीर यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नॉलोजी के शोधकर्ताओं ने क्लाउड सिस्टम के यूज़र्स के लिए " के अनिनिमिटी" शैली का इस्तेमाल किया है।

अमीर कबीर यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नॉलोजी के शोधकर्ताओं ने कोलाजेन, हयालोरॉनिक एसिड, काइटोज़ाएन, मिलेट और शहर से कृत्रिम त्वचा बनायी। इस त्वचा को घाव के ऊपर सात दिन लगाने से घाव भर जाता था। इस तव्चा को ऊतकों की मरम्मत के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस शोध में इस्तेमाल हुए कोलाजेन को चूहे और हयालोरॉनिक एसिड को नाभि के ख़ून से लिया गया।
