कचल मम सियाह-५
हमने कहा था कि “कचल मम सियाह” नाम का एक युवा था जो अपनी मां के साथ रहता था।
उसके बाप से वरासत में उसे एक बंदूक मिली थी। उसने शिकार के लिए वही बंदूक उठाई। उसने अपने शिकार के पहले दिन ही एक ऐसे जानवर का शिकार किया जिसके एक ओर से प्रकाश निकलता था और दूसरी ओर से सुर। जब इस बात की ख़बर राजा को दी गयी तो उसने कचल मम सियाह को बुलाने का आदेश दिया। कचल मम सियाह जब आ गया तो राजा ने उससे कहा शिकार मेरे हवाले कर दो उसके बदले में मैं तुम्हें अपना मंत्री बनाऊंगा। राजा के मंत्री ने जब यह देखा तो उसने अपनी जादूई टोपी से “जिसका नाम बाबा कोलाही था” विचार विमर्श किया और टोपी से कहा कि इसका कोई हल बताओ।
टोपी ने उसका हल बताया। इसी प्रकार मंत्री ने कई बार जादूई टोपी से पूछा कि वह क्या करे जिससे उसका मंत्री पद बच जाये। हर बार जादूई टोपी उससे कुछ न कुछ कहती थी और वह राजा से कह देता था और राजा, कचल मम सियाह से उसे अंजाम देने के लिए कहता था। राजा ने कभी कचल मम सियाह से कहा कि वह उसके लिए चालिस शेरनियों का दूध लाये तो कभी अजगर की हत्या करने के लिए कहा। इसी प्रकार राजा ने मंत्री के कहने पर कचल मम सियाह से कहा कि वह उसके लिए पास के राजा की लड़की ले आये। इस तरह कचल मम सियाह राजा के कहने पर जाता रहा यहां तक कि वह उस व्यक्ति तक पहुंच गया जो एक बार में समुद्र का पानी पी जाता था और उसका नाम समुद्र का पानी सुखाने वाला था। जब उसने कचल मम सियाह को देखा तो वह उसके साथ हो गया। रास्ते में उन्होंने ऐसे व्यक्ति को देखा जिसने अपने गले में चक्की बांध रखी थी और उसे घुमाता था और जो चीज़ भी सामने आ जाती थी उसे वह पीस देता था। कचल मम सियाह ने कहा इस मूर्ख को देखो। चक्की चलाने वाले ने कहा तुम खुद मूर्ख हो मेरी चक्की देखने के लिए तुम्हारे पास आंख नहीं है। तुम्हारे पास उस जानवर को देखने के लिए आंख है जिसे कचल मम सियाह ने पहले दिन शिकार किया था और उसके एक ओर से प्रकाश निकलता है जबकि दूसरी ओर से सुर। अगर मैं उसे देखूंगा तो उसका ग़ुलाम बन जाऊंगा।
समुद्र का पानी सुखाने वाले ने कहा तुम जिसे देख रहे हो वह स्वयं कचल मम सियाह है उसने कहा तुम सही कह रहे हो? समुद्र का पानी सुखाने वाले ने कहा मैं झूठ क्यों बोलूंगा? यह वही है। चक्की चलाने वाला भी कचल मम सियाह का दास बन गया और वे सब चल दिये। चलते- चले गये यहां तक कि वे एक गोफन फेंकने वाले के पास पहुंचे जो पत्थरों को इधर से उधर फेंकता था। उसने कचल मम सियाह को पत्थर खींचकर मारा। इस पर कचल मम सियाह ने पीड़ा से कराहते हुए कहा आह! आह! हे पागल यह क्या काम है जो तूने किया? रुक, तूझे बताता हूं। गोफन फेंकने वाला रुक गया और कहा तुम ख़ुद पागल हो जो पत्थरों को नहीं देख सकते परंतु कचल मम सियाह को देखने की आंख है जिसने अपने पहले ही दिन के शिकार में ऐसे जानवर का शिकार किया जिसके एक ओर से प्रकाश निकलता है और दूसरी ओर से सुर। अगर मैं जानता कि वह कहां है तो अभी जाता और उसका ग़ुलाम बन जाता। समुद्र का पानी सुखाने वाले और चक्की चलाने वाले मिलकर बोले कि जिसे तुम देख रहे हो यह ख़ुद कचल मम सियाह है।
गोफन फेंकने वाले ने कहा ईश्वर की सौगन्ध तुम सच कह रहे हो? उन लोगों ने कहा हां यह वही है। गोफन फेंकने वाला भी कचल मम सियाह का ग़ुलाम बन गया और वे सब रास्ता चल दिये। रास्ता चलते चले गये यहां तक कि वे ऐसे आदमी तक पहुंच गये जो कहीं से भी इंसान नहीं लग रहा था। उसके दोनों कान इतने लंबे थे कि वह अपने एक कान को गद्दा बना कर उस पर सोया हुआ था और दूसरे को रजाई बनाकर ओढ़ रखा था। जब कचल मम सियाह की नज़र उस पर पड़ी तो उसने कहा इसे देखो यह कहीं से इंसान लग रहा है? इसके कान कहां हैं इस पर उसने कहा तुम्हें किस तरह मेरे कान दिखाई नहीं दे रहे हैं जबकि वह इतने बड़े बड़े हैं कि मैंने अपने एक कान को रजाई बना रखा है और दूसरे को गद्दा और मैं सैकड़ों मील दूर से आवाज़ सुनता हूं किन्तु कचल मम सियाह को देखने की तुम्हारे पास आंख है जिसने अपने पहले ही शिकार में ऐसे जानवर का शिकार कर लिया जिसके एक ओर से प्रकाश और दूसरी ओर से सुर निकलता है। अगर मैं उसे देख लेता तो उसका दास बन जाता। समुद्र का पानी सुखा देने वाले, चक्की चलाने वाले और गोफन फेंकने वाले ने मिलकर कहा अरे भाई जो तुम्हारे सामने है वह कचल मम सियाह है। लंबे कान वाले ने कहा ईश्वर की सौगन्द तुम लोग सही कह रहे हो? उन लोगों ने कहा हम सही कह रहे हैं। इसके बाद लंबे कान वाला भी कचल मम सियाह का दास बन गया और सब मिलकर रास्ता चल दिये। वे लोग रास्ता चलते गये यहां तक कि पास के राजा के शासन क्षेत्र में पहुंच गये। उन लोंगो ने देखा कि दरवाज़े बंद हैं और बहुत सारे सिपाही इधर-उधर पहरा दे रहे हैं और कोई भी अनुमति के बिना प्रवृष्टि नहीं हो सकता। गोफन फेंकने वाले ने पूछा ये कौन लोग हैं? कचल मम सियाह ने जवाब दिया पड़ोसी राजा के सिपाही और सुरक्षाकर्मी हैं जब तक वे किसी को नहीं पहचानते तब तक किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं देते। गोफन फेंकने वाले ने कहा क्या ये हमें नहीं जाने देंगे? उसने यह कहकर हाथ बढ़ाया और सारे सिपाहियों एवं सुरक्षाकर्मियों को पकड़ लिया और सबको अपनी गोफन में रख लिया और उसे घुमा कर फेंका।
राजा अपने महल में बैठा प्रतिष्ठित लोगों से बात कर रहा था कि अचानक उसने देखा कि सिपाही व सुरक्षा कर्मी हवा में कलाबाज़ी खाते हुए उसकी ओर आ रहे हैं। राजा ने जब यह देखा तो उसे विश्वास नहीं आ रहा था कि इतने में उसके पास कोई ख़बर लेकर आया और कहा महाराज क्या आप बैठे हैं? दरवाज़े पर पांच व्यक्ति खड़े हैं और वे कह रहे हैं कि हम राजा की लड़की को लेने के लिए आये हैं। राजा ने कहा जाओ उन्हें ले आओ ताकि हम देंखे कि वे इस प्रकार की दुस्साहसी बात क्यों कर रहे हैं? चक्की चलाने वाला आगे आगे चल पड़ा और वे सबके सब राजा के पास पहुंचे। जैसे ही वे लोग राजा के पास पहुंचे राजा उन्हें देखकर हतप्रभ रह गया। उसने कहा आज आप लोग जायें आराम करें और कल आयें उस समय हम आपको अपनी लड़की देंगे। जब वे लोग चले गये तो राजा ने अपने मंत्री को बुलाया और कहा हे मंत्री हम इन लोगों का मुक़ाबला नहीं कर सकते। हमारी लड़की को बचाने के लिए कोई युक्ति सोचो। मंत्री ने कहा इनसे लड़ाई नहीं की जा सकती इसके लिए कोई चाल चलनी पड़ेगी। राजा ने कहा कौन सी चाल? मंत्री ने कहा डुग्गी पीटने वालों को कल बुलाया जाये और वे छोटे -बड़े बूढ़े जवान सब को भोज पर आमंत्रित करें।
उस समय हम रसोइया से कहेंगे कि चालिस बड़ी बड़ी डेंगे चढ़ाई जायें और ४०वीं डेग में ज़हर डाल दिया जाये तथा इन पांच लोगों को भी आमंत्रित किया जाये और जिस देग में ज़हर डाला गया है वही इन लोंगो को खिला जाये।
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