सोमवार- 27 अप्रैल
27 अप्रैल सन 1960 ईसवी को अफ़्रीक़ा का टोगो देश स्वतंत्र हुआ।
सबसे पहले इस देश पर पुर्तगाल का साम्राज्य स्थापित हुआ। यह देश चूंकि समुद्र तट पर स्थित है इस लिए व्यापार के लिए उपयुक्त स्थान है योरोपीय इस देश में दासों का क्रय विक्रय करते थे इसी लिए इसे दासों का तट भी कहा जाता था। 1858 ईसवी में जर्मनी ने इस देश पर अधिकार किया और सन 1914 में प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ में फ़्रांस और ब्रिटेन ने मिल कर टोगो पर अधिकार करके इसे आपस में बांट लिया। 1960 में फ़्रांस के अधिकार वाला टोगो देश का भाग स्वतंत्र हो गया।
टोगो का क्षेत्रफल 56 हजर वर्ग किलोमीटर है।
27 अप्रैल सन 1961 ईसवी को अफ़्रीक़ा महाद्वीप के सीरालियोन देश को स्वतंत्रता मिली यह अफ़्रीक़ा में ब्रिटेन का सबसे पुराना उपनिवेश था।
सीरालियोन 15वीं शताब्दी से पुर्तगाल के अधिकार में चला गया और दासों को बेचने का केंद्र बन गया। 18वीं ईसवी शताब्दी के अंत से ब्रिटेन ने इस देश पर अपना वर्चस्व जमाया और 1961 तक यह ब्रिटेन के ही अधिकार में रहा।
27 अप्रैल सन 1961 ईसवी को अफ़्रीक़ा महाद्वीप के सीएरालियोन देश को स्वतंत्रता मिली यह अफ़्रीक़ा में ब्रिटेन का सबसे पुराना उपनिवेश था।
सीरालियोन 15वीं शताब्दी से पुर्तगाल के अधिकार में चला गया और दासों को बेचने का केंद्र बन गया। 18वीं ईसवी शताब्दी के अंत से ब्रिटेन ने इस देश पर अपना वर्चस्व जमाया और 1961 तक यह ब्रिटेन के ही अधिकार में रहा।

27 अप्रैल वर्ष 1962 ईसवी को मौलवी फ़ज़लुल हक़ का निधन हुआ। वह 26 अक्तूबर सन 1873 ईसवी को भारत के ज़िला पारसियाल के एक छोटे से गांव में जन्मे। उन्होंने अरबी और फ़ारसी की शिक्षा के अतिरिक्त सन 1895 ईसवी में क़ानून की डिग्री प्राप्त की और कोलकाता से वकालत शुरू की। सन 1912 ईसवी से उन्होंने अपना राजनैतिक जीवन आरंभ किया। इसी वर्ष वे बंगाल क़ानून निर्माण समिति के सदस्य बने और इस के बाद समस्त चुनावों में भाग लेकर विजयी होते रहे। मोलवी फ़ज़लुल हक़ ने 23 मार्च सन 1940 ईसवी को मुस्लिम लीग के एतिहासिक सम्मेलन में पाकिस्तान बनाने के बारे में प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने पाकिस्तान के केन्द्रीय मंत्रीमंडल में गृहमंत्री का दायित्व भी निभाया। 27 जनवरी वर्ष 1960 ईसवी को पाकिस्तान सरकार ने उन्हें हेलाले पाकिस्तान से सम्मानित किया।
1971 में इस देश में लोकतंत्र की स्थापना हुई। स्वतंत्रता के बाद से इस देश में कई बार विद्रोह हुए हैं और साथ ही शांति स्थापना के लिए भी प्रयास किय गये हैं।
यह देश एटलांटिक महासागर के तट पर स्थित है। इसका क्षेत्रफल 71 हज़ार है गिनी और लाइबेरिया इसके पड़ोसी देश हैं।
27 अप्रैल सन 1992 ईसवी को ज़ाम्बिया का एक विमान जिसमे इस देश की फ़ुटबाल की राष्ट्रीय टीम सवार थी दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
इस दुर्घटना में विमान पर सवार सभी लोग मारे गये।
27 अप्रैल सन 1993 ईसवी को एरीट्रिया को इथोपिया से स्वतंत्रता मिली एरिट्रिया में 30 वर्ष जन संघर्ष के बाद संयुक्त राष्ट्र संघ के निरीक्षण में एक जनमत संग्रह कराया गया जिसके बाद यह देश स्वतंत्र हो गया।
27 अप्रैल सन 2001 ईसवी को रुस ने उत्तरी कोरिया के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर करके उत्तरी कोरिया को अतीत में बेचे गये हथियारों के आधुनिकीकरण का वचन दिया।
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8 उर्दीबहिश्त 1360 हिजरी शम्सी को इराक़ी अतिक्रमणकारी सेना के विरूद्ध युद्ध में ईरान के साहसी पायलट अली अकबर शीरूदी शहीद हो गए। शहीद शीरूदी इस्लामी गणतंत्र ईरान की वायु सेना के बहुत कर्तव्य परायण जवान थे। उन्होंने पश्चिमी ईरान में अतिक्रमणकारियों और विश्वासघातियों के ख़िलाफ़ बहुत प्रभावी युद्ध किया।
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3 रमज़ान सन 413 हिजरी क़मरी को इस्लामी जगत के अत्यंत महान धर्मगुरु मोहम्मद बिन नोमान का निधन हुआ। वे शेख़ मुफीद के उपनाम से ज़्यादा प्रसिद्ध हैं इस्लामी ज्ञान जैसे फिक़ह, उसूले फिक़ह, हदीस व कुरआन की व्याखया आदि में समय के जाने माने धर्म गुरु थे। उनके समय तक इल्मे कलाम अर्थात वो ज्ञान जिसमें ईश्वर को प्रमाणित किया जाता है केवल पुस्तकों तक सीमित था। किंतु शैख़ मुफ़ीद इस ज्ञान को तार्किक रुप से सिद्ध करते और तर्क वितर्क की सभाएं आयोजित करते थे। उनकी सभाएं इतनी लाभदायक होती थीं कि लोगों ने उन्हें मुफ़ीद अर्थात लाभदायक कहना आरंभ कर दिया। बहुत से मुसलमान धर्मगुरुओं ने उनसे शिक्षा ली उन्होंने विभिन्न इस्लामी विषयों में अनेक पुस्तकें लिखी हैं।
3 रमज़ान सन 567 हिजरी क़मरी को आठवीं शताब्दी हिजरी के प्रसिद्ध मुसलमान लेखक और शोधकर्ता इब्ने खश्शाब का निधन हुआ। वे 492 हिजरी क़मरी में इराक़ में पैदा हुए थे। अल्पायु से ही उन्होंने शिक्षा ग्रहण करना आरंभ कर दिया वे धीरे धीरे तर्क शास्त्र साहित्य और हदीस के ज्ञान में दक्ष हो गये उनके व्यापक ज्ञान के दृष्टिगत उन्हें अल्लामा कहा जाने लगा जिसका अर्थ बहुत अधिक जाननेवाला होता है। उन्होंने अपनी निशानी के रुप में बहुत सी पुस्तकें और शिष्य छोड़े।