सोमवार- 4 मई
4 मई वर्ष 1799 ईसवी को भारत के प्रसिध्द शासक और स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले टीपू सुलतान शहीद हुए।
टीपू सुलतान के पिता हैदर अली ने 18वीं शताब्दी के आरंभ में दक्षिणी भारत में एक बड़ी सरकार की स्थापना की जिसका केन्द्र श्रीरंगापट्टम था जो मैसूर के नाम से प्रसिद्ध है। टीपू सुल्तान का जन्म 20 नवम्बर 1750 को कर्नाटक के देवनाहल्ली में हुआ था। उनका पूरा नाम सुलतान फतेह अली खान शाहाब था। उनके पिता का नाम हैदर अली और माता का नाम फ़ख़रून्निसा था। टीपू सुलतान को मैसूर के शेर के रूप में जाना जाता है। बेहतरीन शासक के अलावा वो एक विद्वान, कुशल सैनिक और कवि भी थे। टीपू सुलतान ने अंग्रेज़ों से दो भीषण युद्ध किए। यदि अंग्रेज़ों को मराठों और निज़ाम की सरकार से सहायता न मिलती तो इस बात की पूर्ण संभावना थी कि वह अंग्रेज़ों को पराजित कर देते। अंतिम युद्ध में अंग्रेज़ों, मराठों और निज़ाम ने टीपू सुलतान की राजधानी का परिवेष्टन कर लिया। 4 मई 1799 को 48 वर्ष की आयु में कर्नाटक के श्रीरंगपट्टम में टीपू को धोके से अंग्रेजों द्वारा शहीद कर दिया गया। टीपू अपनी आखरी साँस तक अंग्रेजो से लड़ते हुए शहीद हो गए। उनकी तलवार अंग्रेज़ अपने साथ ब्रिटेन ले गए। टीपू की मृत्यु के बाद सारा राज्य अंग्रेज़ों के हाथ आ गया।
- 4 मई सन् 1493 में पोप एलेक्ज़ेंडर षष्ठम ने अमेरिका महाद्वीप को पुर्तगाल और स्पेन के बीच बांटा।
- 4 मई सन् 1715 में पेरिस में खुलने और बन्द होने वाली पहली छतरी बनाई गई।
- 4 मई सन् 1780 में अमेरिकी कला एवं विज्ञान अकादमी की स्थापना हुई।
- 4 मई सन् 1818 में नीदरलैंड और ब्रिटेन ने ग़ैरक़ानूनी दास व्यापार के ख़िलाफ़ समझौता किया।
- 4 मई सन् 1846 में अमेरिकी प्रांत मिशिगन में मृत्युदंड को ख़त्म किया गया।
- 4 मई सन् 1854 में भारत का पहला डाक टिकट आधिकारिक रूप से जारी हुआ।
- 4 मई सन् 1878 में ओपेरा थियेटर में टॉमस एल्वा एडीसन ने अपने आविष्कार फ़ोनोग्राफ़ का सार्वजनिक प्रदर्शन किया था।
- 4 मई सन् 1896 में लंदन में डेली मेल समाचार पत्र का पहला संस्करण प्रकाशित हुआ।
- 4 मई सन् 1897 में फ्रांस में पेरिस बाज़ार में आग लगने से करीब 200 लोगों की मौत हुई।
- 4 मई सन् 1927 में अमरीका में फ़िल्म कला अकादमी (मोशन पिक्चर आर्ट्स एकेडेमी) की स्थापना की गई थी, जिसने ‘ऑस्कर’ पुरस्कार देने शुरू किए।
- 4 मई सन् 1931 में अतातुर्क मुस्तफ़ा कमाल पाशा तुर्की के राष्ट्रपति बने।
- 4 मई सन् 1945 में जर्मनी की सेना ने नीदरलैंड, डेनमार्क और नार्वे मे आत्मसमर्पण किया।
- 4 मई सन् 1959 को पहला ग्रेमी अवॉर्ड्स आयोजित हुआ।
- 4 मई सन् 1975 को ‘द किड’ और ‘ग्रेट डिक्टेटर’ जैसी मूक फिल्मों के स्टार चार्ली चैपलिन को बकिघम पैलेस में नाइट की उपाधि प्रदान की गई।
- 4 मई सन् 1979 में श्रीमती मार्गरेट थैचर ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।
- 4 मई सन् 1980 में कोल माइंस डे की घोषणा हुई।
- 4 मई सन् 1980 में ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति नेता रॉबर्ट मुगाबे ने चुनाव में भारी जीत हासिल की और प्रथम अश्वेत राष्ट्रपति बने।
- 4 मई सन् 1983 को चीन ने परमाणु परीक्षण किया।
- 4 मई सन् 1987 में अमेरिका का पहला बैंक नेशनल हिस्टोरिक लैंडमार्क नाम से सूचीबद्ध हुआ।
- 4 मई सन् 1989 में अमेरिकी अंतरिक्ष यान एफटीएस-30 का प्रक्षेपण हुआ।
- 4 मई सन् 1994 को काहिरा में ज़ायोनी शासन एवं फ़िलिस्तीनी नेताओं द्वारा फ़िलिस्तीनी स्वायत्तता से संबंधित ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर हुये।
- 4 मई सन् 1999 में भूमिगत बारूदी सुरंगों के उत्पादन पर प्रतिबंध लगाने के लिए ओटावा संधि के सभी हस्ताक्षरकर्ता देशों की पहली बैठक मापूतो (मोज़ाम्बिक) शुरू हुई।
4 मई वर्ष 1924 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों का उद्घाटन समारोह फ़्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित किया गया। ओलम्पिक खेल अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली बहु-खेल प्रतियोगिता है। आधुनिक ओलम्पिक खेल एथेंस में सन 1896 में आरम्भ किये गये। इन खेलों मे भारत गोल्ड मेड्ल प्राप्त कर चुका है। ओलम्पिक खेल प्रत्येक चार वर्ष बाद विश्व के किसी प्रसिद्ध स्थान पर आयोजित किये जाते हैं। सन 2008 के ओलम्पिक खेल चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित किए गए।
4 मई सन 1502 ईसवी को विख्यात नाविक क्रिस्टोफ़र कोलम्बस ने अपनी चौथी समुद्री यात्रा में कोस्टारिका क्षेत्र का पता लगाया। इस क्षेत्र पर तीन शताब्दियों तक स्पेन का अधिकार रहा। सन 1821 ईसवी में कोस्टारिका के स्वतंत्रताप्रेमियों के दबाव के आगे स्पेन को झुकना पड़ा और इस क्षेत्र से स्पेन की सेनाएं बाहर निकलीं। स्वतंत्रता प्राप्त कर लेने के बाद कोस्टारिका, मैक्सिको से निकट हो गया और उसने सन 1960 में ग्वाटेमाला, हॉंडोरस, निकारागूआ और सलवाडोर के साथ मिलकर लैटिन अमेरिका में संयुक्त बाज़ार बनाया। केंद्रीय अमरीका महाद्वीप में स्थित कोस्टारिका देश का क्षेत्रफल 51 हज़ार वर्ग किलोमीटर है। निकारागुआ और पनामा इसके पड़ोसी देश हैं।
4 मई सन 1807 ईसवी को ईरान और फ़्रांस के बीच फिन केन एशटायन नामक समझौता हुआ। उस समय नेपोलियन योरोपीय सरकार से युद्धरत था। इस समझौते के अनुसार रूस का मुक़ाबला करने के लिए ईरान आवश्यकता के सारे हथियार फ़्रांस से ले सकता था। इसी समझौते के एक भाग में फ़्रांस वचनबद्ध हुआ था कि वह अपने तोपखाने के अफ़सर तथा सैन्य इंजीनियर ईरान भेजेगा जो ईरानी सेनाओं का प्रशिक्षण करेंगे। इसके बदले में ईरान वचनबद्ध हुआ था कि वो ब्रिटेन से अपने संबंध तोड़ लेगा और भारत पर चढ़ाई करने में फ़्रांस की सहायता करेगा किंतु कुछ समय बाद रुस के जार शासक और नेपोलियन बोनापार्ट के बीच मित्रता के समझौते पर हस्ताक्षर हो जाने और ब्रिटेन के विरुद्ध उनके बीच एकता बन जाने के बाद यह समझौता ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस प्रकार ईरान रुस के मुक़ाबले में अकेले पड़ गया और साम्राज्य का शिकार बन गया।
4 मई सन 1945 ईसवी को जर्मनी की नेश्नल सोशियालिस्ट पार्टी के भंग हो जाने की औपचारिक घोषणा की गयी। यह नाज़ी दल के नाम से प्रसिद्ध थी। इस प्रकार इस दल का वर्चस्व और अधिकार जो तानाशाही और हिंसा एवं दमन के साथ सन 1932 से आरंभ हुआ था समाप्त हो गया। यह पार्टी सन 1920 में बनी और 1929 में उसके सदस्यों की संख्या केवल 176 थी जो 1933 में एक दम बढ़कर 20 लाख हो गयी और फिर बाद के वर्षों में यह संख्या 60 लाख तक पहुंच गयी। इस दल का प्रयास था कि जर्मन वासियों को एकजुट करके जर्मनी की सीमाओं का जितना हो सके विस्तार करे। यह पार्टी द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी की पराजय के बाद बिखर गयी और हमेशा के लिए ग़ैर कानूनी घोषित कर दी गयी।

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हिजरत से तीन वर्ष पूर्व 10 रमज़ान को मक्का नगर में पैग़म्बरे इस्लाम की महान पत्नी हज़रत ख़दीजा का निधन हुआ। हज़रत ख़दीजा जो क़ुरैश की प्रसिद्ध और धनवान महिला थीं इस्लाम धर्म स्वीकार करने वालों में अग्रणी थीं और उन्होंने इस धर्म के प्रचार प्रसार के लिए अपनी पूरी सम्पत्ति लगा दी। पैग़म्बरे इस्लाम के लिए उनके अस्तित्व का इतना अधिक महत्व था कि उन्होंने उनके निधन को बहुत बड़ा दुख बताया और अपने चाचा हज़रत अबू तालिब (अ) और अपनी पत्नी हज़रज ख़दीजा के निधन के वर्ष को दुख के साल का नाम दिया। हज़रत ख़दीजा के निधन के बाद भी सदैव पैग़म्बरे इस्लाम उन्हें याद करते थे और फ़रमाते थे ईश्वर ने हज़रत ख़दीजा से अच्छी कोई वस्तु मुझे प्रदान नहीं की।
दस रमज़ान वर्ष 485 हिजरी क़मरी को विरोधियों ने सल्जूक़ी शासन श्रंखला के बुद्धिमान व प्रसिद्ध मंत्री ख़्वाजा नेज़ामुल मुल्क की हत्या कर दी। वह 410 हिजरी क़मरी में ईरान के पूर्वोत्तर में स्थित तूस नगर में जन्मे थे और चालीस वर्षों से सल्जूक़ियों की सेवाएं कर रहे थे। उन्होंने इस अवधि के दौरान बग़दाद के निज़ामिया मदरसे का निर्माण जैसे कई महत्त्वपूर्ण कार्य किए। इस मदरसे की स्थापना के बाद इस में लगभग छह हज़ार विद्यार्थी फ़िक़्ह, पवित्र क़ुरआन की व्यख्या और उस समय में प्रचलित अन्य विषयों में ज्ञान प्राप्त करते थे। उनकी प्रसिद्ध पुस्तकों में सियासत नामे या सियदुल मुलूक है जिसके पचास खंड हैं जिसमें क़ुरआन की बातें, हदीसें, पैग़म्बरे इस्लाम का आचरण, ईश्वरीय दूतों की कथाएं, कहानियां और राजाओं की शैलियों का वर्णन है।