ईरान में तेल का राष्ट्रीयकरण दिवस
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ईरान में 29 इस्फ़ंद को तेल उध्योग के राष्ट्रीयकरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar १९, २०१६ १६:०६ Asia/Kolkata

ईरान में 29 इस्फ़ंद को तेल उध्योग के राष्ट्रीयकरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।

ईरान में 29 इस्फ़ंद को तेल उध्योग के राष्ट्रीयकरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह ऐतिहासिक निर्णय देश की संसद ने किया था। अब प्रश्न यह है कि यह दिन क्यों महत्वपूर्ण है और संसद का यह फ़ैसला, ईरानी इतिहास में सदैव के लिए क्यों अमर हो गया।

ईरान में तेल का मामला शुरु होने का इतिहास एक शताब्दी पहले की ओर पलटता है। यह उस समय की बात है जब ईरान में पहला तेल का कुंआ खोदा गया और पश्चिम की लोभी और लूटपाट की नज़र की ईरान पर लग गयी। वे ईरानी राष्ट्र के अधिकारों पर अतिक्रमण करने तथा ईरान के तेल की लूट पाट के लिए ईरान में घुस गये था कि उनको ईरान से निकालना और उनके हस्तक्षेप को रोकना सरल काम नहीं था। ईरानी सरकार ने वर्ष 1870 में जब ईरान में तेल की खोज हुई, baron Julius reuter बारून जूलियस रोइटर्ज़ नामक समझौता किया जिसके अंतर्गत बारून जूलियस डू रोइटर्ज़ नामक ब्रिटिश नागरिकों को सत्तर वर्ष के लिए ईरान के तेल का पट्टा दे दिया गया। समझौते के 11 अनुच्छेद में तेल भी पत्थर के कोयले, लोहे तथा तांबे या जस्ते की खदानों के साथ शामिल किया गया था।

32 साल बाद अर्थात वर्ष 1902 में ईरान की तत्कालीन सरकार की ओर से दूसरा समझौता हुआ जिसके अंतर्गत पांच उत्तरी भागों को छोड़कर पूरे ईरान में तेल की खोज, निकालने और उसे बेचने का सौदा साठ वर्ष के लिए विलियम नाक्स डारसी नामक व्यक्ति से किया गया। इस समझौते में ईरान का भाग जिसमें तेल की कंपनी और ईरान की केन्द्रीय सरकार शामिल थी, तेल की शुद्ध आय का 16 प्रतिशत था जो केवल ईरान की सरकार के विशिष्ट अधिकार के रूप में उसे दिया जाता था किन्तु ब्रिटिश व्यापारी इस छोटी सी राशि को भी अदा करने को तैयार नहीं थे।

ईरान - ब्रिटिश तेल कंपनी की गतिविधियों के आरंभ से ही हिसाब किताब में सदैव तनाव रहता था। ईरान में इस प्रकार के थोपे गये समझौते का इतिहास बहुत पुराना है जो ईरान के महत्वपूर्ण धनस्रोत के रूप में तेल के बारे में बहुत ही ध्यानयोग्य है। इस प्रकार के समझौतों के थोपे जाने का मुख्य कारण, स्वाधीनता की कमी, तत्कालीन राजनेताओं की कमज़ोर राजनीति और विश्वासघात था जो ईरानी राष्ट्र के संबंध में किया गया। इस प्रकार के कलंकित समझौतों का एक अन्य नमूना वह समझौता है जो वर्ष 1933 में किया गया और गस गुलशाइयान समझौते के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस समझौते पर ईरानी समाज के जागरुक लोगों विशेषकर आयतुल्लाह काशानी ने कड़ी आपत्ति जताई। अलबत्ता ब्रिटेन की साम्राज्यवादी सरकार ने जब यह आपत्ति देखी तो उसने दारसी नामक समझौता निरस्त करके ईरानी सरकार से एक दूसरा समझौता किया जो उससे भी बदतर था और यह समझौता १९३३ के समझौते के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

 आयतुल्लाह काशानी ने इस पर आपत्ति जताते हुए ब्रिटेन की तेल कंपनी के विरुद्ध कड़े शब्दों पर आधारित एक विज्ञप्ति जारी की और कुछ ईरानी सांसदों ने संसद में इस समझौते को निरस्त करने का प्रस्ताव भी दिया परंतु चूंकि ब्रिटेन की साम्राज्यवादी सरकार स्थिति को अपने हित में परिवर्तित करने की चेष्टा में थी इसलिए शाह के सुरक्षा कर्मचारियों ने रात को संघर्षकर्ता धर्मगुरू आयतुल्लाह काशानी को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया और उसके बाद उन्हें किरमानशाह स्थानांतरित कर दिया जहां से उन्हें लेबनान देश निकाला दे दिया गया।ईरानी तेल के राष्ट्रीयकरण के लिए आयतुल्लाह काशानी ने बहुत प्रयास किया। इस संबंध में उन्होंने एक विज्ञप्ति जारी की जिसमें तेल के राष्ट्रीयकरण के लिए किये जाने वाले प्रयास को धार्मिक एवं राष्ट्रीय दायित्व बताया और लोगों ने आयतुल्लाह काशानी तथा कुछ जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में तेल के राष्ट्रीयकरण के लिए प्रदर्शन किया। अंततः २९ इसफन्द १३२९ हिजरी शमसी को एक प्रस्ताव पारित करके ईरानी तेल का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।

संसद में तेल के राष्ट्रीयकरण का विधेयक पास होने के बाद, ईरान-ब्रिटेन तेल कंपनी के हाथ से सब कुछ निकल गया और तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण की घोषणा कर दी गयी। यह एक ऐसा कारनामा था जो ईरानी इतिहास में सदैव के लिए अमर हो गया।

इस अमर घटना को तेल के राष्ट्रीयकरण का नाम दिया गया। तेल के राष्ट्रीयकरण से यह तय हो गया कि तेल की खोज, उसे निकालने और बचने का काम सरकार का होगा किन्तु जैसे ही प्रधानमंत्री मुस्दिक़ की तत्कालीन सरकार ने अप्रैल वर्ष 1951 में तेल के राष्ट्रीयकरण के क़ानून को लागू करने का फ़ैसला किया, उनकी सरकार के विरुद्ध षड्यंत्र आरंभ हो गये। यही विषय इस बात का कारण बना कि वर्ष १९५३ में अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर तत्कालीन ईरानी प्रधानमंत्री मोहम्मद मुसद्दिक़ की सरकार के खिलाफ विद्रोह करवा दिया। इस विद्रोह के बाद ब्रिटिश पेट्रोलियम कंपनी, शेल पेट्रोलियम एन वी, गल्फ आयल कार्पोरेशन, मोबिल आयल कार्पोरेशन, स्टंडर्ड आयल कंपनी जैसी कई कंपनियों ने ईरानी तेल के क्षेत्र में नये संकाय का गठन किया।

आय के एकमात्र स्रोत के रूप में तेल पर नज़र इस बात का कारण बनी कि ईरान को राजनैतिक मंच पर भी ज़ोरज़बरदस्ती करने वाली शक्तियों की ओर से सदैव धमकियों के निशाने पर रहा। तेल पर निर्भरता, चाहे वह निकट समय में हो या दूर समय में, ईरान पर प्रतिबंधों के लिए तेल एक हथकंडा रहा जिससे जिससे राष्ट्रीय हितों को बहुत अधिक नुक़सान पहुंचा। यही कारण है कि इस निर्भरता से ईरान के राष्ट्रीय हितों को बहुत नुकसान पहुंचा है। इसी कारण आज ईरान की अर्थ व्यवस्था में प्रगति के नए मार्गों को ढूंढा जा रहा है एवं उनकी समीक्षा की जा रही है और इस संबंध में प्रयास किये जा रहे हैं। इस समय एक प्रयास यह किया जा रहा है कि ईरान की अर्थ व्यवस्था केवल तेल पर निर्भर न रहे। हां यह एक अलग मुद्दा है कि तेल किस तरह विकास व प्रगति का कारण बन सकता है। यह वह मामला है जिसे बहुत से मध्यपूर्व के देशों को सामना है। जिन देशों की आय का मुख्य स्रोत केवल तेल है उन्हें सदैव वर्चस्ववादी एवं ज़ोर ज़बरदस्ती करने वाली शक्तियों की ओर से भय रहता है।

तेल उद्योग पर निर्भरता में कमी के लिए आवश्यक है कि इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामनेई ने प्रतिरोधक अर्थव्यवस्था के मापदंडों को बयान करते हुए बारंबार इस बात पर बल दिया है कि यह निर्भरता, हमारी सौ वर्षीय मनहूस विरासत है। उन्होंने प्रतिबंधों को इसी दृष्टि से देखा और सदैव इस बात पर बल दिया कि इस अवसर से लाभ उठाया जाना चाहिए और प्रयास करना चाहिए ताकि तेल को ऐसी अन्य आर्थिक गतिविधियों का विकल्प बनाया जा सके जिनसे देश को अधिक आय प्राप्त हो सके।

उल्लेखनीय है कि प्रतिरोधक अर्थ व्यवस्था में तेल पर निर्भरता कम की जा रही है और यह वह चीज़ है जिस पर ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने बल दिया है। इस समय ईरान का तेल उद्योग इस प्रकार हो गया है कि वह पड़ोसी देशों के लिए आदर्श व आधार बन गया है। पिछले तीन दशकों से प्रतिबंध होने के बावजूद ईरान के तेल उद्योग ने ध्यान योग्य विकास व प्रगति की है।

इस आधार पर तेल की बिक्री की शैलियों में विविधता उत्पन्न करना तथा तेल और गैस उत्पादों की क्षमताओं में वृद्धि तथा उसके रणनैतिक स्रोतों को बढ़ाना विशेषकर संयुक्त फ़ील्डों में और तेल व गैस उद्योग के चेन में पेट्रोकेमिकल और तेल से बनने वाली वस्तुओं को शामिल करके उसके महत्व को बढ़ाना, ईरान के तेल उद्योग की रणनीतियों के भाग हैं।

ईरान में दुनिया के गैस और तेल का बड़ा भंडार है और तेल के भंडार की दृष्टि से ईरान दुनिया का चौथा देश है जबकि गैस भंडार की दृष्टि से ईरान दुनिया का पहला देश है। वर्तमान समय में ईरान ने तेल और गैस उद्योग में बड़ी छलांग लगानी शुरु कर दी है। छठी विकास योजना के अंतर्गत यह अनुमान लगाया गया है कि तेल और गैस में 9.3 प्रतिशत तथा पेट्रोकेमिकल में 18 प्रतिशत वृद्धि होगी। छठी विकास योजना के अनुसार, तेल और गैस उत्पाद, 5.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन का टारगेड रखा गया है और तय यह है कि यह मात्रा दस लाख तरल गैस तथा 2.3 मिलियन वैस्त कच्चा तेल रिफ़ाइन किया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि छठी विकास योजना की समाप्ति पर 3.3 मिलियन बैरल तेल, देश के भीतर उत्पादित होगा। वर्तमान समय में पेट्रोकेमिकल पदार्थों में वृद्धि 18 अरब डॉलर तक पहुंच गयी है और यह राशि अगले दो वर्षों में 22 अरब डॉलर तक तथा छठी विकास योजना की समाप्ति पर 21 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा जो बहुत बड़ा कारनामा है।

ईरान के पेट्रोलियम मंत्री ने पिछले वर्ष तेहरान में 150 विदेशी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में जिसमें शेल, टोटल, आनी, पेट्रोनास, लोकआयल और सीएनपीसी कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल थे, ईरान के तेल उद्योग के समझौते के नये मॉडल और पेट्रोलियम मंत्रालय के आगामी कार्यक्रमों का अनावरण किया। खोज का दायरा बढ़ाना तथा देश में गैस और तेल उद्योग की क्षमताओं को बढ़ाना, भंडारों से टैक्स में वृद्धि, तेल उद्योग की गतिविधियों में उपस्थिति के लिए ईरान की ग़ैर सरकारी तथा राष्ट्रीय तकनीकों को बढ़ाना, ईरान के तेल के नये समझौते में घोषित पांच मुख्य बातें हैं।

तेल और गैस उत्पादन की क्षमताओं में वृद्धि के लिए योग्य खोजियों की आवश्यकता है। इसके साथ ही हर विकास कार्यक्रम में दुनिया में मौजूद तकनीकों से लाभ उठाया जाना चाहिए। इस प्रकार से ईरान के पेट्रोकेमिल मंत्रालय का लक्ष्य, अधिक से अधिक विदेशी पूंजीनिवेशकों को आकर्षित करना हैं ।

पेट्रोलियम मंत्री बीजन नामदार ज़ंगने के अनुसार, छठे कार्यक्रम के लक्ष्यों में तेल उद्योग में प्रतिवर्ष 40 अरब डॉलर का पूंजीनिवेश दृष्टिगत रखा गया है ताकि दक्षिणी पार्ट संयुक्त गैस फ़ील्ड और पश्चिमी कारून तेल फ़ील्ड से ईरान के लाभान्वित होने का स्तर पड़ोसी देशों के बराबर हो जाए।

तेल के समझौते करने के लिए ईरान की नयी योजना, एक अनिवार्य कार्यक्रम के रूप में प्राइवेट सेक्टर को शामिल करने को दृष्टिगत रखा गया है। तेल उद्योग के अतीत तथा इस उद्योग की विकास योजनाओं पर एक दृष्टि डालने से यह पता चलता कि अधिकतर जब तेल और गैस पर रिर्भर अर्थव्यवस्था के विकास की बात होती है तो इस क्षेत्र में सक्रिय बड़ी तेल कंपनियों पर निर्भरता को दर्शाता है। यह निर्भरता हमेशा तेल उद्योग के आधारभूत ढांचे के लिए एक कमज़ोरी रही है। तेल के नये समझौते करने के लिए ईरान द्वारा पेश की गयी नई योजना की विशेषताओं से यह कमज़ोरी दूर हो जाएगी।

वर्तमान समय में ईरान का तेल उद्योग अपने उतार चढ़ाव का इतिहास गुज़ार कर, प्रतिरोधक अर्थव्यवस्था के मार्ग पर अग्रसर है। इसीलिए तेल और गैस उद्योग के मुख्य भाग में 134 अरब डॉलर का पूंजीनिवेश तथा इसी प्रकार इस उद्योग से संबंधित उद्योगों में 70 अरब डॉलर का पूंजीनिवेश दृष्टिगत रखा गया है। इसी के साथ तेल उद्योग, ईरान की स्थानीय तकनीकों और क्षमताओं पर केन्द्रित है।