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अन्य देशों के मामलों में हस्तक्षेप, ईरान की नीति नहीं, विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता
Oct ०१, २०१८ ०३:४०विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में ईरान के खिलाफ बहरैन और यूएई के विदेशमंत्रियों के निराधार आरोपों का उत्तर दिया।
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आशूर से पहले कर्बला का माहौल क्या है?+ फ़ोटो
Sep १८, २०१८ १५:३९दुनिया के कोने कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु नवीं और दसवीं मुहर्रम कर्बला में मनाने के लिए एकत्रित हो चुके हैं। कर्बला इस समय किसी अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र की तसवीर पेश कर रहा है जहां हर इलाक़े और हर संस्कृति के लोग जमा हैं।
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बहरैनी जनता अज़ादारी के प्रतीकों का अपमान करने की अनुमति नहीं देगी
Sep १७, २०१८ १४:२९बहरैन में 14 फ़रवरी गठबंधन ने एक बयान जारी करके कहा है कि वह देश में आले ख़लीफ़ा शासन के सैनिकों को इमाम हुसैन (अ) की अज़ादारी के प्रतीकों का अपमान करने की अनुमित नहीं देगा।
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ईरान के विरुद्ध बहरैन का दावा निराधारः क़ासेमी
Sep ०९, २०१८ १२:३५ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि बहरैन के दावे की कहीं से पुष्टि नहीं हो सकी है।
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बहरैन में बंदियों की दुर्दशा बद से बदतर होती जा रही है
Aug १९, २०१८ १२:५०बहरैन में डेमोक्रेसी के लिए शांति और मानवाधिकार संगठन ने घोषणा की है कि जेलरों की लापरवाही के कारण बहुत से बंदियों को चर्मरोग और एलर्जी जैसी विभिन्न बीमारी का सामना है।
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बहरैन, नागरिकों के विरुद्ध सरकार की दमनात्मक कार्यवाहियां जारी
Jul ३१, २०१८ १४:४६बहरैन में आले ख़लीफ़ाा शासन के विरुद्ध जनता के प्रदर्शनों का क्रम जारी है।
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बहरैनी शासन ने सैकड़ों नागरिकों की नागरिकता खत्म की
Jul २८, २०१८ ०८:०८बहरैन की तानाशाही सरकार ने इस देश के 738 नागरिकों की नागरिकता समाप्त कर दी है।
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बहरैन, शैख़ ईसा क़ासिम के समर्थन में प्रदर्शन
Jul २२, २०१८ १३:२६बहरैन की जनता ने वरिष्ठ शीया धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम के समर्थन में प्रदर्शन किए हैं।
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बहरैन, शैख़ ईसा क़ासिम के समर्थन में प्रदर्शन
Jul २०, २०१८ १५:५३बहरैन की राजधानी मनामा की जनता ने वरिष्ठ धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम के समर्थन में व्यापक प्रदर्शन किए हैं।
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शेख़ ईसा क़ासिम का इलाज के लिए विदेश जाना, आले ख़लीफ़ा शासन की लाचारी का प्रमाण
Jul १०, २०१८ १७:४२बहरैन की विभिन्न हस्तियों और संगठनों ने इस देश के वरिष्ठ शिया धर्मगुरू आयतुल्लाह शेख़ ईसा क़ासिम को इलाज के लिए विदेश भेजे जाने के आले ख़लीफ़ा सरकार के फ़ैसले को इस शासन की लाचारी बताया है।