अमरीका की एक भी अनुचित मांग पूरी नहीं की जाएगीः ज़रीफ़
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विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने इस बात पर बल देते हुए 2015 में हुआ परमाणु समझौता एक तर्कपूर्ण समझौता है, कहा कि अमरीका की तेहरान से विशिष्टता पर आधारित मांग का कोई नतीजा नहीं निकलेगा।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul २०, २०१९ ०८:३७ Asia/Kolkata
  • अमरीका की एक भी अनुचित मांग पूरी नहीं की जाएगीः ज़रीफ़

विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने इस बात पर बल देते हुए 2015 में हुआ परमाणु समझौता एक तर्कपूर्ण समझौता है, कहा कि अमरीका की तेहरान से विशिष्टता पर आधारित मांग का कोई नतीजा नहीं निकलेगा।

उन्होंने शुक्रवार को वॉशिंग्टन से वेनेज़ोएला की राजधानी काराकास रवाना होने से पहले प्रेस कॉन्फ़्रेंस में, अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प की उस अपील की प्रतिक्रिया में यह बात कही जिसमें ट्रम्प ने ईरान से युरेनियम संवर्धन स्थगित करने और अमरीका के साथ 100 साल का समझौता करने की बात कही है।

ईरानी विदेश मंत्री ने अमरीकी राष्ट्रपति के बयान की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस तरह के बयान से स्पष्ट होता है कि जेसीपीओए एक तर्कपूर्ण समझौता है।

इससे पहले विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने शुक्रवार को अमरीकी रेडियो आईपीआर से इंटरव्यू में कहा था कि ईरान में पश्चिमी देशों के साथ संपर्क का विचार मूल्यहीन हो चुका है।

उन्होंने बल दिया कि परमाणु समझौते जेसीपीओए के संबंध में पश्चिमी देशों के अपने वचन पर अमल न करने की वजह से ईरान में पश्चिमी देशों के साथ संबंध व आपसी सहयोग के विचार की कोई अहमियत नहीं रह गयी है।

जवाद ज़रीफ़ ने अमरीकी रेडियो आईपीआर से इंटरव्यू में कहाः ईरानी जनता की नज़र में, परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने और इस समझौते के प्रति योरोप के पाबंद न होने की वजह से, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ संबंध की कोई अहमियत नहीं रह गयी है।

जर्मनी, ब्रिटेन और फ़्रांस ने 8 मई 2018 को परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने के बाद इस बात का वचन दिया था कि ईरान के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए इस समझौते को बाक़ी रखेंगे, लेकिन, इन देशों ने अमरीका के ख़िलाफ़ शब्दिक बयानबाज़ी के अलावा अब तक व्यवहारिक रूप से इस दिशा में कोई क़दम नहीं उठाया है।

ईरान ने भी परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने के आर्थिक नुक़सान की भरपायी के लिए योरोप के उपाय की अनुपयोगिता साबित होने के बाद, 8 मई 2019 को परमाणु समझौते के अनुच्छेद 26 और 36 के तहत कुछ प्रतिबद्धताओं को कम करने का एलान किया। ईरान ने परमाणु समझौते के बचे हुए पक्षों को बैंकिंग और तेल के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए 60 दिन की मोहलत दी थी, जिसके 7 जुलाई को ख़त्म होने के बाद, इस्लामी गणतंत्र ईरान ने, युरेनियम का 3.67 प्रतिशत से आगे संवर्धन शुरु किया।

इसके साथ ही ईरान ने योरोप को सचेत किया है कि अगर उन्होंने अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा न किया तो तेहरान इससे भी ठोस अगला क़दम उठाएगा।(MAQ/N)