इज़रायली सेना में आत्महत्या का अभूतपूर्व रिकॉर्ड
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पार्स टुडे: ज़ायोनी सेना ने वर्ष 2025 की अपनी रिपोर्ट में 21 आत्महत्या के मामले और शासन के 151 सैनिकों की मौत की सूचना दी है; यह आँकड़ा पिछले 15 वर्षों में आत्महत्या का सबसे उच्च स्तर है।
(last modified 2026-01-01T12:45:45+00:00 )
Jan ०१, २०२६ १८:११ Asia/Kolkata
  • इज़रायली सेना में आत्महत्या का अभूतपूर्व रिकॉर्ड
    इज़रायली सेना में आत्महत्या का अभूतपूर्व रिकॉर्ड

पार्स टुडे: ज़ायोनी सेना ने वर्ष 2025 की अपनी रिपोर्ट में 21 आत्महत्या के मामले और शासन के 151 सैनिकों की मौत की सूचना दी है; यह आँकड़ा पिछले 15 वर्षों में आत्महत्या का सबसे उच्च स्तर है।

पार्स टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, ज़ायोनी सेना ने दर्जनों सैनिकों की आत्महत्या को स्वीकार करते हुए, वर्ष 2025 में अपने हताहतों का संक्षिप्त विवरण जारी किया है। इज़रायली सेना ने मंगलवार, 30 दिसंबर को वर्ष 2025 के हताहत आँकड़े संक्षेप में प्रकाशित किए हैं। इस रिपोर्ट में, आत्महत्या के कारण मौत के बढ़ते मामलों ने अन्य सभी कारणों से अधिक ध्यान आकर्षित किया है। वर्ष 2025 में, ज़ायोनी शासन की सेना में आत्महत्याओं से 21 मौतें दर्ज की गई हैं, और यह संख्या पिछले 15 वर्षों में अभूतपूर्व है। शासन की सेना की सैनिक हताहतों के संबंध में नई रिपोर्ट, आत्महत्या के मामलों की लगातार बढ़ती संख्या को दर्शाती है।

 

उक्त रिपोर्ट के अनुसार, ज़ायोनी सेना के 151 सैनिक इस वर्ष विभिन्न कारणों से मारे गए हैं। इन आँकड़ों में विशेष रूप से उन सैनिकों की संख्या उल्लेखनीय है, जिनकी मृत्यु का कारण आत्महत्या दर्ज किया गया है। ज़ायोनी शासन की सेना द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 के कुल हताहतों में से 88 लोग संचालन गतिविधियों के दौरान, 15 बीमारी के कारण, 3 प्रतिरोध मोर्चा के संचालन में और 21 दुर्घटनाओं में मारे गए हैं। साथ ही, 21 हताहतों को "संदिग्ध आत्महत्या" के रूप में दर्ज किया गया है। ज़ायोनी सेना को मानसिक संकट में वृद्धि का मुकाबला करने के भाग के रूप में अपनी चिकित्सा सेवाओं का विस्तार करने के लिए बाध्य होना पड़ा है।

 

आँकड़ों के अनुसार, इज़रायल की सेना के सभी हिस्सों में एक हज़ार से अधिक मानसिक स्वास्थ्य अधिकारी तैनात किए गए हैं। साथ ही, प्रत्येक ब्रिगेड के सैनिक एक मानसिक स्वास्थ्य अधिकारी से विशेष रूप से जुड़े हुए हैं। जटिल घटनाओं के बाद तत्काल भावनात्मक-मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के लिए दर्जनों अधिकारी युद्ध क्षेत्रों में भी पहुँच चुके हैं। ज़ायोनी शासन की सेना हमेशा जनमत को नियंत्रित करने के उद्देश्य से अपने हताहतों को सेंसर करती रही है; हालाँकि, वह अपने सैनिकों के हताहतों, विशेष रूप से आत्महत्या के कारण होने वाली मौतों में वृद्धि को नकारने में सक्षम नहीं हो पाई है। (AK)

 

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