एनपीटी पर हस्ताक्षर की शर्त अमरीका ने ही लगाई थी, चीन
भारत को न्युक्लियर सप्लायर ग्रुप में स्थान देने संबंधी बहस के बीच चीन ने अमरीका से कहा है कि एनएसजी की सदस्यता के लिए एनपीटी पर हस्ताक्षर की शर्त को वाशिंग्टन ने ही ज़रूरी घोषित किया था।
चीन पर अमरीका की ओर से दबाव है कि वह एनएसजी में भारत की सदस्यता के रास्ते में रुकावट न बने और सियोल में जारी बैठक में भारत का समर्थन कर दे लेकिन चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुवा चिन यिंग का कहना है कि एनपीटी पर हस्ताक्षर कर चुके देशों को ही इस ग्रुप की सदस्यता दी जा सकती है और चीन किसी विशेष देश की सदस्यता का विरोध नहीं करता।
बीजिंग में पत्रकारों से बात करते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि मैंने भारत की सदस्यता के समर्थन के बारे में अमरीका का एक बयान सुना लेकिन अमरीका उन देशों में से एक है जिन्होंने एनएसजी की सदस्यता के लिए क़ानून बनाया था कि एनपीटी पर दस्तख़त न करने वाले देशों को परमाणु क्लब में शामिल नहीं किया जा सकता।
ज्ञात रहे कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमरीका यात्रा के दौरान वाशिंग्टन ने एनएसजी में भारत की सदस्यता का समर्थन करने की घोषणा की थी।
भारतीय प्रधानमंत्री इस मामले में 23 जून को ताशकंद में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के अवसर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी बात करेंगे।
दूसरी ओर पाकिस्तान कह रहा है कि उसने एनएसजी में भारत की सदस्यता को रोकने के लिए सफलता के साथ लाबिंग की है। विदेशी मामलों में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अज़ीज़ ने कहा कि विदेश नीति के कारण पाकिस्तान का अंतर्राष्ट्रीय विषयों से संबंधित रुख़ विश्व स्तर पर स्वीकार किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत रह चुके हुसैन हक़्क़ानी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अमरीका में एक पूर्व कूटनयिक के कारण दुनिया में पाकिस्तान को लाबी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व कूटनयिक पाकिस्तान विरोधी लाबी के साथ मिलकर देश के शत्रुओं के हाथ मज़बूत कर रहे हैं।
दूसरी ओर हुसैन हक़्क़ानी ने सरताज अज़ीज़ के आरोप का जवाब देते हुए कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों को अपनी विफल नीतियों तथा विदेशों में उन्हें ख़राब ढंग से पेश करने की ज़िम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए, देश में बैठकर किसी और को बलि का बकरा नहीं बनाना चाहिए।
हुसैन हक़्क़ानी ने कहा कि उन्हें मालूम है कि सरताज अज़ीज़ उन्हीं के बारे में बात कर रहे थे क्योंकि एक और मंत्री भी इसी प्रकार का बयान दे चुके है।