ट्रंप को रूस का दो टूक जवाब
रूस ने अमरीका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के उस प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि रूस प्रतिबंधों को हटाए जाने के बदले अपने परमाणु हथियारों की संख्या कम करे।
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि प्रतिबंधों से रूस को काफ़ी नुक़सान पहुंच रहा है और यदि मास्को परमाणु हथियारों में कमी पर तैयार हो जाता है तो प्रतिबंधों को हटाया जा सकता है। ट्रंप ने कहा कि इस समझौते से दोनों पक्षों को लाभ होगा।
अमरीका और यूरोपीय संघ ने वर्ष 2014 से रूस पर आरोप लगाया कि वह यूक्रेन की अराजकता में लिप्त है और एक पक्ष की सहायता कर रहा है तथा रूस ने ग़लत तरीक़े से क्रीमिया को अपनी धरती से जोड़ लिया है। इस आरोप के साथ ही पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक व वित्तीय प्रतिबंध लगाए दिए जबकि मास्को ने भी इस पर जवाबी कार्यवाही की। अमरीका की सरकार ने हाल ही में रूस के 35 कूटनयिकों को अपने देश से बाहर निकाल दिया और रूस के छह अधिकारियों तथा पांच संस्थाओं पर यह आरोप लगाकर प्रतिबंध लगा दिया कि उन्होंने अमरीका के राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप किया है।
ट्रंप ने रूस से प्रतिबंध हटाने के लिए जो शर्तें लगाईं वह आश्चर्यजनक होने के साथ ही तर्कहीन भी हैं। आश्चर्यजनक इस लिए कि वाशिंग्टन मास्को संबंधों के इतिहास में यह पहला मौक़ा है कि अमरीकी राष्ट्रपति एसी शर्त लगा रहे हैं जो इससे पहले किसी भी अमरीकी राष्ट्रपति ने नहीं लगाई थी। यह शर्त तर्कहीन इस लिए है कि ट्रंप अमरीका के परमाणु हथियारों में कमी लाने का कोई वादा किए बिना रूस से मांग कर रहे हैं कि वह अपने परमाणु शस्त्रों की संख्या कम करे। हालांकि अमरीका के पास परमाणु हथियारों का बहुत बड़ा भंडार है और अमरीका ने एनपीटी का कभी भी पालन नहीं किया है। यही नहीं अमरीका तो अपने परमाणु हथियारों का नवीनीकरण भी कर रहा है। अमरीका की सामरिक रणनीति में पूर्व परमाणु आक्रमण की नीति आज भी शामिल है जिस पर अमरीका के प्रतिद्वंद्वी ही नहीं ख़ुद अमरीका के भीतर भी कुछ गलियारे आपत्ति जताते रहे हैं।
रूसी संसद की सुरक्षा समिति के प्रमुख ओज़ोफ़ ने कहा कि सभी परमाणु शक्तियों का संयुक्त रूप से परमाणु निरस्त्रीकरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रूस और अमरीका के अलावा भी कुछ देश हैं जिन्हें इस प्रक्रिया से जोड़ा जाना चाहिए। रूस को भलीभांति पता है कि अमरीका परमाणु हथियार कम करने के बजाए बढ़ाने का इरादा रखता है क्योंकि डोनल्ड ट्रंप ख़ुद भी अमरीका की परमाणु ताक़त बढ़ाने की बात कह चुके हैं।