ट्रम्प की ओर से यूरोप के ख़िलाफ़ व्यापारिक जंग शुरू
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हफ़्तों की बहस और खींच-तान के बाद अंततः अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने स्टील और एल्युमीनियम पर आयात शुल्क लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Mar ०९, २०१८ १६:२८ Asia/Kolkata

हफ़्तों की बहस और खींच-तान के बाद अंततः अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने स्टील और एल्युमीनियम पर आयात शुल्क लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए।

ट्रम्प के इस फ़ैसले से स्टील पर 25 प्रतिशत और एल्युमीनियम पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा। कनाडा और मैक्सिको जैसे कुछ देशों को अभी इस फ़ैसले का पात्र नहीं बनाया गया है। ट्रम्प ने इस आदेश पर दस्तख़त करने के बाद इसे अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने, देसी उत्पादन में सहायता करने और मज़दूरों के लिए रोज़गार अवसरों को सुरक्षित करने वाला एक क़दम बताया है।

 

विदित रूप से अमरीका के धातु उद्योग की रक्षा के लिए किए गए ट्रम्प के इस फ़ैसले को अमरीका के व्यापारिक साझेदारों की कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा है कि वे अमरीका को स्टील व एल्युमीनियम के निर्यात के अलावा अन्य अमरीकी वस्तुओं पर भी शुल्क लगाएंगे। अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर अमरीका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच व्यापार की जंग में तेज़ी आ गई तो उसके कुपरिणाम अमरीका के साठ लाख मज़दूरों को भुगतने पड़ेंगे और उनमें से बहुत से मज़दूर अपना रोज़गार खो बैठेंगे।

 

अमरीका के कुछ आर्थिक गुटों का कहना है कि अगर देसी उत्पादन को मज़बूत नहीं बनाया गया और अमरीकी मज़दूरों के रोज़गार को सुरक्षित नहीं रखा गया तो यह देश, संसार की सबसे बड़ी और मज़बूत अर्थव्यवस्था का अपना स्थान खो देगा और चीन उसका स्थान ले लेगा। यह एेसी स्थिति में है कि कुछ अन्य आर्थिक हल्क़ों का मानना है कि अगर अमरीका में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था के नियमों को रौंदा गया तो इससे न केवल यह कि संसार व्यापारिक युद्धों में ग्रस्त हो जाएगा बल्कि अमरीकी के आर्थिक पतन में भी तेज़ी आ जाएगी। इन दोनों में से कौनसा दृष्टिकोण सही सिद्ध होता है? यह देखने के लिए इंतेज़ार करना पड़ेगा। (HN)