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अल्लाह के ख़ास बन्दे

Feb २४, २०१८ १०:१९ Asia/Kolkata
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  • अल्लाह के ख़ास बन्दे- 29
    आपको याद होगा कि हमने इमाम हसन अलैहिस्सलाम के जीवन की समीक्षा में यह बताया कि उनके लिए यह मुमकिन न था कि वह भ्रष्ट उमवी व्यवस्था, अन्याय तथा धर्म में अलग से शामिल की जा रही बातों के संबंध में ख़ामोश बैठे रहें क्योंकि वह अपने पिता हज़रत अली अलैहिस्सलाम के मार्ग का पालन कर रहे थे कि जिनका लक्ष्य न्याय पर आधारित व्यवस्था क़ायम करना, अत्याचारियों से संघर्ष करना, पीड़ितों के अधिकारों का समर्थन करना और क़ुरआन व पैग़म्बरे इस्लाम के पवित्र परिजनों के सम्मान की रक्षा करना था।  
  • अल्लाह के ख़ास बन्दे- 28
    हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम की ख़िलाफ़त के काल में इमाम हसन अलैहिस्सलाम युवा थे।
  • अल्लाह के ख़ास बन्दे- 27
    हज़रत अली अलैहिस्सलाम की शहादत के बाद उनके सबसे बड़े बेटे इमाम हसन अलैहिस्सलाम, अपने पिता के उत्तराधिकारी बने। 
  • अल्लाह के ख़ास बन्दे- 26
    आपको अवश्य याद होगा कि पिछले कार्यक्रम में हमने हज़रत अली अलैहिस्सलाम के जीवन के कुछ पहलुओं की समीक्षा की थी।
  • अल्लाह के ख़ास बन्दे- 25
    हमने पिछले कार्यक्रम में बताया कि जमल युद्ध समाप्त होने के बाद हज़रत अली अलैहिसस्लाम ने कूफ़ा नगर को अपना शासन केन्द्र बनाया ताकि वहां से मुआविया की गतिविधियों पर नज़र रख सकें।
  • अल्लाह के ख़ास बन्दे- 24
    आपको बताया था कि लोगों की अप्रसन्नता के बाद उनके भीतर विद्रोह पैदा हुआ और उन्होंने उस्मान ग़नी की हत्या कर दी।
  • अल्लाह के ख़ास बन्दे- 23
    हज़रत उमर 12 साल हुकूमत करने के बाद 23वीं हिजरी क़मरी में अपने एक विरोधी के हाथों मारे गए।
  • अल्लाह के ख़ास बन्दे- 22
    पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि व आलेहि व सल्लम के जीवन के अंतिम क्षण थे सभी उनके आप- पास जमा थे सब उनकी हालत से चिंतित व दुःखी थे इसी बीच पैग़म्बरे इस्लाम ने अपनी आंखें खोली और फरमाया मेरे भाई को मेरे पास बुलाओ ताकि वह मेरे पास बैठे।
  • अल्लाह के ख़ास बन्दे- 21
    मोटे तौर पर जब हम ग़दीर की घटना पर नज़र डालते हैं तो देखते हैं कि यह केवल एक घटना नहीं है, बल्कि यह एक विचारधारा है जो पूरे इतिहास में बाक़ी है, इसलिए कि लोगों का भाग्य मानव समाज की इमामत और नेतृत्व पर निर्भर करता है।
  • अल्लाह के ख़ास बन्दे- 20
    आपको याद होगा कि पिछले कुछ कार्यक्रम में हज़रत अली अलैहिस्सलाम के जीवन की कुछ अहम घटना की समीक्षा की जिससे पता चला कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम का ईश्वर और उसके पैग़म्बरे के निकट बहुत अहम स्थान है।
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