रविवार- 10 मई
10 मई वर्ष 1983 ईसवी को इराक़ की पूर्व बासी सरकार ने आयतुल्लाह मोहसिन हकीम के परिवार के 90 लोगों को गिरफ़्तार करके उनमें से छह को शहीद कर दिया।
उसके दो वर्ष बाद इस अत्याचारी सरकार ने इस परिवार के दस और लोगों को शहीद कर दिया। आयतुल्लाह हकीम इस्लामी जगत के एक वरिष्ठ धर्म गुरु और मुजतहिद थे। वर्ष 1969 ईसवी में उनका स्वर्गवास हो गया। उनके पुत्रों और परिवार के अन्य लोगों की गिनती पढ़े लिखे लोगों में होती थी। इसी लिए इराक़ की पूर्व बासी सरकार, इराक़ी जनता में इस परिवार के बढ़ते प्रभाव से बहुत अधिक भयभीत थी। इसी भय के कारण उसने इस परिवार के अनेक लोगों को शहीद करा दिया और बहुत से लोगों को जेल में डाल दिया।
- 10 मई सन् 1503 में इटली के खोजकर्ता और नाविक कोलंबस ने कायमान द्वीप की खोज की।
- 10 मई सन् 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में जीत के बाद बाबर ने तत्कालीन भारत की राजधानी अकबराबाद (आगरा) में प्रवेश किया।
- 10 मई सन् 1534 में फ्रांसीसी नाविक जैक्स कॉर्टियर न्यूफाउण्डलैंड पहुँचा।
- 10 मई सन् 1655 में ब्रिटिश सेना ने जमैका पर कब्ज़ा किया।
- 10 मई सन् 1774 में लुई 15वें की मौत के बाद लुई 16वां फ्रांस का राजा बना।
- 10 मई सन् 1796 में नेपोलियन ने लोदी ब्रिज के युद्ध में ऑस्ट्रिया को हराया।
- 10 मई सन् 1824 में लंदन की नेशनल गैलरी को आम लोगों के लिए खोला गया।
- 10 मई सन् 1857 में भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम इसी दिन आरंभ हुआ था।
- 10 मई सन् 1857 में दिल्ली से पास 60 किलोमीटर दूर मेरठ में अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ पहली लड़ाई में ब्रिटिश सेना में काम करने वाले भारत माता के वीरों ने 50 अंग्रेज़ सिपाहियों को मार डाला था।
- 10 मई सन् 1916 में नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टरडम में ऐतिहासिक शिप पोर्ट संग्रहालय खोला गया।
- 10 मई सन् 1940 में जर्मनी ने बेल्जियम, नीदरलैंड और लक्ज़मबर्ग पर आक्रमण किया।
- 10 मई सन् 1945 में रूसी सेना ने चेक गणराज्य की राजधानी प्राग पर कब्ज़ा किया।
- 10 मई सन् 1959 को सोवियत सेना अफ़ग़ानिस्तान पहुंची।
- 10 मई सन् 1972 में अमेरिका ने नेवादा में परमाणु परीक्षण किया।
- 10 मई सन् 1993 में संतोष यादव दुनिया के सबसे ऊँचे पर्वत शिखर एवरेस्ट पर दो बार पहुंचने वाली विश्व की पहली महिला पर्वतारोही बनी।
- 10 मई सन् 1994 में दक्षिण अफ़्रीका में नेल्सन मंडेला ने एक ऐतिहासिक समारोह में राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की।
10 मई वर्ष 1943 ईसवी को यूगोस्लाविया के भौतिक शास्त्री निकोलस टस्ला का निधन हुआ। वे वर्ष 1856 ईसवी में जन्मे थे। छात्रकाल के समय में ही उन्हें भौतिक विज्ञान से बहुत लगाव था। उन्होंने बहुत अधिक शोधकार्य किए। वैकल्पिक विद्युत की खोज उनके महत्त्वपूर्ण कार्यों में से एक है।
10 मई वर्ष 1857 ईसवी को भारतीय उप महाद्वीप की अंग्रेज़ सरकार के विरुद्ध मेरठ में भारतीय सैनिकों ने जेल पर आक्रमण करके अपने बंदी साथियों को स्वतंत्र करा लिया जिन्हें अंग्रेज़ अधिकारियों ने ऐसे कारतूसों के प्रयोग से इन्कार के अपराध में गिरफ़्तार करके जेल में डाल दिया था जिनके संबंध में यह बात प्रसिद्ध थी कि वे गाय और सुअर की चर्बी से बनाए गये थे।
10 मई सन 1830 को फ़्रांस की रसायन शास्त्री फ़्रासवा मैरी राओल का जन्म हुआ। वे पेरिस विश्वविद्यालय से डॉक्ट्रेट की डिग्रि प्राप्त करने के बाद अध्ययन और शोधकार्य में लीन हो गयीं। उन्होंने इतना परिश्रम किया कि। उन्हें आधुनिक रसायनशस्त्र के जनकों में गिना जाने लगा। सन 1901 ईसवी में उनका निधन हुआ।
10 मई सन 1871 को जर्मनी के साथ लड़ाई में फ़्रांस की पराजय के बाद जर्मनी के फ़्रैंकफ़ोर्ट नगर में दोनों देशों के बीच समझोता हुआ। इस समझौते के आधार पर फ़्रांस को जर्मनी के बहुत से क्षेत्र लौटाने पड़े और 10 लाख फ़्रैंक का जुर्माना देना पड़ा। फ़्रांस की पराजय के बाद जर्मनी योरोप का सबसे शक्तिशाली देश बन गया।
इस समझौते के 69 वर्ष बाद सन 1940 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने फ़्रांस के साथ एक और युद्ध आरंभ किया। इस युद्ध में जर्मनी की वायुसेना ने फ़्रांस की बंदरगाहों और हवाई अडडों पर भारी बम्बारी करके इस देश की प्रतिरोध क्षमता को समाप्त करने का प्रयास किया। अंतत: यह आक्रमण फ़्रांस की पराजय और पेरिस पर जर्मनी के तानाशाह हिटलर की सेना के अधिकार के साथ समाप्त हो गया।
10 मई सन 1973 ईसवी को पश्चिमी मरुस्थल के स्वतंत्रता प्रेमियों ने अपने देश की स्वतंत्रता के लिए मोर्चा बनाया।पश्चिमी मरुस्थल की जनता ने इस मोर्चे का स्वागत किया और स्पेन के साम्राज्य के विरुद्ध इस मोर्चे की गतिविधियां तेज़ होती गयीं। यहॉं तक कि सन 1975 में स्पेन की सेना को इस देश से निकलना पड़ा। किंतु स्पेन ने इस देश का संचालन मोरक्को और मोरीतानिया के हवाले कर दिया ये देश पश्चिमी मरूस्थल के कुछ भागों पर अपने स्वामित्व के दावेदार थे।
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21 उर्दीबहिश्त सन 1298 हिजरी शम्सी को मिर्ज़ा कूचिक ख़ान जंगली के निष्ठावान साथी डाक्टर इब्राहीम हशमतुल अतिब्बा को फांसी दी गयी। डाक्टर इब्राहीम स्वतंत्रता संग्रामी थे और संविधान क्रांति के बहुत ही निष्ठावान लोगों में उनकी गिनती होती थी। वह मिर्ज़ा कूचिक ख़ान जंगली के बहुत निकटतम साथियों में से थे। क्रांति के दौरान चिकित्सा सेवा के कारण उन्होंने लाहिजान की जनता के मध्य बहुत अधिक लोकप्रियता प्राप्त कर ली थी। उन्होंने राष्ट्रीय व्यवस्था के नाम से सैकड़ों लोगों पर आधारित एक गुट बनाया और वर्षों तक संघर्ष करते रहे। अंततः तत्कालीन सरकार के सैनिकों ने उनको निमंत्रण दिया और पवित्र क़ुरआन की जिल्द पर उनके लिए शरण पत्र लिखा। उन्होंने शरण पत्र पर विश्वास करते हुए अपने 270 साथियों के साथ आत्मसर्पण कर दिया किन्तु सैनिकों ने उनके साथ विश्वासघात किया और उनपर मुक़द्दमा चलाया गया। अंततः उन्हें फांसी की सज़ा सुनाई गयी। उनको रश्त नगर में फांसी दी गयी और वहीं दफ़्न किया गया।
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16 रमज़ान सन 727 हिजरी क़मरी को दमिश्क़ के प्रसिद्ध धर्मगुरु इतिहासकार व साहित्यकार इब्ने ज़मलकानी का निधन हुआ। वे बीस वर्ष की आयु में मुजतहिद अर्थात क़ुरआन, हदीस तथा इस्लामी नियमों के विशेषज्ञ बन गए। वे न्यायाधीश के पद पर भी आसीन रहे किंतु उस समय भी वह ज्ञान हासिल करते और स्कूलों में पढ़ाते रहे। उन्होंने दमिश्क़ के बहुत से स्कूलों में पढ़ाया। उन्होंने कई किताबें लिखीं जिसमें अलबुर्हानुल काशिफ़ अन एजज़िल क़ुरआन उल्लेखनीय है।
16 रमज़ान सन 845 हिजरी क़मरी को मुसलमान इतिहासकार व विद्वान तक़ीयुददीन अबुल अब्बास मुक़रीज़ी का निधन हुआ। वे मिस्र के क़ाहेरा नगर में पैदा हुए। उन्होंने शिक्षा प्राप्ति के लिए विभिन्न देशों की यात्रा की वह क़ाहेरा में कुछ समय तक न्यायधीष भी रहे। उन्होंने इतिहास के विषय में कई पुस्तकें लिखीं। उनकी मशहूर किताब का नाम अस्सुलूक लेमअफ़तिल मुलूक है। यह किताब मिस्र के इतिहास के बारे में है।