गुरुवार- 14 मई
14 मई सन 1575 ईसवी को अंगोला देश पुर्तगाली साम्राज्यवादियों के अधिकार में चला गया।
पुर्तगाल के क़बज़े से पहले तक यह क्षेत्र गिनी देश का एक भाग था किंतु पुर्तगालियों के अधिकार में अंगोला के समस्त तटवर्ती क्षेत्रों में व्यापारिक केन्द्र बना दिए गए। पुर्तगालियों ने चार सौ वर्ष तक इस देश को लूटा और वहॉ आतंक फैलाए रखा। द्वितीय विश्न युद्ध की समाप्ति के बाद अंगोला में स्वतंत्रता की लहार उठी। बहुत से आंदोलन आरंभ हो गये तथा यह देश सन 1975 में स्वतंत्र हो गया। अंगोला का क्षेत्रफल 12 लाख वर्ग किलोमीटर है। यह देश कॉगो जांबिया और नामीबिया के पड़ोस में स्थिता है।
- 14 मई सन् 1610 में फ्रांस में हेनरी IV की हत्या और लुईस XIII फ्रांस की गद्दी पर बैठा।
- 14 मई सन् 1702 में इंग्लैंड और नीदरलैंड ने फ्रांस और स्पेन के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा की।
- 14 मई सन् 1811 में पराग्वे स्पेन की पराधीनता से मुक्त हुआ।
- 14 मई सन् 1878 में पहली बार वैसलीन नाम को राबर्ट ए चेस ब्राफ़ ने पंजीकृत करवाया था।
- 14 मई सन् 1908 में पहली बार किसी व्यक्ति ने हवाई जहाज़ में उड़ान भरी।
- 14 मई सन् 1939 में लीना मदीना पांच साल की उम्र में चिकित्सा इतिहास में सबसे छोटी पुष्टि मां बन गईं।
- 14 मई सन् 1940 में द्वितीय विश्व युद्ध: नीदरलैंड की लड़ाई ने नीदरलैंड के साथ जर्मनी को आत्मसमर्पण कर दिया।
- 14 मई सन् 1944 में ब्रिटिश सैनिकों ने कोहिमा पर कब्ज़ा किया।
- 14 मई सन् 1963 में कुवैत संयुक्त राष्ट्र का 111वां सदस्य बना।
- 14 मई सन् 1981 में नासा ने स्पेश व्हिकल S-192 लांच किया.
- 14 मई सन् 2012 में ज़ायोनी शासन की जेलों में बंद 1500 फिलीस्तीनी कैदी भूख हड़ताल समाप्त करने पर सहमत हुए।
- 14 मई सन् 2013 में ब्राज़ील समलैंगिक विवाह को मान्यता देने वाला 15वां देश बना।
14 मई सन 1811 ईसवी को प्राग्वे को स्वतंत्रता मिली और इस देश में प्रजातांत्रिक शासन की स्थापना हुई। सोलहवीं ईसवी शताब्दी में स्पेन के एक खोजकर्ता ने इस क्षेत्र का पता लगाया और दो शताब्दियों तक यह देश स्पेन के अधिकार में रहा। स्वतंत्रता पाने के बाद प्राग्वे में एक अत्याचारी शासन की स्थापना हुई और आंतरिक समस्यों के चलते इस देश में कई दिद्रोह हुए और हर विद्रोह के बाद पहले से अधिक अत्याचारी शासक ने सत्ता पर क़ब्ज़ा किया। सन 1989 ईसवी में पहली बार प्राग्वे में स्वंतत्र राष्ट्रपति चुनाव आयोजित हुए और सरकार में जनता की भागीदारी बढ़ी। यह देश लैटिन अमेरिका में बोलिवीया ब्राज़ील और अर्जेटाइना के पड़ोस में स्थित है।

14 मई सन 1948 ईसवी को जायोनी विचारधारा के मुख्य नेता डेविड बिन गोरियन ने फ़िलिस्तीन देश के आधे भाग पर ज़ायोनी शासन के गठन की घोषणा की। गोरियन और दूसरे चरमपंथी यहूदी नेताओं ने फ़िलिस्तीन में यहूदियों के आतंकवादी संगठन बनाए और इस प्रकार ज़ायोनी शासन की नींव रखी गई। इससे पहले तक फ़िलिस्तीन में यहूदी, ईसाइयों और मुसलमानों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे थे। वर्ष 1917 ईसवी में प्रथम विश्न युद्ध के दौरान उसमानी शासन के टूट जाने के बाद ब्रिटेन के सैनिकों ने फ़िलिस्तीन पर अधिकार कर लिया। इसके पांच वर्ष बाद लीग ऑफ़ नेशन्ज़ ने ब्रिटेन के दबाव में आकर फ़िलिस्तीन में ज़ायोनी शासन की स्थापना को स्वीकार कर लिया। उसके बाद ज़ायोनी संगठनों ने अपने विस्तारवादी लक्ष्यों के अंतर्गत विश्व भर से यहूदियों को पलायन द्वारा फ़िलिस्तीन पहुंचाया और साथ ही आतकवादी कार्यवाहियों द्वारा फ़िलिस्तिनयों को अपनी मातृभूमि छोड़ने पर विवश किया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यहूदियों ने दसियों लाख यहूदियों को जला कर मार दिए जाने का मिथक प्रस्तुत करके विश्व जनमत की सहानुभूति प्राप्त की। सन 1947 ईसवी में संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक प्रसताव पारित किया जिसमें फ़िलिस्तीन में यहूदी और अरब दो देश बनाए जाने तथा बैतुल मुक़द्दस को अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र घोषित किए जाने की बात कहा गई थी। ज़ायोनी शासन ने उक्त प्रस्ताव सहित समस्त अंतर्राष्ट्रीय समझौतों और क़ानूनों की अवहेलना करते हुए फ़िलिस्तीन के अस्सी प्रतिशत भाग पर अधिकार कर लिया जबकि फ़िलिस्तीन में यहूदियों की संख्या एक तिहाई से भी कम है।

14 मई वर्ष 1796 ईसवी को चेचक के टीके का पहला परिक्षण किया गया। चेचक की महामारी बहुत पुरानी है। कहा जाता है कि महामारी के रूप में इसका आरंभ सन 544 से हुआ। 569 ईसवी में यह महामारी क़ुस्तुनतुनिया पहुंची और दसवीं शताब्दी ईसवी तक एशिया के समस्त देशों में फैल गयी और चिकित्सक इसका उपचार नहीं कर पा रहे थे। अट्ठारहवीं शताब्दी में यूरोप में यह महामारी बड़ी तेज़ी से फैली और एक साधारण अनुमान के अनुसार सौ वर्षों में लगभग छह करोड़ लोग इसकी भेंट चढ़ गये। इसी दौरान साक्ष्यों से यह पता चला कि यदि किसी व्यक्ति के एक बार चेचक निकल आये तो फिर वह इस महामारी से सदैव के लिए सुरक्षित हो जाता है। ब्रिटिश चिकित्सक एडवर्ड जेनर को आरंभ से ही चेचक की रोक थाम में रुचि थी और यह सारे साक्ष्य और परिक्षण इसीके दृष्टिगत थे, अंततः इस ब्रिटिश चिकित्सक ने गाय की चेचक के द्रव लेकर एक वर्ष के स्वस्थ्य बच्चे जेम्स फ़िप्स के शरीर में उसे इन्जेक्ट कर दिया। यह एतिहासिक परिक्षण उन्होंने 14 मई वर्ष 1796 को किया। दो महीने बाद उसने उक्त बच्चे को पुनः चेचक का टीका लगाया किन्तु इस पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। जेम्स ने अपने परिक्षण को प्रकाशित किया तो कुछ लोगों ने उनका विरोध किया किन्तु अधिकतर लोगों ने उन्हें सराहा और अंततः ब्रिटिश सरकार ने उन्हें नाइट की उपाधि दी और कई देशों ने उन्हें विभिन्न सम्मान दिए।

***
20 रमज़ान वर्ष 542 हिजरी क़मरी को इब्ने शजरी का सर्वगवास हुआ। इब्ने शजरी लेरवक कवि और व्याकरण विशेषज्ञ थे। वे पैग़म्बरे इस्लाम सल्लललाहो अलैहि व आलेही व सल्लम के नाती इमाम हसन अलैहिस्सलाम के वंश से थे। उन्होंने 70 वर्षों तक लोगों को अरबी व्याकरण की शिक्षा दी। इब्ने शजरी ने अनेक पुस्तकें लिखीं जिनमें अलअमाली अल हमासा और मनजूमा-ए- इब्ने शजरी भी सम्मिलित हैं।
20 रमज़ान सन 8 हिजरी क़मरी को इस्लामी सेना ने मक्का नगर पर विजय प्राप्त की। पैग़म्बरे इस्लाम ने यह कार्रवाई नास्तिकों द्वारा हुदैबिया नामक दोनों पक्षों के बीच हुई संधि के उल्लंघन के बाद की। उस संधि पर वर्ष 6 हिजरी क़मरी में मुसलमानों और नास्तिकों के बीच हस्ताक्ष हुए थे। मक्का पर विजय के बाद पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम ने इस नगर के निवासियों को जो इस्लाम के प्रचार में रुकावट बनते रहे थे क्षमा कर दिया। पैग़म्बरे इस्लाम के इस व्यवहार से प्रभावित होकर इस नगर के लोग मुसलमान हो गये। इस विजय के अवसर पर क़ुरआन का सूरए नस्र ईश्वर ने उतारा।