May १७, २०१६ ११:५१ Asia/Kolkata

हमने बताया कि निज़ामी गंजवी का जन्म वर्ष 1135 से 1145 ईसवी के बीच ईरान के गंजे नामक शहर में हुआ और 70 साल बाद इसी शहर में उन्होंने इस संसार से विदा ली।

 इसी प्रकार हमने यह भी बताया कि गंजवी अपने काल के सभी प्रचलित ज्ञानों से अवगत थे और धन संपन्न होने के कारण उन्हें कोई काम करने या शायरी के माध्यम से आजीवीका चलाने की ज़रूरत नहीं थी। यही कारण था कि उन्होंने परिवार से दूर रह कर शिक्षा अर्जित की और क़ुरआने मजीद की व्याख्या, हदीस के ज्ञान, दर्शनशास्त्र और आत्ज्ञान इत्यादि की शिक्षा ली।

निज़ामी गंजवी को बारहवीं शताब्दी ईसवी में साहित्य के मैदान के अग्रणी लोगों में माना जाता है। उन्होंने फ़ारसी काव्य की भाषा और ढांचे में जो परिवर्तन किए उनसे कोई भी साहित्यकार व विद्वान अनभिज्ञ नहीं है। वे उन गिने-चुने शायरों में से हैं जो नवीनता की कड़े पक्षधर थे। निज़ामी नए नए शब्द गढ़ने और दो या अधिक शब्दों को मिला कर कोई नया शब्द बनाने में विशेष दक्षता रखते थे। पद्य में नए नए विचार पेश करने और ग़ज़ल व शौर्य गाथा को मिश्रित करने के कारण, निज़ामी ईरान में साहित्य के अमर लोगों में शामिल हो गए हैं। उनकी कविताओं में विचारों की नज़ाकत और भाषा की सरलता हर पढ़ने वाले का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है। यही कारण है कि उनकी रचनाओं को आम लोग भी बड़ी सरलता से समझ लेते हैं और इस बात ने शताब्दियों से बड़े-बड़े साहित्यकारों को आश्चर्य चकित कर रखा है।

निज़ामी गंजवी साहित्य के अलावा अपने काल के चिकित्सा, संगीत, ज्योतिष व अन्य विज्ञानों से भी अवगत थे और इन सबसे अपनी कविताओं में लाभ उठाते थे। इस आधार पर उनकी काव्य रचनाओं को 11वीं और 12वीं शताब्दी ईसवी में ईरान की संस्कृति का एक संपूर्ण दर्पण कहा जा सकता है। इसी प्रकार उन्होंने अपनी कविताओं में मुहावरों का बड़ा सुंदर उपयोग किया है और दसियों धार्मिक व राष्ट्रीय कथाओं का सांकेतिक रूप से उल्लेख किया है।

भाषा की दृष्टि से जो चीज़ निज़ामी गंजवी के शेरों में सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करती है वह शब्दों का सटीक व सुंदर चयन व उन्हें एक दूसरे से मिश्रित करने की उनकी अद्भुत क्षमता है। उनके शरों में शब्दों का चयन अत्यंत लक्ष्यपूर्ण होता है और भाषा के ढांचे को संवारने में उनकी क्षमता के अनुसार उन्हें चुना जाता है। लोगों के बीच निज़ामी के शेरों के प्रचलन का एक बड़ा कारण उनकी सादगी और धाराप्रवाह होना है। यह विशेषता उनकी सभी रचनाओं में दिखाई पड़ती है। इसी तरह क़ुरआने मजीद की शिक्षाएं भी निज़ामी के शेरों में अनेक स्थानों पर दिखाई पड़ती हैं। जब भी उन्हें अवसर मिलता है वे ईश्वरीय शिक्षाओं को शेरों का सुंदर वस्त्र पहना देते हैं।

निज़ामी गंजवी के शेर शाब्दिक और आर्थिक दोनों रूपों में कला के शिखर पर दिखाई देते हैं। वे हमेशा सर्वोत्तम कथन के चयन के लिए प्रयासरत रहते थे। अच्छे कथन को सुदंर शब्दों के ढांचे और मज़बूत विचारों व ज्ञान के साथ प्रस्तुत करने के कारण उनके शेर अत्यंत परिपूर्ण हो गए हैं। वे शेर शायरी में अनुठे विचारों व अद्भुत शब्दों के प्रयोग को बहुत अधिक महत्व देते थे और इसके लिए कवि का अपने आस पास और संसार में घटने वाली घटनाओं से गहराई से अवगत होना ज़रूरी है। निज़ामी के शरों पर एक दृष्टि डाल कर बड़ी सरलता से समझा जा सकता है कि उन्होंने नए विचारों के लिए अथक मेहनत की और इसमें सफल भी रहे। उन्होंने घिसे-पिटे विचारों से दूरी अपनाई और अपने शेरों में नए नए विचार पेश किए।

निज़ामी ने अपने शेरों के चित्रण के लिए जिन शैलियों व माध्यमों का प्रयोग किया है वे वही हैं जो उनसे पहले के कवियों ने इस्तेमाल किए थे लेकिन वे उन्हें एक नया रंग देने में सफल रहे। सैद्धांतिक रूप से शेर में चित्रण के लिए उपमाओं और रूपकों का प्रयोग किया जाता है और इस प्रकार कल्पनाओं के माध्यम से वास्तविकता का चित्रण किया जाता है। निज़ामी ने इन्हीं माध्यमों का प्रयोग करके अपने शेरों को बड़ी मनमोहकता प्रदान कर दी है और उनके शेरों में बड़ा अनूठापन आ गया है।

निज़ामी ने जिन विषयों का वर्णन किया है उन्हें बड़ी सहजता से महसूस किया और समझा जा सकता है। वे प्रायः विभिन्न विषयों का बड़ी गहराई और सटीकता से चित्रण करते थे। निज़ामी की रचनाओं के अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि वसंत, पतझड़ और रात इत्यादि जैसे प्राकृतिक विषयों के बारे में उनका चित्रण अद्वीतीय व अति सुंदर है। लोगों या प्राकृतिक वस्तुओं के चित्रण में उनकी क्षमता ऐसी थी कि समकालीन साहित्यकार ग़ुलाम हुसैन यूसुफ़ी का कहना है कि वे अत्यंत कुरूप दृश्यों का भी सुंदरता से चित्रण करने में सफल रहे है। दृश्यांकन में निज़ामी गंजवी की क्षमता आश्चर्यचकित करने वाली है। उदाहरण स्वरूप उन्होंने हफ़्त पैकर नामक अपनी कविता में बहराम के ख़ज़ाने और ड्रेगन की कहानी का इतना सटीक चित्रण किया है कि पढ़ना वाला एक पल के लिए यह समझ बैठता है कि उसके सामने एक चलचित्र है।

प्रकृति की निर्जीव वस्तुओं को साकार करना निज़ामी की कला की विशेषताओं में से एक है जिसने उनके शेरों के चित्रण को शक्ति प्रदान की है। वे इस शैली का प्रयोग करके आत्मा व जीवन रहित ब्रह्मांड को बुद्धि युक्त दर्शाते हैं और पढ़ने वाले को, पूर्ण रूप से काल्पनिक कहानियों में भी एक जीवित, बोलने वाले व गतिशील संसार की सैर कराते हैं। निज़ामी ने अपनी मज़बूत विचार शक्ति के सहारे, निर्जीव वस्तुओं को भी जीवन प्रदान किया। एक कविता में उन्होंने पतझड़ की हवा का बड़ी सुंदरता से चित्रण किया है और उसे एक डकैत के समान बताया है जो लूट मार करती है और फूल पत्तों को मानवीय चरित्र के रूप में दर्शाया है जिन्हें लूटा जा रहा है। इसी तरह हफ़्त पैकर की एक कहानी में हवा और बादल सेवक के रूप में उपस्थित होते हैं और बाग़ में झाड़ू लगाते हैं और कहानी के अन्य चरित्रों की तरह अपनी भूमिका निभाते हैं।

ईरान के प्रख्यात साहित्यकार डाक्टर अब्दुल हुसैन ज़र्रीनकूब ने अपनी एक किताब में निज़ामी गंजवी के विचारों व शेरों की समीक्षा की है और उनकी कला पर विस्तार से टिप्पणी की है। उनका कहना है कि उनके शेरों में चित्रण काफ़ी विस्तृत और विभिन्न रंग लिए हुए है। कहानी के चरित्रों की मानसिक स्थिति और भावनाओं जैसे भय, अकेलापन, पीड़ा, विरह और उत्साह के चित्रण में उनकी क्षमता अद्वितीय है और लैला मजनूं व शीरीं फ़रहाद जैसे कई बार पढ़े जा चुक चरित्र भी उनके शेरों में चित्रण के कारण बार बार पढ़ने वाले को मोहित कर लेते हैं।