May १८, २०१६ ०६:५० Asia/Kolkata

19 मई सन 1954 भारत सरकार ने नेशनल फिल्म बोर्ड बनाया।

  • 19 मई सन 1904 में भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति और भारत में आधुनिक तकनीक के जनक  कहे जाने वाले टाटा समूह संस्थापक जमशेदजी टाटा का फ्रांस में देहान्त हो गया।
  • 19 मई सन 1954 भारत सरकार ने नेशनल फिल्म बोर्ड बनाया।
  • 19 मई सन 1971 को भारतीय नौसेना का पहला  पनडुब्बी स्टेशन ने , विशाखापट्टनम में काम शुरु किया।
  • 19 मई सन 1950 को मिस्र ने स्वेज नहर इस्राईल के लिए बंद कर दी
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19 मई सन 1521 ईसवी को उसमानी सेना ने भयानक लड़ाई के बाद बालकान प्रायद्वीप में योगोस्लाविया की राजधानी बेलग्राड पर अधिकार किया। 

उसमानी सेनाओं ने 14वी ईसवी शताब्दी के अंतिम वर्षो से बालकान में आगे बढ़ना आरंभ किया और लगभग इस पूरे क्षेत्र पर अधिकार कर लिया। इन सेनाओं ने उक्त सफलता के 20 वर्ष बाद 1541 ईसवी में हंग्री के कुछ भागों पर भी कब्जा कर लिया किंतु बाद में धीरे - धीरे उसमानी शासन की शक्ति क्षीण होती गयी तथा योरोपीय सरकारें शक्तिशाली होती गयीं और 20वीं ईसवी शताब्दी के आरंभ में बालकान में उसमानी शासन के अधिकार वाले क्षेत्र एक एक करके स्वतंत्र हो गये।

 

19 मई सन 1762 ईसवी को जर्मनी के दर्शनशास्त्री यूहन गोडलीब फीख़्ते का एक निर्धन परिवार में जन्म हुआ। फीख़्ते अपने ही देश के विख्यात दार्शनिक कैंट से परिचित हुए और कुछ समय बाद अपनी एक रचना उनको पेश की वे कैंट के दृष्टिकोण से प्रभावित थे। उन्होने कई पुस्तकें लिखीं जिनमें कुछ के नामों का अनुवाद है ज्ञान में अनुसंधान का आधार, प्राकृतिक अधिकार, मनुष्य का भविष्य। सन 1814 ईसवी में उनका निधन हुआ।

 

19 मई सन 1935 ईसवी को ब्रिटेन के राजनीतिज्ञ और जासूस थॉमस एडवर्ड लारेन्स की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गयी। उसका जन्म सन 1888 में हुआ। लारेन्स 1910 से 1914 के बीच पुरातत्व विशेषज्ञों के दल के एक सदस्य के रूप में इराक सीरिया और फिलिस्तीन में सक्रिय रहा लारेन्स ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय का कर्मचारी भी था और 1916 में उसने मिस्र में ब्रिटेन की सैनिक गुप्तचर सेवा के कार्यालय के लिए काम किया। उस समय ब्रिटेन अरबों को उसमानी शासन के विद्रोह के लिय प्रेरित करने में लगा हुआ था। लारेन्स ने ब्रिटेन की इस योजना के कार्यान्वयन में प्रभावी भूमिका निभाई उसने अरबों को विश्वास में लेकर उसमानी शासन के विरूद्ध एक अरब सेना बनाना भी आरंभ की लारेन्स ने उसमानी शासन के अधीन क्षेत्रों को आपस में बॉट लेने की फ्रांस और ब्रिटेन की योजना में भी महत्वपूर्ण काम किया तथा सीरिया में मलिक फ़ैसल जार्डन में मलिक अब्दुल्ला ओर सऊदी अरब में मलिक अब्दुल अज़ीज़ को स्त्ता में पहुंचाने में उसका बड़ा हाथ था। उसने प्रथम विश्व युद्ध के काल के अपने कारनामों को एक पुस्तक में लिखा है।

 

 

19 मई सन 1936 ईसवी को ब्रिटेन के अविष्कारक रॉबर्ट डेटसन वाट ने रडार बनाया और यह मशीन सबसे पहले ब्रिटेन के हवाई अडडे पर स्थापित की गयी। इसके द्वारा बहुत सी सैनिक एवं असैनिक गतिविधियों का पता लगाया जाता है। इस समय इसका प्रयोग बहुत विविध और व्यापक हो गया है।

 

 

19 मई वर्ष 1989 ईसवी को बैतुल मुक़द्दस के अतिग्रहणकारी शासन के हाथों फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास के नेता स्वर्गीय शैख़ अहमद यासीन को ज़ायोनी विरोधी योजना बनाने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया। वह 1938 में अवैध अतिग्रहित फ़िलिस्तीन के पश्चिम में जन्मे थे। उन्होंने इख़वानुल मुसलेमीन संगठन से जुड़ने के बाद ज़ायोनियों के विरुद्ध प्रयास आरंभ किए इसीलिए वर्ष 1983 में फ़िलिस्तीनियों को ज़ायोनी शासन  के विरुद्ध खड़ा करने के आरोप में उनको इससे पूर्व भी गिरफ़्तार किया जा चुका था किन्तु दो वर्ष के बाद ज़ायोनियों के होने वाले बंदियों के आदान प्रदान के समझौते में स्वतंत्र कर दिए गये। शैख़ अहमद यासीन ने सन 1987 में पीएलओ की ओर से ज़ायोनी शासन के विरुद्ध संघर्ष रोक दिए जाने के बाद हमास की स्थापना की और उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण सन 1989 में उनको एक बार फिर गिरफ़्तार कर लिया गया जिसके नौ वर्ष के बाद वे स्वतंत्र हुए। ज़ायोनी जेलों में उन्होंने इस नौ वर्ष के दौरान बहुत अधिक यातनाएं झेलीं और इसके बावजूद स्वतंत्रता के बाद भी राजनैतिक गतिविधियां जारी रखीं और अंततः इसी मार्ग में फ़िलिस्तीन का यह महान नेता ज़ायोनियों के पाश्विक आक्रमण का निशान बनकर शहीद हो गया।

 

19 मई वर्ष 1898 ईसवी को ब्रिटेन के प्रसिद्ध राजनेता विलियम ग्लेडस्टोन का निधन हुआ वह 1809 ईसवी में जन्मे थे और 24 वर्ष की आयु में ब्रिटेन के सांसद बने। सन 1843 ईसवी में पहली बार ब्रिटेन के मंत्रीमंडल में शामिल हुए। विलियम ग्लेडस्टोन चार बार ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 1868 ईसवी से सन 1894 ईसवी तक इस पद पर रहते हुए देश के विकास और प्रगति के लिए विभिन्न सुधार कार्यक्रमों पर कार्य किए। ग्लेडस्टोन एक शक्तिशाली वक्ता थे। ब्रिटेन की संसद में उनके भाषण प्रसिद्ध हैं। ग्लेडस्टोन ने ही पवित्र क़ुरआन मजीद और काबे के वैभव से प्रभावित होकर संसद में यह स्वीकार किया था कि जब तक यह दोनों चीज़ें मुसलमानों के मध्य मौजूद है उनको पराजित नहीं कर सकते।

19 मई वर्ष 1890 ईसवी को वियतनाम के प्रसिद्ध क्रांतिकारी नेता हूची मिनू का जन्म हुआ। उन्होंने अपनी शिक्षा मास्को में पूरी की और वहीं से अपने दृष्टिकोणों से गहरा लगाव रखने वाले कम्यूनिस्ट क्रांतिकारी बन गये। स्वदेश वापसी के बाद फ़्रांसीसी साम्राज्यवादियों के विरुद्ध वियतनाम कम्यूनिस्ट पार्टी के गठन में भाग लिया। हूची मिनू ने द्वितीय विश्व युद्ध के समापन के बाद वियतनाम गणतंत्र की स्वतंत्रता की घोषणा की किन्तु फ़्रांस ने उन्हें स्वतंत्र करने से इन्कार कर दिया जिसके परिणाम स्वरूप दोनों देशों को एक दीर्घावधि युद्ध का सामना करना पड़ा और वियतनाम उत्तरी और दक्षिणी भाग में बट गया। युद्ध के दौरान उत्तरी वियतनाम का नेतृत्व हूची मिनू के हाथ में था किन्तु वे अंतिम जीत तक जीवित नहीं रह सके किन्तु 30 अप्रैल सन 1975 ईसवी को दोनों भागों के एक होने पर दक्षिणी वियतनाम के सायगॉन नगर का नाम हूची मिनू सिटी रख दिया गया। हूची मिनू राजनेता और जरनल होने के साथ साथ एक अच्छे शायर और साहित्यकार भी थे। उनका देहान्त 3 सितम्बर वर्ष 1969 को हुआ।

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25 रमज़ान सन 541 हिजरी क़मरी को प्रसिद्ध हदीसों के ज्ञानी व पवित्र क़ुरआन के व्याख्याकर्ता इब्ने अतीया का स्वर्गवास हो गया। उनका इन्डोलूसिया में ऐसे परिवार में पालन पोषण हुआ जिसके समस्त लोग ज्ञान व साहित्य में प्रसिद्ध थे। यद्यपि इब्ने अतीया एक व्याख्याकर्ता और हदीस के ज्ञानी के रूप में प्रसिद्ध हुए किन्तु उनकी जीवनी लिखने वाले बहुत से लोगों ने उन्हें धर्म शास्त्र, उसूले फ़िक़्ह और साहित्य में दक्ष बताया है।

उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं जिनमें पवित्र क़ुरआन की व्याख्या भी शामिल है। इस व्याख्या में एक भूमिका है जो पवित्र क़ुरआन के ज्ञान में अद्वितीय है। उनकी एक अन्य पुस्तक अलबरनामज है।

 

25 रमज़ान सन 544 हिजरी क़मरी को प्रसिद्ध बुद्धिजीवी और चिकित्सक इमाम फ़ख़्रे राज़ी का वर्तमान तेहरान के निकट शहरे रय में जन्म हुआ। वे इब्नुल ख़तीब की उपाधि से प्रसिद्ध थे। उन्होंने अपने समय के प्रथलित समस्त ज्ञानों में दक्षता प्राप्त की और विभिन्न मुद्दों पर बहुत अधिक शोध किए। वे इसी प्रकार वादशास्त्र में अपने समय में सबसे प्रसिद्ध थे। विभिन्न ज्ञानों में दक्षता के कारण उन्होंने विभिन्न पुस्तकों पर टिप्पणी की और बहुत सी पुस्तकों की समीक्षा की। उन्होंने कई महत्त्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं जिनमें तिब्बुल कबीर, असरारुत्तनज़ील और मफ़ातेहुल ग़ैब का नाम लिया जा सकता है। इसी प्रकार इमाम फ़ख़्रे राज़ी ने अपने समय में प्रचलित ज्ञान पर दायरतुल मआरिफ़ नामक पुस्तक लिखी जो जामेउल उलूम के नाम से प्रसिद्ध है।

 

25 रमज़ान सन 1137 हिजरी क़मरी को बाहरवीं शताब्दी के प्रसिद्ध ईरानी बुद्धिजीवी फ़ाज़िले हिंदी का स्वर्गवास हुआ। उनका पूरा नाम बहाउद्दीन मुहम्मद बिन ताजुद्दीन इस्फ़हानी था। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय भारत में व्यतीत किया इसी लिए वे हिन्दी के नाम से प्रसिद्ध हुए। वे धर्मशास्त्र के गुरू थे और उन्होंने बहुत सी पुस्तकें लिखी हैं जिनमें पवित्र क़ुरआन की व्याख्या और प्रसिद्ध बुद्धिजीवी अबू अली सीना की शिफ़ा नामक पुस्तक का संक्षेप जिसे तलख़ीसे शिफ़ा का नाम दिया गया है, शामिल हैं।