बुधवार - 22 जुलाई
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यूहन सिबैस्टियन बाख़
22 जुलाई सन 1750 ईसवी को आज के दिन जर्मनी के संगीतकार यूहन सिबैस्टियन बाख़ का 65 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
- 22 जुलाई सन 1775 को जॉर्ज वॉशिंगटन ने अमरीकी सेना की कमान संभाली। वे अमरीका के पहले राष्ट्रपति थे।
- 22 जुलाई सन 1933 को भारतीय स्वाधीनता संग्राम के प्रमुख नायकों में से एक यतीन्द्र मोहन सेन गुप्त का निधन हुआ था।
- 22 जुलाई सन 1947 को भारत का राष्ट्रीय ध्वज इस देश के संविधान द्वारा अपनाया गया।
- 22 जुलाई सन 1968 को भारत की प्रसिद्ध महिला चिकित्सक, सामाजिक कार्यकर्ता और पद्म भूषण प्राप्तकर्ता मुत्तू लक्ष्मी रेड्डी का निधन हुआ।
- 22 जुलाई सन 1999 को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा समान कार्य के लिए समान पारिश्रमिक की कार्य योजना लागू की गई।
22 जुलाई सन 1750 ईसवी को आज के दिन जर्मनी के संगीतकार यूहन सिबैस्टियन बाख़ का 65 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने बचपन से ही संगीत की शिक्षा आरंभ की और बहुत कम समय में अपने कौशल का प्रदर्शन किया। बाख़ को धर्म से गहरा लगाव था जिसकी झलक उनके संगीत में देखी जा सकती है। यही कारण है कि 18वीं शताब्दी में उनको धार्मिक संगीतकार के रुप में ख्याति मिली।
22 जुलाई सन 1915 ईसवी को आज के दिन प्रथन विश्व युद्ध के दौरान इटली के पहाड़ी क्षेत्र इज़ोन्ज़ो में इटली और ऑस्ट्रिया की सेना के मध्य भयानक युद्ध हुआ। इस युद्ध में इटली की सेना ने, जो संयुक्त देशों की पंक्ति में शामिल थी, जर्मनी के घटक ऑस्ट्रिया की सेना से युद्ध किया। यह लड़ाई वर्ष 1915 के अगस्त महीने की 15 तारीख़ तक जारी रही। इसमें 70 हज़ार लोग मारे गए जिनमें अधिकतर इतलवी थे किंतु इज़ोन्ज़ो युद्ध में ऑस्ट्रिया को पराजय हुई।

22 जुलाई सन 1961 ईसवी को आज के दिन फ़्रांस की सेना ने टयूनीशिया की पूर्वोत्तरी बंदरगाह बिज़र्ट पर आक्रमण किया और दोनों के मध्य भयानक युद्ध आरंभ हो गया। 1956 में टयूनीशिया के स्वतंत्र हो जाने के बाद भी फ़्रांस ने सैनिक छावनी के रूप में इस बंदरगाह को अपने पास ही रखा किंतु टयूनीशिया ने साढ़े सात सौ जियालों का बलिदान देकर इस बंदरगाह को छुड़वा लिया।

22 जूलाई सन 2002 ईसवी को आज के दिन ज़ायोनी सेना ने रात के समय जब फ़िलिस्तीनी गहरी नींद सो रहे थे ग़ज़्ज़ा पटटी पर अमरीका निर्मित एफ़ सोलह युद्धक विमानों से आक्रमण किया। इस आक्रमण में हमास संगठन की सैनिक शाख़ा इज़्जुद्दीन क़स्साम ब्रिगेड के कमांडर शैख़ सलाह शहादह और सोलह फ़िलिस्तीनी शहीद तथा डेढ़ सौ अन्य घायल हो गए। शहीदों में 9 बच्चे भी शामिल थे।

22 जूलाई सन 2003 ईसवी को आज के दिन इराक़ के मूसिल नगर के निकट पूर्व तानाशाह सद्दाम के बेटों उदै और कुसै की हत्या कर दी गई। मार्च सन 2003 में जब अमरीका और ब्रिटेन ने इराक़ पर आक्रमण किया तो उदै, कुसै और इराक़ के सभी वरिष्ठ अधिकारी बग़दाद से भाग निकले किंतु इन दोनों के गुप्त ठिकाने का सुराग़ लगाकर अमरीकी सेना ने उस पर आक्रमण किया जिसमें दोनों भाई मारे गए। इराक़ी जनता के जनसंहार की सभी घटनाओं में यह दोनों अपने पिता सद्दाम के सहयोगी थे।

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पहली ज़िल्हिज्जा सन दो हिजरी क़मरी को हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा और हज़रत अली अलैहिस्सलाम का विवाह हुआ। हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स) पैग़म्बरे इस्लाम की सुपुत्री थीं जो अपने समय की सबसे महान व गुणवान महिला थीं। उस समय के प्रतिष्ठित मुसलमान उनसे विवाह करना चाहते थे किन्तु पैग़म्बरे इस्लाम का कहना था कि हज़रत फ़ातेमा के विवाह का फ़ैसला ईश्वर के हाथ में है।
अंतत: हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने पैग़म्बरे इस्लाम से उनकी बेटी पुत्री से विवाह की इच्छा प्रकट की और पैग़म्बरे इस्लाम ने हज़रत फ़ातेमा से परामर्श करने के बाद सहमति जता दी। उसके बाद आज ही के दिन हज़रत फ़ातेमा और हज़रत अली पवित्र बंधन में बंध गये। विवाह के बाद दोनों उदाहरणीय हस्तियों ने प्रेम, स्नेह व आध्यात्म से भरा साधारण जीवन व्यतीत करना आरंभ किया। इस प्रेम भरे वातावरण में हज़रत इमाम हसन, हज़रत हुसैन और हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा का पालन पोषण हुआ।