शुक्रवार- 31 जुलाई
31 जुलाई सन 1498 को क्रिस्टोफ़र कोलम्बस अपनी तीसरी यात्रा के दौरान 1498 में त्रिनिदाद द्वीप पर पहुंचे।
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31 जुलाई सन 1713 ईसवी को फ़्रांसीसी के गणितज्ञ एलेक्सी क्लेरो का पेरिस में जन्म हुआ।
- 31 जुलाई सन 1880 को प्रसिद्ध हिंदी कहानिकार और उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद का जन्म हुआ। गोदान, कफ़न, पूस की रात और बड़े घर की बेटी उनके मशहूर उपन्यास हैं।
- 31 जुलाई सन 1932 को इतावली रेसिंग कार ड्राइवर एंजो आन्सेल्मो फ़ेरारी ने ग्रां प्री से सन्यास लिया। इन्होंने अपने नाम पर फ़ेरारी कारों का निर्माण शुरू किया।
- 31 जुलाई सन 1980 को हिंदी फिल्मों के मशहूर पार्श्व गायक मुहम्मद रफ़ी का निधन हुआ।
- 31 जुलाई सन 1982 को सोवियत संघ ने परमाणु परीक्षण किया।
31 जुलाई सन 1713 ईसवी को फ़्रांस के गणितज्ञ एलेक्सी क्लेरो का पेरिस में जन्म हुआ। उनके पिता गणित के शिक्षक थे अत: उन्होंने गणित की आरंभिक शिक्षा अपने पिता से ली। 18 वर्ष की आयु में वे फ़्रांस की विज्ञान एकेडमी के सदस्य बने। क्लेरो का 1765 ईसवी में निधन हो गया। एनालाइज़ा नामक उनकी रचना को विश्व ख्याति प्राप्त है।
31 जुलाई सन 1736 ईसवी को फ़्रांस के भौतिकशास्त्री शार्ल ओगूस्तन कुलोम पैदा हुए। शिक्षा प्राप्ति के बाद वे इलेक्ट्रिसिटी तथा मैगनेट के बारे में शिक्षा देने लगे। उन्होंने इन क्षेत्रों में कई पुस्तकें लिखीं। शिक्षा के साथ ही वे शोधकार्य में भी लगे रहे अंतत: उन्होंने भौतिक शास्त्र का एक नियम बनाया जो कुलोम के नाम से ही जाना जाता है। 70 वर्ष की आयु में कुलोम का निधन हुआ।
31 जुलाई सन 1806 ईसवी को अफ़्रीक़ा महाद्वीप के दक्षिणी भाग में स्थित कैप क्षेत्र पर ब्रिटेन की सेना का अधिकार हो गया। इस प्रकार आफ़्रिक़ा महाद्वीप के दक्षिणी क्षेत्र पर ब्रिटिश साम्राज्यवाद का आरंभ हुआ। यह क्षेत्र अफ़्रीक़ा महाद्वीप के दक्षिणी भाग में सथित है जो हिंद महासागर तथा एटलांटिक महासागर के बीच में है। इस क्षेत्र में सोने और हीरे की खदाने हैं। इसी कारण सदैव ही इस क्षेत्र पर साम्राज्यवादियों की नज़र लगी रही है।

31 जुलाई वर्ष 1880 को भारत के प्रसिद्ध लेखक मुंशी प्रेमचंद का जन्म हुआ। उनका पूरा नाम धनपत राय श्रीवास्तव था और वह हिंदी व उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। उन्हें मुंशी प्रेम चंद व नवाब राय के नाम से भी जाना जाता है। वे उपन्यास सम्राट के नाम से भी प्रसिद्ध थे। इस नाम से सर्वप्रथम उन्हें बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरत चंद्र चट्टोपाध्याय ने संबोधित किया था। प्रेम चंद्र ने हिंदी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिस पर पूरी शतब्दी का साहित्य आगे चल सका। इसने आने वाली एक पूरी पीढ़ी को गहराई तक प्रभावित किया और साहित्य की यथार्थवादी परंपरा का आधार रखा। वे एक सफल लेखक, देशभक्त नागरिक, कुशल वक्ता, ज़िम्मेदार संपादक और संवेदनशील रचनाकार थे। बीसवीं शतब्दी के पूर्वार्द्ध में जब हिन्दी में काम करने की तकनीकी सुविधाएँ नहीं थीं, इतना काम करने वाला लेखक उनके सिवा कोई दूसरा नहीं हुआ। प्रेमचंद के बाद जिन लोगों ने साहित्य को सामाजिक सरोकारों और प्रगतिशील मूल्यों के साथ आगे बढ़ाने का काम किया, उनके साथ प्रेमचंद की दी हुई विरासत और परंपरा ही काम कर रही थी। बाद की तमाम पीढ़ियों, को जिसमें यशपाल से लेकर मुक्तिबोध तक शामिल हैं, प्रेमचंद के रचना-कर्म ने दिशा प्रदान की। 8 अक्तूबर वर्ष 1936 ईसवी को इस महान लेखक का निधन हो गया।
31 जूलाई सन 1886 को हग्री के संगीतकार फ़्रान्ज़ लिस्ट (franz lizt) का निधन हुआ। उन का जन्म 1811 में हुआ। संगीत बनाने में इनकी विशेष रचनातमकता एवं योगयता थी। लीस्ट की प्रसिद्ध संगीत रचनाओं में फाउस्ट सिम्फ़ोनी और हगोरियन रेपसेडी की ओर संकेत किया जा सकता है। इस के अतिरिक्त वे सिमफ़ोनिक पोएम के रचनाकार थे।

31 जुलाई सन 1944 को फ़्रांस के लेखक आन्तवान डोसेन्ट एग्ज़ोपेरी की द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान विमान गिरने से मृत्यु हो गयी। वे सन 1900 में फ़्रांस के लियोन क्षेत्र में पैदा हुए। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वे वायु सेना मे शामिल थे। डाक ले जाना और लाना उनकी ज़िम्मेदारी थी। आज के दिन भी वे अपने इसी काम के लिए उड़े किंतु फिर उनके विमान का कुछ पता न चल सका। उन्हें उनकी रचनाओं के कारण ख्याति मिली। वे खाली समय में लेखन में व्यस्त रहते थे।

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आज 10ज़िलहिज्जा है और के दिन मुसलमान ईदुलअज़हा मनाते हैं। इसे ईदे क़ुरबान और बक़रईद भी कहा जाता है। इस दिन पूरी दुनिया में मुसलमान हज़रत इब्राहीम की याद में क़ुरबानी पेश करते हैं। ईश्वर ने हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की परीक्षा लेने के लिए उन्हें अपने बेटे इस्माईल का गला काटने का आदेश दिया था, जिस पर हज़रत इब्राहीम तैयार हो गये लेकिन आंखों पर पट्टी बांध कर जब वह अपने बेटे का गला काटना चाह रहे थे तो अचानक ईश्वरीय वाणी आयी कि है इब्राहीम तुम परीक्षा में सफल हो गये और फिर एक भेड़ भेजी गयी और कहा गया कि अपने बेटे इस्माईल के बजाए इस भेड़ को ज़िब्ह करें। इसी घटना की याद में ईदुलअज़हा मनायी जाती है।
आज ही के दिन दस ज़िलहिज्जा सन 1436 हिजरी क़मरी में ईदुलअज़हा के अवसर पर सऊदी अरब के शासकों की लापरवाही के कारण हज़ारों हाजी मारे गये। यह दुर्घटना सुबह लगभग नौ बजे घटी जब हाजी शैतानों को कंकरी मारने के संस्कार में भाग लेने के लिए जमरात नामक जगह की ओर बढ़ रहे थे। सऊदी अधिकारियों की लापरवाही के कारण भगदड़ मच गयी जिसमें ईरान के 464 हाजी सहित लगभग सात हज़ार हाजी मारे गये। सऊदी अधिकारियों ने दो सौ पंद्रह और दो सौ तेइस नंबर की सड़कों को बंद कर दिया था और सारे हाजियों को सड़क नंबर दो सौ चार की ओर भेज दिया हालांकि इस सड़क से निकलने वाले सारे रास्ते बंद थे और जब भगदड़ मची और हज़ारों लोग घायल हुए तो घंटों तक सऊदी अधिकारी राहत कार्य शुरु नहीं कर पाए जिससे मरने वालों की संख्या में कई गुना वृद्धि हो गयी। सऊदी शासकों ने इस दुर्घटना की ज़िम्मेदारी स्वीकार करने से इन्कार कर दिया और इस देश के मुफ़्तियों ने इसे ईश्वरीय इच्छा की संज्ञा दी।