Dec २२, २०१५ १७:०३ Asia/Kolkata
  • काश कोई असहिष्णु इस पर भी होता
    काश कोई असहिष्णु इस पर भी होता

सहमी सी हैं तितलियां सभी

सहमी सी हैं तितलियां सभी खौफ में हर परिन्दा हैनकाब इन्सां का चेहरे पे यहांहर शख्स दरिन्दा हैनिर्भया माफ कर देना कि हम बहुत शर्मिन्दा हैबेटीयों घर से निकलना नाकि अभी अफरोज जिन्दा हैकाश "बाल बलात्कारी" की रिहाई के विरोध में भी कोई एक बुद्धिजीवी अपना अवार्ड लौटा देता..- काश कोई असहिष्णु इस पर भी होता..कहाँ गए सारे ?