मुज़्जफ़र हुसैन
कार्यक्रम प्रसारण करनेवाले सभी लोगों को ईद मुबारक।
मेरी उम्र १८ साल है एवं बी ए का छात्र हुं। पिछले कुछ महिनों से मैं आपके सारे कार्यक्रमों को सुन रहा हुं, जो काफी पसंद आते हैं। लाखों लोगों का कातिल अमरिका अपने को विश्व शांती का अग्रदुत बताता है जबकि वह हर साल हजारों लोगों की निर्मम हत्याएं करता है। मध्यपूर्व एशिया हे लोग अपने निकम्मे शासकों की वजह से सम्राज्यवादी शक्तियों के अधीन हो गयें हैं। लेकिन अब वे अपनी स्वतंत्रता पाने के लिए व्यकुल हो गये हैं और इन शक्तियों को उखाड़ फेकने को आतुर दीख रहे हैं बलपुर्वक आन्दोलनों को दबाने के बावजुद वहां बदलाव की उम्मीद की जा सकती है। भविष्य में एक दिन अवश्य ही वहां के लोग अपनी स्वतंत्र सरकारें बनायेगें। लोगों में हरकत आ चुकी है अब बदलाव भी वहां जरुर ही होगा जैसा कि मशहुर शायर अलामा इकबाल कहते हैं। हरकत से जिन्दगी जहां की, यह रस्म क़दीम है यहां की।