बिना सोचे समझे बयानों से बचा जाएः ईरान
ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने बल दिया है कि बिना सोचा समझा बयान, क्षेत्रीय देशों के बीच अधिक से अधिक मतभेद पैदा होने का कारण बन सकता है।
इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता बहराम क़ासिमी ने अरब संघ के विदेशमंत्रियों की बैठक की समाप्ति पर जारी होने वाले बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ईरानी द्वीपों के बारे में पेश किए गये दावों की निंदा की और कहा कि बिना सोचा समझा बयान, क्षेत्रीय देशों के बीच अधिक से अधिक मतभेदा पैदा होने और क्षेत्र के लक्ष्यपूर्ण सहयोग में विलंब का कारण बन सकता है।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने क़ाहिरा में अरब संघ के विदेशमंत्रियों की 146वीं बैठक के घोषणापत्र तथा ईरान के तीनों द्वीपों बू मूसा, तुंबे कूचिक और तुंबू बुज़ुर्ग के बारे में कुवैत और संयुक्त अरब इमारात के प्रतिनिधियों के बयानों को ख़ारिज करते हुए कहा कि इस प्रकार के बयान राजनैतिक लक्ष्यों और इतिहास की सही जानकारी न रखने का परिणाम हैं।
बहराम क़ासिमी ने इसी प्रकार इस बैठक में कुवैत के प्रतिनिधि के ईरान विरोधी आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि एेसा प्रतीत होता है कि इस प्रकार के निराधार आरोपों का दोहराया जाना , वास्तविकता से लोगों को भटकाने के लिए दिया गया है।
दूसरी ओर विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता अर्जेटीना की राजधानी में कई वर्ष हुए आतंकी हमले की निंदा करते हुए इस घटना में ईरानी नागरिकों के लिप्त होने के आरोपों को ईरान के विरुद्ध ज़ायोनी शासन का षड्यंत्र बताया।
बहराम क़ासिमी ने अर्जेटीना की घटना को ईरानी नागरिकों से जोड़ने के बारे में ज़ायोनी शासन के निराधार दावे की निंदा करते हुए कहा कि ज़ायोनी और अर्जेंटीना के शक्तिशाली माफ़िया, इस कार्यवाही के मुख्य दोषियों को सज़ा से बचाने के प्रयास में हैं।
विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अर्जेंटीना में 1994 में यहूदी केन्द्र में होने वाले धमाके के बारे में ज़ायोनियों का लक्ष्य, अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में मानवाधिकार के हनन के बारे में अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन के अपराधों की ओर से लोगों का ध्यान भटकाना है।
उन्होंने कहा कि हम विश्व समुदाय से मांग करते हैं कि वह निर्दोष फ़िलिस्तीनियों का जनसंहार रुकवाने और ज़ायोनी शासन की ओर से आतंकवाद के सरकारी समर्थन तथा अरब व इस्लामी देशों पर निरंतर अतिक्रमण तथा सीरिया और लेबनान की राष्ट्रीय संप्रभुता के हनन को रुकवाने में ठोस क़दम उठाए। (AK)