अमेरिकी विश्लेषक: ट्रंप कमजोर ईरान चाहते हैं
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वाशिंगटन के "स्टिम्सन" थिंक टैंक में पश्चिम एशिया मामलों की वरिष्ठ शोधकर्ता 'बारबरा स्लाविन'
पार्स टुडे - वाशिंगटन के "स्टिम्सन" थिंक टैंक में पश्चिम एशिया मामलों की वरिष्ठ शोधकर्ता का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान को कमजोर करना चाहते हैं।
वाशिंगटन के "स्टिम्सन" थिंक टैंक में पश्चिम एशिया मामलों की वरिष्ठ शोधकर्ता 'बारबरा स्लाविन' के अनुसार, इस तथ्य के बावजूद कि 'डोनाल्ड ट्रंप' एक ऐसे राष्ट्रपति के रूप में जाने जाना चाहते हैं जिनके कार्यकाल में इस्लामी गणराज्य ईरान की व्यवस्था का पतन हो, लेकिन वाशिंगटन के लिए संभवतः "एक कमजोर ईरान जो अमेरिका और क्षेत्र में उसके सहयोगियों के लिए कम खतरा पैदा करे" भी पर्याप्त है।
इसी संबंध में, हांगकांग स्थित समाचार पत्र "साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट" ने एक विश्लेषण में इस्लामी गणराज्य ईरान के प्रति कूटनीतिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की अमेरिकी इच्छा पर चर्चा की। इस रिपोर्ट के कुछ हिस्सों में ईरान के खिलाफ ट्रंप प्रशासन की किसी भी साहसिक कार्रवाई के संबंध में इस्लामी गणराज्य ईरान के अधिकारियों की चेतावनियों का उल्लेख किया गया है और कहा गया है कि ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ईरान के आसपास युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों की व्यापक तैनाती को देखते हुए, अमेरिका का कोई भी हमला पूरे क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई का सामना करेगा।
इस रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि वाशिंगटन को इन चेतावनियों को गंभीरता से लेना चाहिए। वाशिंगटन स्थित अरब खाड़ी देश संस्थान के वरिष्ठ शोधकर्ता 'अली अल-फौनेह' के अनुसार, यदि अमेरिका इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि उसका अंतिम लक्ष्य तेहरान में शासन को उखाड़ फेंकना है, तो ईरान में सत्ता संरचना इस प्रकार है कि वह वैश्विक बाजारों को बाधित करने और अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें बढ़ाने के उद्देश्य से क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना पर हमला करके अमेरिका को एक लंबे और घिसाऊ संघर्ष में फंसा सकता है।
दूसरी ओर, पश्चिम एशिया मामलों की वरिष्ठ शोधकर्ता 'बारबरा स्लाविन' के अनुसार, ईरान में हाल के आंतरिक घटनाक्रमों को देखते हुए, इस्लामी गणराज्य के खतरे पहले की तुलना में अधिक गंभीर हैं क्योंकि ईरान की सरकार कमजोरी दिखाने को इच्छुक नहीं है, क्योंकि उसका मानना है कि इससे और अधिक हमले होंगे।
पश्चिम एशिया मामलों की वरिष्ठ शोधकर्ता ने अपने वक्तव्य के निष्कर्ष में ईरान के खिलाफ अमेरिकी तनाव में क्षेत्रीय देशों के शामिल होने की अनिच्छा की ओर भी इशारा किया और कहा कि अरब देश ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष की आग में नहीं फंसना चाहते। (AK)
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