Oct ०१, २०१८ १६:२८ Asia/Kolkata

दूसरे अन्य महत्वपूर्ण कामों की ही तरह शादी करने के लिए भी तैयारी ज़रूरी है। 

यह बात इसलिए कही जाती है क्योंकि अगर शादी करने वाला व्यक्ति स्वयं को एक महत्वपूर्ण चयन के लिए तैयार न करे और बाद की ज़िम्मेदारियों के निर्वाह की क्षमता न रखता हो तो निश्चित रूप से वह एक सफल वैवाहिक जीवन व्यतीत नहीं कर सकता।  ऐसा व्यक्ति सदा अशांत दिखाई देता है जबकि शादी या विवाह का मुख्य लक्ष्य, शांतिपूर्ण जीवन गुज़ारना है।

कभी-कभी ऐसा होता है कि मनुष्य अपने जीवनसाथी के चयन के लिए सुन्दरता, शिक्षा या इसी प्रकार की जो अन्य शर्तें निर्धिरित करता है उसके कारण लंबे समय तक उसे जीवन साथी नहीं मिल पाता।  ऐसे में उस व्यक्ति का अधिक समय अकेले में गुज़रता है।  दूसरी ओर ऐसे लोग जो जीवन साथी की सुन्दरता, आकर्षण, सामाजिक स्थिति या सांस्कृतिक को अनदेखा करते हुए विवाह कर लेता है उसे विवाह के बाद दूसरे प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। एसे में कभी-कभी उसका संयुक्त जीवन ख़तरे में पड़ जाता है।  इससे पता चलता है कि विवाह, सोच-विचार करने के बाद पूरी तैयारी के साथ करना चाहिए।  इस बारे में डाक्टर आज़ीन कहते हैं कि यह बात सही है कि हर समाज का महत्वपूर्ण आधार परिवार होता है लेकिन यह बात याद रखनी चाहिए कि विवाह का मुख्य उद्देश्य, शांतिपूर्ण जीवन की प्राप्ति है।

सफल विवाहित जीवन के लिए यह आवश्यक है कि जीवनसाथी के चयन में इस बात का पूरा ध्यान रख जाए कि दोनों एक-दूसरे के लिए उचित हों।  एसे में यह कहना किसी हद तक उचित नहीं है कि हमने अपने जीवनसाथी का चुनाव कर लिया है और हम एक-दूसरे को पसंद करते हैं।  अब यदि हमारे बीच कुछ ग़लतफ़हमी होगी भी तो उसे हल कर लेंगे।  होता यह है कि जब दो अलग संस्कृतियों के लोग विवाह करते हैं तो उनके दैनिक जीवन में अपने जीवन साथी की संस्कृति की विशेषताएं आ जाती हैं।  इसलिए ज़रूरी है कि मनुष्य जिसे भी अपने जीवनसाथी के रूप में चुने उसके परिवेश की जानकारी रखे।  मनुष्य जिस समाज या संस्कृति में पल-बढ़कर बढ़ा होता है उसकी विशेषताएं उसके भीतर आ ही जाती हैं।  ऐसे में मनुष्य के भीतर जो विशेषताएं होती हैं वे परिवर्तित नहीं हो पातीं।  ऐसा हो सकता है कि साथ-साथ रहने के कारण लोगों के भीतर कुछ परिवर्तन दिखाई दें किंतु यह ही संभव है कि ऐसा न हो।

इसीलिए कहा जाता है कि शादी से पहले यह देख ले कि आगामी जीवनसाथी कैसा है और उसकी विशेषताएं क्या हैं।  आप जिसके साथ अपना नया जीवन आरंभ करने जा रहे हैं, आपको उसकी विशेषताओं के साथ जीवन गुज़ारना होगा।  एसा हो सकता है कि पति-पत्नी के साथ साथ रहने के कारण उनके भीतर कुछ बदलाव दिखाई दें लेकिन ज़रूरी नहीं है कि ऐसा निश्चित रूप में हो।  अगर आप यह सोच रहे हैं कि हम सामने वाले की सोच बदल देंगे तो यह ऐसा विचार है जो पूरी तरह से सही सिद्ध नहीं होता।  इस सोच के साथ यदि आप आगे बढ़ते हैं तो आपको जीवन में मतभेदों का सामना करना पड़ सकता है।  उदाहरण स्वरूप यदि धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति किसी ऐसी लड़की के घर रिश्ता लेकर जाए जिसकी धर्म में आस्था ही न हो तो उसे पहले ही उन बातों के बारे में सोच लेना चाहिए जिनका सामना उसे बाद में करना पड़ेगा।

कहते हैं कि सफल विवाह का मुख्य आधार पति और पत्नी दोनों का समान विचारधारा का स्वामी होना है।  इस्लाम ने इस बात पर विशेष बल दिया है।  इसके लिए इस्लाम ने जिस शब्द का प्रयोग किया है वह है कुफ़्व जिसका अर्थ होता है हम पल्ला।  वर्तमान समय में कुफ़्व का अर्थ है बराबर होना।  आर्थिक, शैक्षिक या अन्य दृष्टि से एक जैसा होना।  हालांकि इस्लामी शिक्षाओं में बराबरी से पहले जिस बारे में कहा गया है वह यह है कि ईश्वर पर आस्था।  इस हिसाब से मोमिन-मोमिन का हम पल्ला है।  इस बारे में पवित्र क़ुरआन में एक स्थान पर ईश्वर कहता है कि पाक औरतें, पाक पुरूषों के लिए हैं।  इसी प्रकार पाक पुरुष, पाक महिलाओं के लिए हैं।

पवित्र क़ुरआन में जिस पाकी या पवित्रता के बारे में कहा गया है वह पहले भीतरी पवित्रता है।  भीतरी पवित्रता का अर्थ है ईश्वर, प्रलय, नबूवत और क़ुरआन पर हार्दिक आस्था।  इसी के साथ पवित्रता का अर्थ है नैतिक विशेषताओं से सुसज्जित होना।

हमने परिवार के आधार के बारे में चर्चा की थी जिसका अर्थ है पति और पत्नी।  वास्तव में किसी भी परिवार का आधार पति और पत्नी से होता है बाद में दूसरे लोग उससे जुड़ते हैं।  हालांकि किसी परिवार का मूल आधार पति और पत्नी होते हैं किंतु उनके साथ कुछ और लोग भी होते हैं जैसे माता-पिता और अन्य ख़ूनी रिश्तेदार।  एसे परिवारों में कोई एक ज़िम्मेदार होता है जिसे मुखिया भी कह सकते हैं।  घर का मुखिया ही हर फैसला लेता है।  इस प्रकार के परिवार पूरी दुनिया में मिल जाएंगे किंतु एसे परिवार अधिकतर पूर्वी क्षेत्रों में पाए जाते हैं।  ईरान भी एसा देश हैं जहां पर परिवार को विशेष महत्व प्राप्त है।  इन परिवारों में पति-पत्नी और बच्चों के साथ पति या पत्नी के माता-पिता भी साथ में रहते हैं।  यह एसी प्रथा है जो शताब्दियों से चली आ रही है।

हुसैनी और हुसैनी का एक छोटा सा परिवार है।  इस परिवार में उनके दो बेटे और एक बेटी रहते हैं।  परिवार में हुसैनी के माता-पिता भी साथ रहने लगे हैं।  उनके माता-पिता की आयु लगभग सत्तर वर्ष है।  श्री हुसैनी के माता-पिता पहले गांव में रहा करते थे।  बाद में पानी की कमी और अन्य समस्याओं के कारण श्री हुसैनी के माता-पिता ने अपने बेटे के साथ रहने का निर्णय लिया।  वे लोग इस बात के लिए ईश्वर के आभारी हैं कि अपने बेटे के साथ मिलकर जीवन गुज़ार रहे हैं।  श्री हुसैनी अपनी हर प्रकार की व्यस्थता के बावजूद घर में अपने माता और पिता के रहने से बहुत खुश हैं।  सब लोग मिल जुलकर खुशी-खुशी जीवन गुज़ार रहे हैं।

 

ईरान में हालिया वर्षों में कराए जाने वाले सर्वेक्षणों से पता चलता है कि लगभग 58 प्रतिशत लोग इस बात को वरीयता देते हैं कि नए विवाहित जोड़े, अपने माता-पिता से अलग जीवन गुज़ारें।  हालांकि इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार माता-पिता और वृद्धों का ध्यान रखा जाए।  उन्हें ओल्ड हाउस में रखने के बजाए पर उनके साथ घर में रहा जाए।  इस सर्वेक्षण के अनुसार केवल दो प्रतिशत लोग ही बूढ़ों के लिए वृद्धाश्रम के बारे मे सोचते हैं।  23 प्रतिशत लोगों का मानना है कि विवाहित जोड़ों का अपने मां-बाप के साथ ही रहना एक उचित काम है।

इस सर्वेक्षण से यह बात समझ में आती है कि ईरानी परिवार, पूरी तरह से पश्चिमी आदर्श को नहीं अपना रहे हैं बल्कि वे पारिवारिक मूल्यों को महत्व देते हैं।  अपने परिजनों से मिलने-जुलने पर आधारित इस्लामी नियम भी परिवारों के सबन्धों को सुदृढ़ करता है।  धार्मिक उत्सव, महापुरूषों के जन्म दिवस, विवाह, बच्चों की बर्थडे और इसी प्रकार के बहुत से एसे अवसर हैं जो परिवारों को एक-दूसरे से अधिक निकट लाते हैं जिसके परिणाम स्वरूप उनके संबन्ध घनिष्ठ होते जाते हैं।  ईरान में यह बातें बहुत अधिक प्रचलित हैं।  एसा भी होता है कि यहां पर जब अपने ही किसी सगे संबन्धी को आर्थिक या किसी अन्य प्रकार की आवश्यकता होती है तो सामान्यतः परिवार के लोग ही उसके समाधान के लिए आगे आते हैं।  इस प्रकार की बातों ने ईरान में परिवारों को बहुत अधिक मज़बूत और एकजुट कर दिया है।

संयुक्त रूप में जीवन व्यतीत करने के लिए कुछ बातों का होना बहुत ज़रूरी है जैसे एक-दूसरे का सम्मान करना, दूसरों को महत्व देना, लोगों के साथ विनम्रता पूर्ण रहना, दूसरों की बातों को सुनना और इसी प्रकार की अन्य बहुत सी बातें।  सर्वेक्षणों से यह भी पता चलता है कि पुरूषों के जीवन में महिलाओं की उल्लेखनीय भूमिका होती है।  कहते हैं कि पुरूष की सफलता के पीछे किसी महिला का हाथ होता है।  एक अन्य सर्वेक्षण से पता चलता है कि मां, बहन और पत्नी के बिना पुरूष सफल नहीं हो सकता।

यह बात उल्लेखनीय है कि महिला और पुरूष एक-दूसरे के सम्मान के साथ परस्पर आत्मविश्वास को बढ़ा सकते हैं।  अगर आप चाहते हैं कि अपने जीवनसाथी को हमेशा प्रसन्न रखें तो दूसरों के सामने उसकी योग्ताओं की खुलकर तारीफ़ करें।  एक अध्धयन में कहा गया है कि अपने संयुक्त जीवन से संबन्धित नियमों को पति और पत्नी को किसी काग़ज़ पर लिखना चाहिए और हर प्रकार के मतभेदों से बचने के लिए समय-समय पर उनपर चर्चा की जानी चाहिए।  इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आपने जीवनसाथी के भीतर पाई जाने वाली किसी एक विशेषता को समझने के बाद उसके सामने उसका उल्लेख ज़रूर करना चाहिए।  यहां पर यह कोई विशेष महत्व नहीं रखता की आपके जीवनसाथी के भीतर पाई जाने वाली विशेषता क्या है बल्कि विशेष यह है कि आपकी प्रशंसा उसमें उत्साह को बढ़ाती है जिसके कारण उसके भीतर आपके प्रति अधिक लगाव पैदा होता है।  आपके द्वारा अपने जीवनसाथी की सकारात्मक विशेषता की प्रशंसा उसकी विशेषता में वृद्धि का कारण बनेगी।