Nov १९, २०१८ ०७:३३ Asia/Kolkata

आपने यह जुमला अवश्य सुना होगाः "अपने जीवन की दूसरे लोगों के ज़ाहरी जीवन से तुलना न करें।

" जब आपके घर कोई मेहमान आता है तो आप घर की हर चीज़ को ठीक व व्यवस्थित करते हैं। दूसरों के जीवन, व्यक्तित्व और संबंध का जो स्वरूप आपको दिखाई देता है वह वास्तविकता से अलग होता है। इसलिए दूसरों को देख कर हैरत में पड़ने और अपने जीवन साथी की दूसरे से तुलना करने के बजाए, अपने जीवन साथी का सम्मान कीजिए, उसे महत्व दीजिए और उससे प्रेम कीजिए।

दांपत्य जीवन में तुलना करने से एक ओर पति का स्वाभिमान टूटता है तो दूसरी ओर पत्नी की भावना आहत होती है। दूसरे शब्दों में अगर कोई पति अपनी पत्नी की दूसरे की पत्नी से तुलना करे तो वह अपनी बीवी की भावना को आहत करेगा और इसी तरह अगर कोई बीवी अपने शौहर की दूसरे पुरुष से तुलना करे तो अपने शौहर के स्वाभिमान को आहत करेगी।

अपनी उंगलियों को ध्यान से देखिए। आपकी उंगुलियां इतनी अनूठी हैं कि दुनिया के किसी दूसरे व्यक्ति की उंगुलियों की पोर आपकी पोर से मेल नहीं खातीं। जब आप इन अंतरों को स्वीकार करते हैं तो फिर अपनी और अपने दोस्त की बीवी के बीच अंतर को स्वीकार क्यों नहीं करते? क्या रंग बिरंगे फूलों  के अंतर पर ध्यान दिया है? क्या खाद्य पदार्थ, ख़ुशबू और मज़े में अंतर पर ध्यान दिया है? अगर ध्यान दें तो समझ में आएगा कि इन अंतरों की वजह से दुनिया ख़ूबसूरत लगती है। जब इंसान और उनके बीच संबंध की बात आती है तो व्यक्तिगत अंतर सबसे अहम चीज़ है जिसे स्वीकार करना चाहिए। जिस तरह आपकी आपके हमउम्र के लोगों बीच आदतों, रूचियों और जीवन शैली की दृष्टि से बहुत अंतर होता है, आपका जीवन साथी भी इससे अपवाद नहीं है।

अपने जीवन साथी की दूसरे से तुलना करने से जो संदेश मिलता है वह यह कि आपका जीवन साथी यह महसूस करता है कि वह आपके लायक़ नहीं है, वह आपकी अपेक्षाओं पर पूरा नहीं उतरा है और आप उससे संतुष्ट नहीं हैं। यहीं से व्यक्ति के व्यक्तित्व का टूटना और परिवार को नुक़सान पहुंचना आरंभ होता है।

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई द्वारा ईरानी परिवार की कुछ विशेषताओं से आपको परिचित करा रहे हैं। आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई कहते हैः "ईश्वर की कृपा से हमारे देश में और बहुत से पूर्वी समाज में ख़ास तौर पर इस्लामी समाज में अभी भी परिवार का आधार मज़बूत है। इसकी वजह मोहब्बत और घनिष्ठता है। बीवी का अपने शौहर के लिए दिल धड़कता है। एक दूसरे से मन की गहराई से मोहब्बत करते हैं और दूसरे से निष्ठा से पेश आते हैं। दूसरी जगहों पर ये चीज़ें बहुत कम हैं। हमारे देश में यह ज़्यादा है।"          

                     

पिछले कार्यक्रम में हमने यह बताया था कि ईरानी परिवार की एक अहम विशेषता उसका धार्मिक होना है। कुछ समाजशास्त्रियों का मानना है कि इस पवित्र केन्द्र की एक और विशेषता इसका ऐतिहासिक होना भी है। ईश्वर ने हज़रत आदम और हव्वा को पैदा करके पारिवारिक जीवन का आधार रखा। रवायत में हैः "ईश्वर ने आदम को पैदा करने के बाद, हव्वा को नए तरीक़े से वजूद दिया। हज़रत आदम ने, जब उन्हें हज़रत हव्वा के पैदा होने के बारे में पता चला तो ईश्वर से पूछाः यह कौन है जिसे देख कर मैं अपने मन में मोहब्बत महसूस कर रहा हूं? ईश्वर ने कहाः ये हव्वा है। क्या तुम्हें पसंद है कि तुम्हारे साथ रहे, तुमसे बात करें, तुम्हारा अनुसरण करे और तुम्हारे सुकून का कारण बने। उस समय ईश्वर ने हज़रत आदम से कहाः उससे विवाह के लिए मुझसे कहो क्योंकि वह तुम्हारी बीवी बनने के योग्य है। उसके बाद हज़रत आदम ने फ़रमायाः "मैं उनसे विवाह करना चाहता हूं, क्या तू इस बात से प्रसन्न है?" ईश्वर ने कहाः मेरी प्रसन्नता इस बात में है कि तुम उसे मेरे धर्म की शिक्षा दो।"

इससे पता चलता है कि आदम और हव्वा में एक दूसरे के लिए प्रेम का मुख्य तत्व हज़रत आदम का हव्वा को देखना और फिर उनके प्रेम में आकर्षित होना है। ईश्वर ने इसी बात को उनके बीच संबंध क़ायम होने का आधार क़रार दिया। यह मानवीय लगाव व प्रेम, यौनेच्छा के प्रकट होने से पहले ज़ाहिर हुआ। यही वजह है कि इस्लाम ने परिवार के गठन को यौनेच्छा की तृप्ति से अधिक अहमियत दी है और इसे पति-पत्नी के सुकून की वजह बतायी है। शादी के बाद हज़रत आदम ने हज़रत हव्वा से कहा कि मेरे पास आओ। हज़रत हव्वा ने उनसे कहा कि आप मेरे पास आइये। ईश्वर ने हज़रत आदम को हुक्म दिया कि हव्वा की ओर बढ़िये और यही चीज़ इस बात का कारण बनी कि पुरुष महिला का हाथ मांगे।                     

ईश्वर ने पति पत्नी को एक रत्न बताया है और उनकी पैदाइश के स्रोत की दृष्टि से उनके बीच किसी तरह का अंतर नहीं माना है। जैसा कि इस बारे में ईश्वर आराफ़ नामक सूरे की आयत नंबर 189 में फ़रमाता हैः "वही ईश्वर जिसने तुम सबको एक जान से पैदा किया और उसी से उसके लिए जोड़ा बनाया ताकि उससे सुकून हासिल करो।"

हज़रत आदम और हज़रत हव्वा का एक साथ जीवन अनेक अच्छी व बुरी घटनाओं का आधार बना। दोनों हस्तियों को शैतान के बहकावे में आकर स्वर्ग में वर्जित फल खाने की वजह से दुनिया में भेजा गया। इंसान की पैदाइश हज़रत आदम और हज़रत हव्वा के पारिवारिक जीवन से शुरु हुयी। इन दोनों जोड़ों के यहां बच्चे पैदा होने से घर से जुड़े मूल सामाजिक मामले शुरु हुए और घर से बाहर हाबील और क़ाबील के बीच जंग तक जा पहुंचे। यह जंग और शांति का क्रम चलता रहा और मानव इतिहास बनता गया।

इस बारे में एक और अहम बिन्दु परिवार में बच्चे की पैदाइश है जिसके बाद से सभी इंसानों का परिवार में जन्म हुआ और उनके जीवन का पहला चरण घर और परिवार से शुरु हुआ। समाजशास्त्री डॉक्टर अर्मकी इस घटना से यह नतीजा निकालते हैं कि परिवार के वजूद के पीछे एक ऐतिहासिक घटना है क्योंकि यह मनुष्य के वजूद के आरंभ से उसके साथ था और अनेक बदलाव का आधार बना।

                        

हालांकि ईरान में पारिवारिक व्यवस्था पर आधुनिक जीवन शैली का असर पड़ा और उसकी उपयोगिता प्रभावित हुयी लेकिन ईरानियों ने परिवार को बचाने और उसके संबंध को मज़बूत करने की कोशिश की है और इसे वह अपने धार्मिक व नैतिक कर्तव्य का हिस्सा समझते हैं।

पति पत्नी के संबंधों में एक बिन्दु इतना अहम है कि उस पर ध्यान देने से वैवाहिक जीवन मज़बूत होता है। मिसाल के तौर पर किसी कार्यालय में कार्यरत पति पत्नी जब कार्य के दौरान या कार्य की समाप्ति पर एक दूसरे से मिलते हैं तो उन्हें एक दूसरे से यह अपेक्षा रहती है कि माहौल ख़ुशहाल हो जिससे थकान दूर हो। इस संबंध में दोनों की ओर से कोशिश से जीवन सुखी व ख़ुशहाल बनता है।

जीवन में कभी कभी ऐसे हालात पेश आते हैं जिनसे बच पाना इंसान के लिए मुमकिन नहीं होता। पति को जीवन के संघर्ष के दौरान ऐसे क्षण की ज़रूरत होती है जिसमें वह सुकून का आभास करे। सुकून के दो पल उसे उस वक़्त नसीब होते हैं जब वह प्रेम व भावना से भरे पारिवारिक माहौल में पहुंचता है। उसके पास उसकी बीवी हो, जो उसे चाहती हो और उसके साथ वह अपनेपन का एहसास करे। यही पति के लिए सुकून व सुख के पल होते हैं।

पत्नी को भी अपने नारी जीवन की मुश्किलों का सामना होता है जिससे उसकी कोमल भावनाओं को चोट पहुंचती है। हो सकता है ऐसा घर के बाहर की गतिविधियों के दौरान हो या घर के भीतर घर के मामलों के दौरान। उसे भी इस रस्साकशी के बीच सुकून की ज़रूरत और एक ऐसे सहारे की ज़रूरत होती है जिस पर भरोसा कर सके। यह भरोसे का स्रोत उसका पति होता है। परिवार सुकून के लिए होता है और और जो चीज़ परिवार में सुकून लाती है वह पति-पत्नी के बीच भावनात्मक लगाव है। जीवन साथी इंसान को ऐसी शांति देता है जिससे वह जीवन के संकट से पार पा लेता है। ऐसा जब होता है जब घर का माहौल तनावपूर्ण न हो बल्कि दोनों पक्ष एक दूसरे के प्रति क्षमा की भावना रखें। एक दूसरे की कमियों को नज़रअंदाज़ करें।