क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार- 736
क़ुरआन ईश्वरीय चमत्कार- 736
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ. الم (1)
अल्लाह के नाम से जो अत्यंत कृपाशील और दयावान है। अलिफ़. लाम. मीम. (30:1)
غُلِبَتِ الرُّومُ (2)
रोम वाले (ईरानियों से) पराजित हो गए। (30:2)
فِي أَدْنَى الْأَرْضِ وَهُمْ مِنْ بَعْدِ غَلَبِهِمْ سَيَغْلِبُونَ (3)
(अरबों से सबसे निकट धरती में) और वे अपनी पराजय के पश्चात शीघ्र ही विजयी हो जाएँगे। (30:3)
فِي بِضْعِ سِنِينَ لِلَّهِ الْأَمْرُ مِنْ قَبْلُ وَمِنْ بَعْدُ وَيَوْمَئِذٍ يَفْرَحُ الْمُؤْمِنُونَ (4)
अगले कुछ ही वर्षों में और अधिकार तो ईश्वर ही का है पहले भी और उसके बाद भी। और उस दिन ईमान वाले ईश्वर की सहायता से प्रसन्न होंगे। (30:4)
بِنَصْرِ اللَّهِ يَنْصُرُ مَنْ يَشَاءُ وَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ (5
वह जिसकी चाहता है, सहायता करता है। और वह अत्यन्त प्रभुत्वशाली व दयावान है (30:5)
وَعْدَ اللَّهِ لَا يُخْلِفُ اللَّهُ وَعْدَهُ وَلَكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ (6)
यह ईश्वर का वादा है और वह कभी अपने वादे को नहीं तोड़ता लेकिन अधिकतर लोग नहीं जानते। (30:6)
يَعْلَمُونَ ظَاهِرًا مِنَ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَهُمْ عَنِ الْآَخِرَةِ هُمْ غَافِلُونَ (7)
वे तो (आंखों से दिखाई देने वाले) सांसारिक जीवन के केवल विदित रूप को जानते हैं किन्तु प्रलय (के जीवन) की ओर से वे बिलकुल निश्चेत हैं। (30:7)
أَوَلَمْ يَتَفَكَّرُوا فِي أَنْفُسِهِمْ مَا خَلَقَ اللَّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا إِلَّا بِالْحَقِّ وَأَجَلٍ مُسَمًّى وَإِنَّ كَثِيرًا مِنَ النَّاسِ بِلِقَاءِ رَبِّهِمْ لَكَافِرُونَ (8)
क्या उन्होंने अपने आप में यह सोच-विचार नहीं किया कि ईश्वर ने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है, सत्य के साथ और एक नियत अवधि के लिए पैदा किया है और निश्चय ही बहुत से लोग अपने पालनहार से मुलाक़ात का इन्कार करने वाले हैं। (30:8)