Aug १८, २०१९ १५:५४ Asia/Kolkata

ईश्वर ने हज़रत आदम व हव्वा को वैवाहिक रिश्ते में बांधकर परिवार इकाई का आधार रखा और इस युक्ति से इस दुनिया में सभी इन्सानों को दाम्पत्य जीवन की ओर अह्वान किया और मनुष्य की परिपूर्णता को परिवार में दंपति के साथ प्रेमपूर्ण जीवन और मुहब्बत से साथ रहना क़रार दिया।

ईश्वर की तत्वदर्शी युक्ति, महिला और पुरुष के बीच आकर्षक और झुकाव में प्रतिबिंबित होती है और पूरे इतिहास में सारे इन्सान परिवार इकाई के अंतर्गत जमा होते हैं और इस प्रकार मनुष्य की पीढ़ी आगे बढ़ती रहती है।  

हमने इस बिन्दु की ओर बारम्बार इशारा किया है कि पवित्र क़ुरआन परिवार गठन को पुरुष और महिला की शांति और सुकून का सार क़रार देता है और स्वर्ग की तरह मिलने वाली इस शांति को ईश्वर की शक्ति, वैभवता और उसकी महानता का चिन्ह क़रार दिया है। इसका अर्थ यह है कि वह पुरुष और महिला जिनके एक दूसरे से किसी भी प्रकार के भावनात्मक और आत्मिक संबंध न हों, वह विवाह करके तथा परिवार गठित करके एक दूसरे से जुड़ सकते हैं और और आत्मिक संबंध पैदा करके एक दूसरे को सुख और शांति दे सकते हैं।

पुरुष और महिला के बीच संबंध का इतना अधिक महत्व है कि ईश्वर ने इसको मजब़ूत बंधन या वचन का नाम दिया है। जैसा कि सूरेए निसा की आयत संख्या 21 में ईश्वर कहता है कि और आख़िर किस तरह तुम माल वापस लोगे जबकि एक दूसरे से जुड़ चुका है और इन महिलाओं ने तुमसे बहुत सख़्त तरह का वचन लिया है।

खेद की बात यह है कि आज के आधुनिक युग में इस बात की अनदेखी की वजह से बहुत अधिक परेशानियों और समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अशांति, अवसाद, मानसिक समस्या और आत्मिक जटिलता, आज के मनुष्य की बहुत सी समस्याओं की जड़ है और इसका मुख्य कारण परिवार इकाई का तबाह हो जाना या मनुष्य का अकेले जीवन व्यीतत करना, समलैंकिकता और इन जैसे विचार हैं। इन्हीं चीज़ों ने विचारों और बुद्धिजीवियों को इतना अधिक चिंतित कर दिया है कि उनकी समझ में आ गया कि इस मार्ग में मुक्ति का एकमात्र मार्ग, घर परिवार की ओर लोगों का पलटना है।

पश्चिमी लेखक विलियम गार्डनर अपनी किताब "परिवार के विरुद्ध युद्ध" में लिखते हैं कि दंपति का निष्ठा की सौगंध खाना, विवाह के सबसे अर्थपूर्ण क्षण में है, इस प्रकार की क़समों से, दंपति एक दूसरे को वचन देते हैं कि अपने प्रेस को बुरी आस्था से पाक करेंगे और उसे बड़े पारिवारिक, सामाजिक और अध्यात्मिक लक्ष्यों के लिए विशेष कर देंगे। जो चीज़ें परिवार के जीवन को निशाना बनाती हैं वह सबसे पहले, दांथ त्य जीवन में प्रेम की इसी भावना को बर्बाद कर देती हैं।

दक्षिणी पूर्वी एशिया के देशों में होने वाले शोध से पता चलता है कि बच्चे, पिता के बर्ताव की दस विशेषताओं और मां के बर्ताव की पांच विशेषताओं से प्रभावित होता है। आत्म विश्वास और ईश्वरीय भय वह दो विशेषताएं हैं जो क्रमशः बच्चा माता पिता से हासिल करता है। बच्चा, अपने पिता से 61 प्रतिशत आत्म विश्वास और अपनी मां से 64.5 प्रतिशत ईश्वरीय भय हासिल करता है।  

बड़ा भाई और बड़ी बहन की भी उसके प्रशिक्षण में अहम भूमिका होती है और भाईयों व बहनों और कुछ अन्य बहनों की कुछ विशेषताएं, उसके जीवन और बचपन को बहुत अधिक प्रभावित करती हैं।  इस प्रकार से बच्चों का प्रशिक्षण और उनके प्रशिक्षण में माता पिता की सफलता बहुत ही महत्वपूर्ण होती है।

हमने बच्चों के साथ कड़ाई करने वाले और बच्चों के साथ ढिलाई करने वाले परिजनों के बारे में आपको बताया था।  हमने इन परिवारों के बच्चों की विशेषता आपको बताई थी। एक प्रकार का परिवार बिखरा हुआ परिवार होता है। इस प्रकार के परिवारों में माता पिता के बीच बतभेद के कारण बच्चे अधिकतर लड़ाई झगड़े और मतभेद देखते रहे हैं और यह बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।  

कभी कभी बच्चा एक न्यायाधीश के रूप में इस बीच में रहता है और दोनों पक्षों में से किसी एक को ज़िम्मेदार मानता है।  बिखरे हुए परिवार में बच्चे की मानसिक और शारीरिक आवश्यकता तो पूरी होती ही नहीं बल्कि धीरे धीरे वह हिंसक आदर्श अपनाने लगता है।

बिखराव का शिकार परिवार के लोगों के चेहरे सूखे, सदस्य सामान्य रूप से दुखी, फंसे हुए, अवसाद का शिकार और भावनाहीन नज़र आता है। इन परिवारों के कान दूसरों की आवश्यकताओं को सुनने के लिए नहीं होते और उनकी आवाज़ें ऊंची और कड़क तथा दिल को दहला देने वाली होती है या एकदम शांत और एक दम धीमी होती है जिससे सुना भी न जा सके।

इस परिवार से निकलने वाले बच्चे परेशान और बिखराव का शिकार होते हैं, उनके बच्चे बीमार, निराश, अवसाद का शिकार, भ्रष्ट और समाज के विरुद्ध होते हैं।  जैसा कि देखा गया है कि मानसिक बीमारी का शिकार अधिकतर लोग नशेड़ी होते हैं और उन्हें न तो स्वयं से कोई मतलब होता है और न ही उन्हें अपने परिवार से कोई वास्ता होता है।

कहा जाता है कि हर सौ परिवार में से बहुत ही कम प्रतिशत परिवार को पता होता है कि क्या किया जाए और अच्छी जीवन शैली अपनाकर स्वयं को और अपने परिवार को ऊंचाईयों तक पहुंचा सकता है । इस प्रकार के परिवार के स्वस्थ और सही परिवार कहा जाता है।

स्वस्थ और सही परिवार से तात्पर्य वह परिवार है जो बच्चे को संतुष्ट, ठोस और स्वतंत्र शैली के हवाले कर देता है। इस प्रकार के परिवार के बच्चे वैचारिक स्वाधीनता और स्वतंत्रता से संपन्न होते हैं जबकि माता पिता की ओर से उनके ऊपर एक की प्रकार की सीमित्ता और नियंत्रण होता है। इस प्रकार के परिवार में बच्चों और माता पिता के बीच एक प्रकार का शाब्दिक संपर्क होता है और विचारों का आदान प्रदान होता है और इस प्रकार के परिवार में ब्चचों को टूट कर चाहा जाता है। इस प्रकार के परिवार में माता पिता बड़े ही लाड प्यार से बच्चों को गोद लेते हैं।

 

स्वस्थ परिवार की विशेषताएं, स्वाधीनता के साथ क़ानून पर अमल है। परिवार जब भी किसी चीज़ से बच्चे को मना करते हैं या उससे ख़ास अपेक्षा रखते हैं, उसके लिए मुद्दे को अच्छी तरह बयान करना चाहिए, और उसका बेहतरीन तर्क पेश करना चाहिए।  इस प्रकार के परिवार में काम का विभाजन होता है, इसमें परिवार का हर व्यक्ति अपने ऊपर एक ज़िम्मेदारी उठाए रहता है और फ़ैसले तथा आय का विभाजन, जीवन शैली और अन्य मामले सलाह और मशविरे से किए जाते हैं।

इस परिवार के लोग सच्चे होते हैं और वह पूरी रुचि से एक दूसरे से बातें करते हैं और एक दूसरे की बातों को ध्यान से सुनते हैं। जब शांति रहती है तो इसे शांतिदायक सुकून का नमा दिया जाता है और यह भय और सावधानी पर आधारित नहीं होती।

इन बातो को ध्यान में रखना आवश्यक है कि बच्चों का सम्मान, उनमें स्वाधीनता की भावना और आत्मविश्वास को मज़बूत करता है और मनुष्य के सुरक्षित विकास में मदद करता है। यह बात बच्चे की लोकप्रियता को उसकी उम्र के साथियों के बीच बढ़ाती है और धीरे धीरे उसकी क्षमता, प्रबंधन और नेतृत्व की भूमिका अदा करने और ज़िम्मेदारी स्वीकार करने के लिए निखर जाती है।

साइमन्ड अपने शोध में शक्तिशाली परिवार के बारे में अपने शोध में इस परिणाम पर पहुंचते हैं कि इस परिवार के बच्चों के नंबर क्लास में, यहां तक कि उनकी होशियारी और समझदारी दूसरे बच्चों की तुलना में अधिक होती है, उनमें जिज्ञासा अधिक होती है, रचनात्मक होते हैं और अपनी उम्र के बच्चों के बीच बहुत अधिक लोकप्रिय होते हैं जो अपने गुट का नेतृत्व करने की क्षमता रखते हैं।

अंत में इस बिन्दु की ओर इशारा करना आवश्यक है कि हंसी, खेल, मनोरंजन और गतिविधियां, आप के परिवार की महत्वपूर्ण आवश्यकताएं हैं। तो फिर इन्जीनियर, डाक्टर, प्रबंधक, कर्मचारी और टीचर इत्यादि जो भी हो, जिस भी माहौल में काम करता हो, उसे अवश्य ही अपने आसपास के माहौल का ख़्याल रखना चाहिए और अपने व्यक्तित्व और सम्मान की रक्षा करनी चाहिए किन्तु यह सारी बातें काम के उसी माहौल से संबंधित हैं और इसका संबंध घर के माहौल से नहीं है।

आप के पास पद हो तो आप के लिए अहम है किन्तु इसे घर के दरवाज़े पर ही छोड़ दें तभी घर के अंदर जाएं। अपने बच्चों और बीवी के साथ दस्तरख़ान पर बैठें और साथ मिलकर खाएं और एक माहौल में विश्राम करें, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि घर के प्रबंधक का यह अर्थ नहीं है कि घर एक छावनी बन जाए, बाप कमान्डर हो, अपने शिष्टाचारिक व नैतिक प्रबंधन को एक ओर रख दें और अपने धार्मिक, प्रशिक्षण, आर्थिक और बौद्धिक प्रबंधन को ज़ाहिर करें।

कभी कभी हमारे बच्चे और बीवी एक छोटी सी मुस्कुराहट को तरस जाते हैं, बच्चे माता पिता के साथ खेलने को तरस जाते हैं। हमको यह नहीं भूलना चाहिए कि वह लोग जो बहुत बड़े महापुरुष थे, उन लोगों से भी बहुत बड़ी हस्ती थे जो हमारी नज़र में सम्मानीय हैं, घर में झुककर मिलते थे और अपने बच्चों को अपनी पीठ या कंधे पर बिठाते थे ताकि वह ख़ुश रहें और हंसे। हमारे परिवार को केवल रोटी, कपड़ा और मकान की आवश्यकता नहीं है, उनकी ख़ुशी और हंसी सबसे महत्वपूर्ण है। (AK)  

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