नया सवेरा- 1
आज का इंसान भौतिकवाद और क्षणिक आनंदों से हताश और निराश, मुक्ति के मार्ग की तलाश में चारों ओर भटक रहा है।
इस बीच कुछ अवसरवादियों या मौक़ापरस्तों ने मानव की इस चाह का अंदाज़ा लगाकर कुछ झूठी विचारधाराओं को प्रचलित किया है ताकि वे इस प्रकार की भावनाओं का दुरूपयोग करते हुए अपनी रोटियां सेक सकें।
बहुत से ईसाई जो मुसलमान होते हैं उनके मुसलमान होने का एक कारण इसाई धर्म में पाए जाने वाले कुछ विरोधाभास हैं। हेनरी जूनियर के दिमाग़ को किशोर अवस्था से ही यह विरोधाभास परेशान किये हुए था। हेनरी का कहना है कि यह बात मेरी समझ में नहीं आती कि ईसा मसीह ने सूली पर क्यों कहा था कि हे ईश्वर! तूने मुझको क्यों छोड़ दिया? हेनरी कहते हैं कि मैं इस बात को तो मानता था कि ईसा मसीह का जन्म बिना पिता के हुआ है किंतु यह बात मेरी समझ में नहीं आती थी कि जब हम इसाइयों की नज़र में ईसा मसीह, ईश्वर की सबसे अच्छी सृष्टि थे तो फिर ईश्वर ने उनको हमारे गुनाहों की माफ़ी के लिए मार डाला? मैं ईश्वर से क्यों यह नहीं कह सकता कि मुझको इस बात पर अफ़सोस है? यह सारी बातें मेरी समझ से पूरी तरह से बाहर थीं।
इसाई धर्म की शिक्षाओं में पाए जाने वाले विरोधाभास और उससे संबन्धित प्रशनों के संतोश जनक उत्तर न मिल पाने के कारण हेनरी जूनियर ने १७ वर्ष की आयु से चर्च जाना छोड़ दिया। हालांकि हेनरी सत्रह वर्षों के बाद से चर्च नहीं जा रहा था किंतु ईश्वर पर उसकी आस्था बाक़ी थी और वह अधर्मी नहीं हुआ था। इस घटना के तीन वर्षों के बाद जब हेनरी की आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब हो चुकी थी उस समय उसके साथ एसी घटना घटी जिसने उसके जीवन को परिवर्तित कर दिया। इस घटना के बारे में हेनरी जूनियर का कहना था कि बीस साल में मेरी स्थिति इतनी ख़राब हो गई कि मेरे पास घर नहीं रहा।
सास्तविकता के खोजी हेनरी के लिए केवल मुसलमान होना पर्याप्त नहीं था। हेनरी ने जब इस्लामी किताबों का अधिक अध्ययन किया तो उसने लोगों से पैग़म्बरे इस्लाम (स) और उनके पवित्र परिजनों के बारे में जानकारी हासिल करनी चाही। इस बारे में उसको कोई ढंग का जवाब नहीं मिलता था। अब वह पैग़म्बरे इस्लाम (स) और उनके पवित्र परिजनों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करने का इच्छुक था। इसी दौरान हेनरी के सामने एक एसी घटना घटी जिसके बाद उसको शिया मुसलमानों के बारे में जानने की उत्सुक्ता बढ़ती गई।
हेनरी का कहना है कि जब मैं इस घटना को देख रहा था तो मेरे मन में विचार आया कि पहले यह देखूं कि शिया कौन होते हैं और उनके विचार क्या हैं। उनका कहना था कि इसी त की खोज के लिए मैं एक इस्लामी केन्द्र गया जो मस्जिदे अहले बैत में था। इस केन्द्र का काम लोगों का इस्लामी मार्गदर्शन करना था। हेनरी कहते हैं कि मैं दो सप्ताहों तक लगातार शिया मुसलमानों के इस्लामी केन्द्र में गया जहां पर मैंन कई प्रकार के प्रश्न पूछे। उसका कहना है कि इस केन्द्र के ज़िम्मेदार ने अपनी बातों के बहुत ही संतोषजनक उत्तर दिये। बाद में उन्होंने मुझको पढ़ने के लिए एक मुस्तक दी जिसका नाम था, देन आई वाज़ गाइडेड। मैंने इस पूरी पुस्तक का अध्ययन किया। इस किताब के लेखक डाक्टर मुहम्मद तीजानी ने अपनी बातों को समझाने के लिए विशेष प्रकार की शैली अपनाई थी। उन्होंने क़ुरआन की आयतों के साथ पैग़म्बरे इस्लाम (स) के केवल उन्हीं कथनों का उल्लेख किया था जिसे शिया और सुन्नी मुसलमान दोनों ही मानते हैं। हेनरी का कहना था कि इस किताब को पढ़ने के बाद मुझको वास्तविकता का पता चल गया और मैं शिया मुसलमान हो गया।
विशेष बात यह है कि हेनरी शूलेन जूनियर, एसे मुसलमान है जो इस्लाम स्वीकार करने के बाद अल्य लोगों के लिए इस पवित्र धर्म की ओर आकर्षण रखने वालों के आकर्षण का केन्द्र बन चुके हैं। अपनी परिपूर्णता के कारण इस्लाम उस वातावरण में भी तेज़ी से फैल रहा है जहां पर नैतिक बुराइयां अपने चरम पर हैं।