Jul २२, २०२० १९:१९ Asia/Kolkata

इस कार्यक्रम में हम पोलैण्ड की रहने वाली एक महिला क मुसलमान होने के बारे में बात करेंगे।

मित्रो, इस समय विभिन्न धर्मों और विचारधारों के लोग बहुत तेज़ी से इस्लाम की ओर बढ़ रहे हैं। हालिया वर्षों में मुसलमान होने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। संसार के लगभग हर क्षेत्र से लोग इस्लाम को गले लगा रहे हैं। ईश्वर ने पवित्र क़ुरआन में अन्तिम ईश्वरीय धर्म के विस्तार के बारे में बताया है।

इस संबन्ध में सूरे तौबा की आयत संख्या ३३ में ईश्वर कहता है कि वह, वही है जिसने अपने रसूल अर्थात (हज़रत मुहम्मद) को मार्गदर्शन के साथ भेजा ताकि वे उसको सारे धर्मों पर वरीयता दे सके चाहे अनेकेश्वरवादी की यह बुराई लगे।

इस्लाम को स्वीमार करने का यह क्रम शताब्दियों से जारी है। इसका मूल कारण यह है कि इस्लाम की शिकाएं मनुष्य की बुद्धि और उसकी प्रवृत्ति के अनुरूप हैं। इस समय मुसलमान होने वालों में महिलाओं की संख्या अधिक है। जो महिलाएं मुसलमान हो रही हैं उनमें से एक marzena Geralska मर्ज़ेना गोरालस्को भी हैं।

श्रीमती मर्ज़ोना गोरालस्का पोलैण्ड की रहने वाली हैं। उनकी जन्म एक ईसाई परिवार में हुआ था। ईसाई धर्म की शिक्षाओं के संधन्ध में जब गोरालस्का ने सवाल पूछने शरू किये तो उनको इस बारे में संतोष जनक उत्तर नीहं मिले। उनको एसा लगा कि उनकी धारमिक शिक्षाओं में कुछ खुले विरोधाभास पाए जाते हैं।

इसी बीच उन्होंने एक मुसलमान से शादी कर ली। पोलैण्ड की इस महिला का कहना है कि एक मुसलमान व्यक्ति से शादी करने के बावजूद मैं मुसलमान नहीं हुई थी किंतु इस्लाम के बारे में मैंने अपने पति से बहुत से प्रश्न किये। वे कहती हैं कि मेरे पति ने मुझपर मुसलमान होने के लिए दबाव नहीं बनाया। उनका कहना था कि जब मैंने अपने पति से इस्लाम के बारे में प्रश्न किये तो उन्होंने मुझसे कहा कि तुम स्वयं उसका अध्धयन करो। इसके लिए उन्होंने मुझको कुछ किताबें लाकर दीं जिनको मैंने पढ़ा। बाद में मैंने अपने मन में धर्मों के बारे में उठने वाले प्रशनों के जवाब के लिए धर्मगुरूओं से भी प्रशन पूछे।

श्रमती गोरालस्का कहती हैं कि मैं इस्लामी शिक्षाओं का बहुत गहराई से अध्ययन कर रही थी। मेरे बहुस से प्रश्नों के उत्तर मुझको मिल चुके थे किंतु मैं अभी भी इसाई धर्म पर ही थी।

श्रमती गोरालस्का का मानना है कि इस्लाम स्वीकार करना मेरे लिए एक नए जीवन की तरह है। अब मैं प्रयास करके स्वयं को अच्छा बना सकती हूं। मैं अच्छे कामों को अपनाते हुए बुरे कामों से दूरी करके एक अच्छा भविष्य निर्धारित कर सकती हूं।

पवित्र क़ुरआन , ईश्वर का महान चमत्कार है। इस ईश्वरीय पुस्तक का लक्ष्य, मानव जाति का मार्गदर्शन करते हुए उसे परिपूर्णता तक पहुंचना है।

श्रमती गोरालस्का कहती हैं कि मेरे लिए जो चीज़ बहुत ही रोचक थी वह क़ुरआन की वैज्ञानिक बातें थीं। विशेष बात यह है कि क़ुरआन में बताई जाने वाली बहुत सी वैज्ञानिक बातें आधुनिक युग में किये गए अनुसंधानों से सिद्ध हत चुकी है।

वे लोग जो इस्लाम में महिला के स्थान और महत्व के बारे में अध्ययन और शोध करते हैं उनको पता चलता है कि इस्लाम, महिला को मानवीय आयाम से देखता है केवल भौतिक दृष्टि से नहीं। इस्लाम का महिलाओं से यह कहना है कि वे समाज में इस प्रकार स हाज़िर हों कि उनका दुरूपयोग न किया जा सके। श्रमती गोरालस्का कहती हैं कि वास्तव में सुन्दरता मनुष्य के भीतर होती है जो उसके बाहरी रूप में सुन्दर बनाती है। मैं इसको स्वतंत्रता मानती हूं क्योंकि मैं इसलिए मजबूर हूं कि किसी के कहने पर अपना जीवन गुज़ारूं। मेरे निकट इस बात का कोई महत्व नहीं है कि दूसरों की दृष्टि में मैं कैसी हूं।

श्रमती गोरालस्का कहती हैं कि जब मैं मुसलमान हुई तो मेरे सामने भी यह मुद्दा आया। वे कहती हैं कि न तो मुझको किसी व्यक्ति ने मुसलमान किया था और न ही किसी संस्था के माध्यम से मैंने इस्लाम स्वीकार किया था । मैंने गहन अध्ययन करने के बाद इस्लाम को गले लगाया। मेरे पति ने मुझको यह तो बताया था कि मुसलमानों में कई पंथ हैं किंतु किसे अपनाया जाए यह काम तुम्हारा है मेरा नहीं ।