पासारगाद, ईरानी वास्तुकला का जन्मस्थान और विश्व का पहला डिजाइन्ड पार्क
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पासारगाद, ईरानी वास्तुकला का जन्मस्थान और विश्व का पहला डिजाइन्ड पार्क
पासारगाद, ईरान - वैश्विक धरोहर स्थल पासारगाद, ईरान के फ़ार्स प्रांत के पासारगाद जिले में स्थित, हख़ामनी साम्राज्य के प्राचीन अवशेषों का एक ग्रुप है।
यह पासारगाद है, हख़ामनी वंश की पहली राजधानी, जिसकी स्थापना छठी शताब्दी ईसा पूर्व में साइरस महान ने की थी। पार्सटूडी की रिपोर्ट के अनुसार, पासारगाद की कलात्मक और तकनीकी नवीनताएँ, मिश्रित कला से लेकर जन्नती पार्कों के डिजाइन तक, न केवल राजा के महल की शोभा बढ़ाती थीं, बल्कि उन्होंने पश्चिमी एशिया की वास्तुकला और डिजाइन के लिए एक मॉडल तैयार किया जिसकी गूँज सदियों तक कायम रही। पासारगाद के खंडहरों के बीच टहलना, एक विचार के जन्मस्थान में कदम रखना है, बहु-सांस्कृतिक साम्राज्य की अवधारणा और उस ईरानी सभ्यता की नींव को देखना जिसने प्राचीन दुनिया को प्रभावित किया।
पत्थर और कलात्मक व तकनीकी प्रतिभा का मेल
पासारगाद का वास्तुशिल्प परिदृश्य, साइरस महान के वैश्विक दृष्टिकोण का एक चमत्कारी साक्ष्य है; जिसने अपने विशाल साम्राज्य की सर्वश्रेष्ठ कौशल और परंपराओं को एक नई साम्राज्यवादी सौंदर्यशास्त्र की रचना के लिए काम में लिया।
साइरस के वास्तुकारों और पत्थर तराशने वाले कारीगरों ने, संभवतः नव-विजित लीडिया और आयोनिया क्षेत्रों से, पत्थर पर काम करने का एक अद्वितीय कौशल ईरान लाया। इस तकनीकी क्षमता ने सटीक पत्थर के चबूतरों, ऊँचे स्तंभों और नक़्क़ाशीदार दरवाज़ों के निर्माण को संभव बनाया; ये वे तत्व थे जो हख़ामनी वास्तुकला की पहचान बन गए।
पासारगाद की सबसे अद्भुत और स्थायी नवीनता उसकी पत्थरकारी में नहीं, बल्कि उसके डिजाइन में निहित है। पुरातत्वविदों ने पत्थर की नहरों और हौज़ों का एक जाल खोजा है जो दो सटे हुए आयत बनाते थे; एक ऐसी रूपरेखा जो बगीचे को ठीक चार हिस्सों में बाँटती थी।
यह डिजाइन संभवतः मेसोपोटामिया में साइरस की उपाधि, "दुनिया के चार कोनों के राजा" का वास्तुशिल्प प्रतिबिंब था।
पासारगाद में विकसित चारबाग़ डिजाइन का बार-बार पुनरुद्धार और विकास हुआ, और इसका प्रभाव निकट पूर्व की सीमाओं से परे, इस्लामी और अन्य जगहों के बगीचों के डिजाइन का एक आधारस्तंभ बन गया।
पासारगाद में, कला और प्रौद्योगिकी अलग-अलग रास्ते नहीं थे, बल्कि वे न केवल एक राजधानी, बल्कि एक नई साम्राज्यवादी पहचान के निर्माण के लिए आपस में जुड़े हुए उपकरण थे। एक ऐसी पहचान जो तकनीकी रूप से उन्नत होने के साथ-साथ कलात्मक रूप से साहसी और दार्शनिक रूप से गहन थी।
पासारगाद: विश्व धरोहर की एक अनूठी मशाल
एक साम्राज्य की राजधानी के रूप में जो पूर्वी भूमध्य सागर से सिंधु नदी तक फैला हुआ था, पासारगाद हख़ामनी सभ्यता के प्रारंभिक चरण का एक अनूठा गवाह है; एक राजनीतिक ढाँचा जो जानबूझकर एक बहु-सांस्कृतिक परियोजना के रूप में तैयार किया गया था, जहाँ विभिन्न परंपराओं को हटाया नहीं गया, बल्कि उनका समामेलन किया गया।
विविधता के लिए यह सम्मान, जो असीरिया जैसे साम्राज्यों की कठोर एकरूपता की नीतियों के विपरीत था, हख़ामनी राजनीति के केंद्र में था, और पासारगाद इसकी पहली और सबसे शुद्ध वास्तुशिल्प अभिव्यक्ति है।
यूनेस्को ने इस स्थल के असाधारण सार्वभौमिक मूल्य को ठीक इसी आधार पर मान्यता दी है; क्योंकि यह ईरानी शास्त्रीय कला और वास्तुकला के विकास में एक मौलिक चरण को प्रदर्शित करता है, एक ऐसी शैली जो आयोनियाई, लिडियाई, मिस्र, बेबीलोन और एलामाइट प्रभावों के मिश्रण से उभरी और एक शानदार और सुसंगत संपूर्ण में बदल गई। (AK)