पेज़ेशकियान: हमें क्षेत्र में वास्तविक बहुपक्षवाद की आवश्यकता है
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मसूद पेज़ेशकियान, इस्लामी गणराज्य ईरान के राष्ट्रपति
पार्सटुडे– ईरान के राष्ट्रपति ने स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल (CIS) के शिखर सम्मेलन में ईरान की विशेष अतिथि के रूप में पहली उपस्थिति में क्षेत्र की वास्तविक बहुपक्षवाद की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए पारगमन, ऊर्जा, व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग के विकास के लिए "CIS+1" तंत्र की स्थापना का प्रस्ताव रखा।
पार्सटुडे के अनुसार इस्लामी गणराज्य ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने राष्ट्रमंडल देशों के शिखर सम्मेलन में अपने भाषण में इस बात पर ज़ोर दिया कि हमारे क्षेत्र को युद्ध, संकट, बाहरी दबाव और आर्थिक व संचार मार्गों में व्यवधान के प्रति लचीलेपन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है और इस मार्ग में सफलता के लिए सबसे पहले क्षेत्रीय क्षमताओं को एक-दूसरे से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया: "हमारे साझा हित मार्गों के बीच प्रतिस्पर्धा में नहीं बल्कि मार्गों के जुड़ाव में हैं। मध्य एशिया के लिए इस्लामी गणराज्य ईरान केवल एक साझेदार नहीं है; बल्कि मध्य एशिया और यूरेशिया को खुले जल से जोड़ने का एक स्वाभाविक मार्ग है। खाड़ी फ़ार्स और ओमान सागर में ईरान के दक्षिणी बंदरगाह विशेष रूप से चाबहार इस क्षेत्र को दक्षिण एशिया, अफ्रीका और फिर यूरोप से जोड़ सकते हैं।"
यह व्यक्त करते हुए कि इस्लामी गणराज्य ईरान स्वयं को क्षेत्र के अंतर्संबद्ध भूगोल का एक स्वाभाविक हिस्सा मानता है और यह जुड़ाव केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, सभ्यता और जनसंपर्क में निहित है, उन्होंने आगे कहा: "इसी आधार पर, इस्लामी गणराज्य ईरान प्रस्ताव करता है कि 'स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रमंडल + ईरान' या 'CIS+1' को एक लचीले और प्रभावी संवाद व सहयोग तंत्र के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि हम पारगमन, ऊर्जा, व्यापार, खनन, निवेश, प्रौद्योगिकी, जल और पर्यावरण, पर्यटन तथा वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संचार के क्षेत्रों में साझा सहयोग विकसित कर सकें।"
पेज़ेशकियान ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि आज हम केवल अलगाव या निर्भरता के बीच चुनाव का सामना नहीं कर रहे हैं; बल्कि हमें अपनी क्षमताओं को एक-दूसरे से जोड़ना होगा ताकि प्रत्येक देश अपनी स्वतंत्रता और राष्ट्रीय चुनावों को बनाए रखते हुए इस साझा भूगोल के लाभों से लाभान्वित हो सके। उन्होंने कहा: "हम विभाजन के बजाय जुड़ाव; थकाऊ प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग; एकपक्षीय निर्भरता के बजाय पारस्परिक निर्भरता; और धमकी आधारित सुरक्षा के बजाय विश्वास और साझा हितों पर आधारित सुरक्षा चाहते हैं।" mm