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लोमड़ी और चक्कीबान-1
Apr २४, २०१६ ०८:२६कहते हैं कि पुराने युग में एक चक्की वाला था कि जो लोगों के गेहूं पीसता था और मज़दूरी उसी आटे से ले लिया करता था कि जो वह पीसा करता था और उसे चक्की के एक कोने में इकट्ठा किया करता था।
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सैयद इस्माईल जुरजानी
Apr २४, २०१६ ०८:००“सैयद इस्माईल जुरजानी” ईरान के उन विख्यात चिकित्सकों में से एक हैं जिनकी ख्याति के बावजूद उनके जीवन के बारे में बहुत कम जानकारियां उपलब्ध हैं।
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शुक्रवार- 24 अप्रैल
Apr २४, २०१६ ०६:१३1877, रुस ने उस्मानी साम्राज्य के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा कर दी
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नासिर ख़ुसरो-6
Apr २३, २०१६ १०:१३अबूमोईन नासिर बिन ख़ुसरो बिन हारिस क़ोबादियानी बल्ख़ी का काल पांचवी हिजरी शताब्दी या ग्यारहवी ईसवी था।
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नासिर ख़ुसरो-5
Apr २३, २०१६ १०:१२हमने कहा था कि नासिर ख़ुसरो क़ुबादियानी युवा अवस्था से ही दरबार की सेवा में व्यस्त रहे, लेकिन 43 वर्ष की आयु में एक सपने के परिणाम स्वरूप, उनके भीतर परिवर्तन हुआ और वे काबे की ज़ियारत करने के लिए पवित्र शहर मक्का चले गए।
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नासिर ख़ुसरो-4
Apr २३, २०१६ १०:१०इस्लाम का इस्माईलिया मत स्वीकार करने के कारण, धीरे धीरे उनके विरोधियों की संख्या बढ़ती गई और जीवन उनके लिए कठिन हो गया। दुश्मनी और विरोध से दूर शांति प्राप्ति के लिए वे बदख़शान में यमगान घाटी चले गए।
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नासिर ख़ुसरो-3
Apr २३, २०१६ १०:०८हमने कहा था कि नासिर ख़ुसरो क़ुबादियानी युवा अवस्था से ही दरबार की सेवा में व्यस्त रहे, लेकिन 43 वर्ष की आयु में एक सपने के परिणाम स्वरूप, उनके भीतर परिवर्तन हुआ और वे काबे की ज़ियारत करने के लिए पवित्र शहर मक्का चले गए।
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नासिर ख़ुसरो-2
Apr २३, २०१६ १०:०३हमने कहा था कि नासिर ख़ुसरो क़ुबादियानी युवा अवस्था से ही दरबार की सेवा में व्यस्त रहे, लेकिन 43 वर्ष की आयु में एक सपने के परिणाम स्वरूप, उनके भीतर परिवर्तन हुआ और वे काबे की ज़ियारत करने के लिए पवित्र शहर मक्का चले गए।
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नासिर ख़ुसरो-1
Apr २३, २०१६ ०९:५९जैसा कि आपको यह बताया था कि नासिर ख़ुसरो चूंकि इस्माइली रुझान रखते थे, इसलिए उन्होंने दरबारी सेवा से हटने का फ़ैसला लिया और अपनी उम्र अपने विचारों के प्रचार-प्रसार में गुज़ार दी।
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सनाई ग़ज़्नवी-4
Apr २३, २०१६ ०९:५६डाक्टर शफ़ीई कदकनी का मानना है कि जब फ़ारसी साहित्य के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि सनाई से पहले के शेर और सनाई के बाद से शेरों को पढ़ा जाता है तो जो सनाई को जानता है वह दोनों शेरों में अंतर की गहराई को भलिभांति समझता है और साअदी, हाफ़िज़ और मौलवी जैसे महान ईरानी शायरों में से किसी ने भी फ़ारसी शेर के इतिहास में इस प्रकार का दौर उत्पन्न नहीं किया।