-
तकफ़ीरी आतंकवाद-22
Aug ०६, २०१६ ११:४६इब्ने तैमिया ने अतिवादी आस्था की बुनियाद रखी जिसके प्रभाव व परिणाम 19वीं शताब्दी में मोहम्मद बिन अब्दुल वह्हाब के आन्दोलन के रुप में सामने आये।
-
तकफ़ीरी आतंकवाद-21
Jul २५, २०१६ ०८:२०हज़रत अली अलैहिस्सलाम और पैग़म्बरे इस्लाम के पवित्र परिजनों के स्थान के बारे में बहुत अधिक सही और ऐसी रवायतें मौजूद हैं जिनकी शीया-सुन्नी बड़े-2 विद्वानों ने पुष्टि की है।
-
तकफ़ीरी आतंकवाद -20
Jul २५, २०१६ ०७:३३अहमद इब्ने हंबल अहले सुन्नत के एक वरिष्ठ धर्मगुरु हैं, जो इस्लामी शिक्षाओं को समझने के लिए हदीस पर बहुत बल देते हैं।
-
तकफ़ीरी आतंकवाद-19
Jul १९, २०१६ ०८:२३सुन्नी समुदाय का मानना है कि पैग़म्बरे इस्लाम के स्वर्गवास के बाद ईश्वरीय संदेश वहि उतरने का सिलसिला बंद हो गया और पैग़म्बरे इस्लाम ने जो कुछ पेश कर दिया वही पर्याप्त है और अब यदि किसी नई स्थिति और नए विषय का सामना होता है तो अपनी बुद्धि का प्रयोग करके उसके बारे में इस्लाम का आदेश तय करना होगा।
-
तकफ़ीरी आतंकवाद-18
Jul ०४, २०१६ ०५:२५वहाबी सलफीवाद का तकफीरी और धार्मिक विश्वासन से विचारधारा जबकि मिस्री सलफीवाद का राजनीतिक पहलु है और वह इस्लामी जगत की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थिति की प्रतिक्रिया में अस्तित्व में आया है।
-
तकफ़ीरी आतंकवाद-17
Jul ०३, २०१६ ११:३७हमने भारतीय उपमहाद्वीप से मिस्र की ओर सलफ़ीवाद के विस्तार पर चर्चा की।
-
तकफ़ीरी आतंकवाद-16
Jul ०३, २०१६ ०९:२३हमने भारत को इस्लामी जगत के वैचारिक व आबादी के ध्रुवों में से एक ध्रुव के रूप में पहचनवाया और शाह वलीयुल्याह देहलवी तथा उनके बेटे शाह अब्दुल अज़ीज़ के विचारों और देवबंदी मत के वजूद में आने में उसके प्रभाव का उल्लेख किया था।
-
तकफ़ीरी आतंकवाद-14
Jun १३, २०१६ ०७:५६तकफ़ीरी सलफ़ीवाद, जेहादी सलफ़ीवाद, प्राचारिक सलफ़ीवाद, राजनैतिक सलफ़ीवाद और सुधारवादी सलफ़ीवाद, यह सलफ़ीवाद की पांच मुख्य शाखाएं हैं।
-
तकफ़ीरी आतंकवाद-12
Apr ०६, २०१६ १०:१२इस्लामी देशों की कुछ तानाशाही सरकारें ईरान की इस्लामी क्रांति के प्रभावों के फैलने से चिंतित थीं इसीलिए उन्होंने इसके प्रभाव को रोकने व सीमित करने का यथासंभव प्रयास किया।
-
तकफ़ीरी आतंकवाद-9
Apr ०६, २०१६ ०९:४८यद्यपि पिछली शताब्दियों के दौरान सलफ़ीवाद के आधार और सिद्धांत बाक़ी रहे हैं किन्तु समय और स्थान की विशेषताओं और परिस्थितियों के अनुसार उसमें ऐसे परिवर्तन अस्तित्व में आते हैं जिससे समकालीन सलफ़ीवाद को पूर्ण रूप से वही पारंपरिक सलफ़ीवाद या क्लासिकल सलफ़ीवाद कहा जा सके।